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जिला स्तरीय खेल मैदान का रखरखाव न पर्याप्त कोच
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खेल स्टेडियम के रोड का निकला पत्थर और बजरी । संवाद
- फोटो : Sirsa
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सिरसा। जिले का मुख्य शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम सुविधाओं के अभाव में हांफ रहा है। रखरखाव न होने के चलते विभिन्न खेलों के मैदानों की हालत खस्ता बना हुई है। वहीं विभाग के पास खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने तक के लिए पर्याप्त कोच भी नहीं है। इसके चलते खिलाड़ियों को निजी प्रशिक्षण केंद्रों की ओर रुख करना पड़ रहा है। स्टेडियम में बना ट्यूबवेल दो साल से खराब पड़ा है। इसके चलते पानी की कमी से हरी घास व एस्ट्रोटर्फ खराब हो रहे हैं।
खिलाड़ियों की ओर स्टेट व नेशनल स्तर पर पदक आने पर जिला खेल विभाग खूब वाहवाही लूटता है, लेकिन अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों को देने के लिए मूलभूत सुविधा भी मुहैया नहीं करवा पा रहा। मरम्मत करवाने को लेकर विभाग में क्या चल रहा है, इसकी जानकारी से जिला खेल अधिकारी बेखबर है। शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम में खेल कोच की कमी तो हमेशा से ही चली आ रही है, लेकिन बीते दो साल से स्टेडियम को पानी सप्लाई करने वाला ट्यूबवेल खराब पड़ा है। ट्यूबवेल खराब होने के चलते खेल मैदानों से हरी घास गायब हो गई है। पानी की कमी के चलते खेल मैदानों पर धूल उठने से एथलीट अभ्यास करने के दौरान परेशानी आती है।
हॉकी मैदान पर लगा करोड़ का एस्ट्रोटर्फ खराब होने की कगार पर
हॉकी खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए सरकार की ओर से करोड़ों की लागत से एस्ट्रोटर्फ लगाकर नेशनल स्तर का ग्राउंड बनाया है। एस्ट्रोटर्फ पर अभ्यास के दौरान पानी होना अनिवार्य है, लेकिन दो साल से खिलाड़ी बिना पानी के ही उसमें अभ्यास कर रहे है। एस्ट्रोटर्फ पानी की कमी के भी खराब हो रहा। हॉकी मैदान में पानी न होने के चलते खिलाड़ी चोटिल भी हो रहे है। कोई विकल्प न होने के कारण विद्यार्थी अभ्यास में जुटे हुए है। हालात ऐसे है कि मैदान के चारों ओर लगी ग्रिल टूट चुकी है।
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गांव के खेल मैदान व जिला स्टेडियम का सामान है हाल
स्टेट हैंडबाल के लिए गांव फूलकां से करीब 11 खिलाड़ियों का चयन हुआ है। खिलाड़ी अभ्यास के लिए गांव की योगशाला के मैदान का इस्तेमाल करते है। ऐसे में वहां ना तो लाइट का प्रबंध है और ना ही पानी का। अभ्यास के बाद सारा सामान पास के घरों में रखना पड़ता है।
फूलकां से हैंडबाल में नेशनल खेल चुके सुनील ने बताया कि मैदान सही न होने से खेल का अभ्यास नहीं हो पाता। अच्छे खेल मैदान की आस में जब जिला खेल मैदान में अभ्यास करने आए तो यहां का खेल मैदान भी खस्ता हालात में पाया। खेल को लेकर बस वर्क आउट सही से हो पाता है, लेकिन खेल अभ्यास नहीं।
खेल कोच की कमी, नहीं मिल रहा प्रशिक्षण
एक ओर गांवों में खेल मैदानों की कमी के साथ जिला स्तर पर कोचों की कमी भी है, जिससे संबंधित खेलों के खिलाड़ियों को सही से प्रशिक्षण नहीं मिल रहा। जिले के पास 8 खेल कबड्डी, शूटिंग, खो-खो, बेटमिंटन, वेट लिफ्टिंग, साइकलिंग, फुटबाल व टेबल टेनिस का प्रशिक्षण देने के लिए कोच नहीं है। जबकि इन खेलों के करीब 110 खिलाड़ी खेलों हरियाणा में भाग लेने के लिए अलग-अलग जिलों में गए हैं।
स्टेडियम की सड़कों पर बजरी की ढेरियां
भगत सिंह स्टेडियम परिसर में पक्की सड़के बनी हुई है, लेकिन रख रखाव सही से ना होने के चलते सड़क पर बजरी के ढेरियां लग गई है। जिसके खिलाड़ी नंगे पांव या चप्पल पहनकर इस सड़क से नहीं गुजर सकते। साथ ही वाहन फिसलने का डर बना रहता है।
फिजिकल तैयारी के लिए गांव से शहर पहुंच रहे है युवा
गांव जोधपुरिया, चाडीवाल, बकरियां वाली, मोड़ावाली, गिगोरानी, नोहर व गुसाईआना के युवा फौज व पुलिस में जाने के लिए तैयारी कर रहे है। गांव में खेल मैदान न होने के चलते उन्हें तैयारी करने के लिए उन्हें हर रोज एक लंबा सफर तय कर शहर पहुंचना पड़ता है। युवा सुनील, अमित, विवेक ने बताया कि गांव में खेल मैदान न होने के चलते तैयारी करने के लिए के जिले के खेल स्टेडियम में आना पड़ता है।
वर्जन
