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Sirsa News: डीएपी का स्टॉक नहीं, किसानों के लिए गेहूं बिजाई करना बना मुसीबत
Tue, 26 Nov 2024 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 26 Nov 2024 12:57 AM IST
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गेहूं बिजाई के लिए तैयार की गई जमीन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में डीएपी का स्टॉक नहीं होने से किसानों के लिए गेहूं की बिजाई करना मुसीबत बन गया है। जिले में बिजाई का 20 प्रतिशत रकबा अभी बाकी पड़ा है।
प्रशासन के पास अभी एनपीके और टीएसपी का स्टॉक है। मगर, डीएपी का स्टॉक अभी खत्म हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार एक सप्ताह के अंदर डीएपी का स्टॉक आने की उम्मीद है। जिससे बचे हुए किसानों को डीएपी उपलब्ध करवाई जाएगी ताकि वह अपनी बिजाई पूरी कर ले। गेहूं की बिजाई को लेकर अभी महज 5 दिन का ही समय शेष रहा है। इसलिए किसानों की चिंता बढ़ी हुई है।
वहीं, दूसरी ओर यूरिया के स्टॉक के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। तीन महीने के अंदर 55,000 मीट्रिक टन यूरिया की खरीद हो चुकी है। 22,000 मीट्रिक टन यूरिया ही मौजूदा समय में खरीद नहीं हुई है। ऐसे में बड़े स्तर पर यूरिया की खरीद होने आने वाले समय में यूरिया की कमी पैदा किए जाने की ओर इशारा करता है। अभी तक यूरिया का गेहूं में डालने का वक्त ही नहीं आया है। इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया का उठाना कुछ ओर संकेत दे रहा है। वहीं, किसान नेता लखविंद्र औलख भी पहले ही कह चुके है कि यूरिया का स्टाॅक किया जा रहा है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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बॉक्स
इस प्रकार पहुंची है जिले में खाद
डीएपी - 31 हजार मीट्रिक टन
टीएसपी - 4500 मीट्रिक टन
एनपीके - 4500 मीट्रिक टन
कुल पहुंची - 40000 मीट्रिक टन
विभाग की मांग थी-- 41000 मीट्रिक टन
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बॉक्स
यह बचा हुआ स्टॉक
एनपीके - 1500 मीट्रिक टन
टीएसपी - 1200 मीट्रिक टन
बिजाई - 20 प्रतिशत बाकी है।
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यूरिया
एक सितंबर को आई-- 77000 एमटी
तीन माह में बिकी - 55000 एमटी
बची हुई है-- 22000 एमटी
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एनपीके और टीएसपी नहीं आ रही रास
किसानों को एनपीके और टीएसपी रास नहीं आ रही है। दोनों का स्टॉक अभी तक एजेंसियों के पास पड़ा है। एनपीके महंगी होने के कारण किसान ज्यादा खरीद नहीं रहे हैं। वहीं, टीएसपी के अंदर नाइट्रोजन की मात्रा नहीं होने पर उसमें यूरिया मिलानी पड़ती है। इसलिए किसान उससे दूरी बनाए हुए हैं।
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10 एकड़ में गेहूं की बिजाई करनी है, लेकिन डीएपी नहीं मिल रही है। खरीद केंद्र के बाहर चार दिनों तक घंटों लाइ्रन में लग कर सिर्फ 4 कट्टे डीएपी खाद मिली। अभी भी 6 एकड़ के लिए खाद चाहिए। किसान छिंद्रपाल, गांव मीरपुर।
डीएपी खाद न मिलने के कारण गेहूं की बिजाई में देरी हो रही है। सात एकड़ के लिए डीएपी खाद चाहिए थी। दो दिनों तक लाइन में लग कर मात्र दो बैग ही मिले हैं। अभी भी पांच बैग की ओर जरूरत है। अब लग रहा है कि शायद बिना डीएपी के ही गेहूं की बिजाई करनी पड़ेगी। किसान गगनदीप, गांव केलनियां।
