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Sirsa News: प्रदूषण नहीं खुशहाली...पराली से बरस रहा पैसा, 400 लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा चुके पनिहारी गांव के किसान रणजीत सिंह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Oct 2025 11:36 PM IST
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Not pollution but prosperity... Ranjit Singh, a farmer from Panihari village, has been earning money from stubble and has provided employment to 400 people.
पराली पेलेट्स के प्लांट में किसान रणजीत सिंह। 
सिरसा। जिले के प्रगतिशील किसानों ने अब पराली को समस्या नहीं, बल्कि आय और रोजगार का जरिया बना लिया है। गांव पनिहारी निवासी किसान रणजीत सिंह ने पराली प्रबंधन के क्षेत्र में नया उदाहरण पेश किया है। वे करीब 10 लाख क्विंटल पराली का प्रबंधन कर अब तक 400 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध करा चुके हैं।
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रणजीत सिंह की कंपनी का सालाना टर्नओवर 100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। उनका मानना है कि पराली से रोजगार और पर्यावरण संरक्षण दोनों की अपार संभावनाएं हैं, बस जरूरत है सही दिशा में काम करने की। रणजीत सिंह ने वर्ष 2017 में पराली प्रबंधन की दिशा में कदम बढ़ाया। सरकार की योजनाओं और कृषि विभाग के सहयोग से उन्होंने 2019 में बेलर मशीन खरीदी। इसके बाद उन्होंने पराली को रोजगार और उद्योग से जोड़ने का संकल्प लिया।
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स्नातक शिक्षित रणजीत सिंह बताते हैं कि उन्होंने पराली से प्रोडक्ट बनाकर बाजार में बेचने की योजना बनाई थी, और शुरुआत में ही उन्हें इसमें मुनाफा नजर आने लगा। आज उनकी कंपनी सिरसा जिले के विभिन्न गांवों से पराली एकत्र कर रही है। वर्तमान में वे करीब 10 हजार एकड़ क्षेत्र की पराली का उठान करते हैं और अब तक ढाई लाख क्विंटल से अधिक पराली का प्रबंधन कर चुके हैं।
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रणजीत सिंह के पास खुद की 20 एकड़ भूमि है और वे 40 एकड़ भूमि धान की बुवाई के लिए ठेके पर लेते हैं। इसके अलावा हर साल 30 एकड़ अतिरिक्त भूमि पराली और उससे बने प्रोडक्ट को रखने के लिए किराये पर लेते हैं। वे बताते हैं कि वे पराली से केवल तूड़ी नहीं बनाते, बल्कि उससे विभिन्न औद्योगिक उत्पाद (प्रोडक्ट) तैयार कर रहे हैं।
पावर प्लांटों में भेजते हैं पराली से बने पेलेट : रणजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने पराली और अन्य फसली अवशेषों को मिलाकर बायोफ्यूल पेलेट तैयार करने का काम शुरू किया है। इन पेलेट्स को वे पावर प्लांटों में ईंधन के रूप में भेजते हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल लाभकारी रोजगार है, बल्कि इससे पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान मिलता है।

उन्होंने गर्व से बताया कि उनके साथ 400 से अधिक लोग स्थायी रूप से जुड़े हैं, जो खेतों से पराली उठाने से लेकर पेलेट निर्माण तक की प्रक्रिया में कार्यरत हैं। रणजीत सिंह ने कहा कि यदि किसान पराली को जलाने के बजाय उसे संसाधन मानें, तो यह न केवल आय का माध्यम बन सकती है बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी कर सकती है।
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