मरम्मत को लेकर क्या चल रहा है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। सारी समस्या उपायुक्त के संज्ञान में है।
लाजवंती, जिला खेल अधिकारी सिरसा।
वर्जन
खेल मैदानों के मरम्मत कार्य को लेकर हम जानकारी साझा नहीं कर सकते। जब होगा उस समय आकर देख लें।
हरी राम, डिप्टी सुपरिटेंडेंट, जिला खेल विभाग।
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खिलाड़ियों की ओर स्टेट व नेशनल स्तर पर पदक आने पर जिला खेल विभाग खूब वाहवाही लूटता है, लेकिन अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों को देने के लिए मूलभूत सुविधा भी मुहैया नहीं करवा पा रहा। मरम्मत करवाने को लेकर विभाग में क्या चल रहा है, इसकी जानकारी से जिला खेल अधिकारी बेखबर है। शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम में खेल कोच की कमी तो हमेशा से ही चली आ रही है, लेकिन बीते दो साल से स्टेडियम को पानी सप्लाई करने वाला ट्यूबवेल खराब पड़ा है। ट्यूबवेल खराब होने के चलते खेल मैदानों से हरी घास गायब हो गई है। पानी की कमी के चलते खेल मैदानों पर धूल उठने से एथलीट अभ्यास करने के दौरान परेशानी आती है।
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हॉकी मैदान पर लगा करोड़ का एस्ट्रोटर्फ खराब होने की कगार पर
हॉकी खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए सरकार की ओर से करोड़ों की लागत से एस्ट्रोटर्फ लगाकर नेशनल स्तर का ग्राउंड बनाया है। एस्ट्रोटर्फ पर अभ्यास के दौरान पानी होना अनिवार्य है, लेकिन दो साल से खिलाड़ी बिना पानी के ही उसमें अभ्यास कर रहे है। एस्ट्रोटर्फ पानी की कमी के भी खराब हो रहा। हॉकी मैदान में पानी न होने के चलते खिलाड़ी चोटिल भी हो रहे है। कोई विकल्प न होने के कारण विद्यार्थी अभ्यास में जुटे हुए है। हालात ऐसे है कि मैदान के चारों ओर लगी ग्रिल टूट चुकी है।
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गांव के खेल मैदान व जिला स्टेडियम का सामान है हाल
स्टेट हैंडबाल के लिए गांव फूलकां से करीब 11 खिलाड़ियों का चयन हुआ है। खिलाड़ी अभ्यास के लिए गांव की योगशाला के मैदान का इस्तेमाल करते है। ऐसे में वहां ना तो लाइट का प्रबंध है और ना ही पानी का। अभ्यास के बाद सारा सामान पास के घरों में रखना पड़ता है।
फूलकां से हैंडबाल में नेशनल खेल चुके सुनील ने बताया कि मैदान सही न होने से खेल का अभ्यास नहीं हो पाता। अच्छे खेल मैदान की आस में जब जिला खेल मैदान में अभ्यास करने आए तो यहां का खेल मैदान भी खस्ता हालात में पाया। खेल को लेकर बस वर्क आउट सही से हो पाता है, लेकिन खेल अभ्यास नहीं।
खेल कोच की कमी, नहीं मिल रहा प्रशिक्षण
एक ओर गांवों में खेल मैदानों की कमी के साथ जिला स्तर पर कोचों की कमी भी है, जिससे संबंधित खेलों के खिलाड़ियों को सही से प्रशिक्षण नहीं मिल रहा। जिले के पास 8 खेल कबड्डी, शूटिंग, खो-खो, बेटमिंटन, वेट लिफ्टिंग, साइकलिंग, फुटबाल व टेबल टेनिस का प्रशिक्षण देने के लिए कोच नहीं है। जबकि इन खेलों के करीब 110 खिलाड़ी खेलों हरियाणा में भाग लेने के लिए अलग-अलग जिलों में गए हैं।
स्टेडियम की सड़कों पर बजरी की ढेरियां
भगत सिंह स्टेडियम परिसर में पक्की सड़के बनी हुई है, लेकिन रख रखाव सही से ना होने के चलते सड़क पर बजरी के ढेरियां लग गई है। जिसके खिलाड़ी नंगे पांव या चप्पल पहनकर इस सड़क से नहीं गुजर सकते। साथ ही वाहन फिसलने का डर बना रहता है।
फिजिकल तैयारी के लिए गांव से शहर पहुंच रहे है युवा
गांव जोधपुरिया, चाडीवाल, बकरियां वाली, मोड़ावाली, गिगोरानी, नोहर व गुसाईआना के युवा फौज व पुलिस में जाने के लिए तैयारी कर रहे है। गांव में खेल मैदान न होने के चलते उन्हें तैयारी करने के लिए उन्हें हर रोज एक लंबा सफर तय कर शहर पहुंचना पड़ता है। युवा सुनील, अमित, विवेक ने बताया कि गांव में खेल मैदान न होने के चलते तैयारी करने के लिए के जिले के खेल स्टेडियम में आना पड़ता है।
वर्जन
मरम्मत को लेकर क्या चल रहा है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। सारी समस्या उपायुक्त के संज्ञान में है।
लाजवंती, जिला खेल अधिकारी सिरसा।
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खेल मैदानों के मरम्मत कार्य को लेकर हम जानकारी साझा नहीं कर सकते। जब होगा उस समय आकर देख लें।
हरी राम, डिप्टी सुपरिटेंडेंट, जिला खेल विभाग।

शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम में खेल की प्रेक्टिस करता खिलाड़ी संवाद- फोटो : Sirsa