खाद मांग के अनुसार जिले में पहुंच चुकी है। एनपीके और टीएसपी भी 9000 मीट्रिक टन आई है। इनका स्टॉक हमारे पास है। किसानों की डीएपी की मांग है तो उसकी एक सप्ताह के अंदर आने की उम्मीद है।
-अमित शर्मा, एसडीओ, कृषि विभाग
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सिरसा। जिले में डीएपी का स्टॉक नहीं होने से किसानों के लिए गेहूं की बिजाई करना मुसीबत बन गया है। जिले में बिजाई का 20 प्रतिशत रकबा अभी बाकी पड़ा है।
प्रशासन के पास अभी एनपीके और टीएसपी का स्टॉक है। मगर, डीएपी का स्टॉक अभी खत्म हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार एक सप्ताह के अंदर डीएपी का स्टॉक आने की उम्मीद है। जिससे बचे हुए किसानों को डीएपी उपलब्ध करवाई जाएगी ताकि वह अपनी बिजाई पूरी कर ले। गेहूं की बिजाई को लेकर अभी महज 5 दिन का ही समय शेष रहा है। इसलिए किसानों की चिंता बढ़ी हुई है।
वहीं, दूसरी ओर यूरिया के स्टॉक के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। तीन महीने के अंदर 55,000 मीट्रिक टन यूरिया की खरीद हो चुकी है। 22,000 मीट्रिक टन यूरिया ही मौजूदा समय में खरीद नहीं हुई है। ऐसे में बड़े स्तर पर यूरिया की खरीद होने आने वाले समय में यूरिया की कमी पैदा किए जाने की ओर इशारा करता है। अभी तक यूरिया का गेहूं में डालने का वक्त ही नहीं आया है। इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया का उठाना कुछ ओर संकेत दे रहा है। वहीं, किसान नेता लखविंद्र औलख भी पहले ही कह चुके है कि यूरिया का स्टाॅक किया जा रहा है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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इस प्रकार पहुंची है जिले में खाद
डीएपी - 31 हजार मीट्रिक टन
टीएसपी - 4500 मीट्रिक टन
एनपीके - 4500 मीट्रिक टन
कुल पहुंची - 40000 मीट्रिक टन
विभाग की मांग थी
बॉक्स
यह बचा हुआ स्टॉक
एनपीके - 1500 मीट्रिक टन
टीएसपी - 1200 मीट्रिक टन
बिजाई - 20 प्रतिशत बाकी है।
यूरिया
एक सितंबर को आई
तीन माह में बिकी - 55000 एमटी
बची हुई है
एनपीके और टीएसपी नहीं आ रही रास
किसानों को एनपीके और टीएसपी रास नहीं आ रही है। दोनों का स्टॉक अभी तक एजेंसियों के पास पड़ा है। एनपीके महंगी होने के कारण किसान ज्यादा खरीद नहीं रहे हैं। वहीं, टीएसपी के अंदर नाइट्रोजन की मात्रा नहीं होने पर उसमें यूरिया मिलानी पड़ती है। इसलिए किसान उससे दूरी बनाए हुए हैं।
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10 एकड़ में गेहूं की बिजाई करनी है, लेकिन डीएपी नहीं मिल रही है। खरीद केंद्र के बाहर चार दिनों तक घंटों लाइ्रन में लग कर सिर्फ 4 कट्टे डीएपी खाद मिली। अभी भी 6 एकड़ के लिए खाद चाहिए। किसान छिंद्रपाल, गांव मीरपुर।
डीएपी खाद न मिलने के कारण गेहूं की बिजाई में देरी हो रही है। सात एकड़ के लिए डीएपी खाद चाहिए थी। दो दिनों तक लाइन में लग कर मात्र दो बैग ही मिले हैं। अभी भी पांच बैग की ओर जरूरत है। अब लग रहा है कि शायद बिना डीएपी के ही गेहूं की बिजाई करनी पड़ेगी। किसान गगनदीप, गांव केलनियां।
खाद मांग के अनुसार जिले में पहुंच चुकी है। एनपीके और टीएसपी भी 9000 मीट्रिक टन आई है। इनका स्टॉक हमारे पास है। किसानों की डीएपी की मांग है तो उसकी एक सप्ताह के अंदर आने की उम्मीद है।
-अमित शर्मा, एसडीओ, कृषि विभाग