{"_id":"66202b03d204c311e10d0bf6","slug":"mumps-is-affecting-children-outbreak-is-visible-again-after-five-years-sirsa-news-c-21-1-hsr1011-363303-2024-04-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: बच्चों को जद में ले रहा मम्प्स, पांच साल बाद फिर दिख रहा प्रकोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: बच्चों को जद में ले रहा मम्प्स, पांच साल बाद फिर दिख रहा प्रकोप
Thu, 18 Apr 2024 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 18 Apr 2024 01:33 AM IST
विज्ञापन
आशीष सिद्धू
सिरसा। मम्प्स एक वायरल संक्रमण होता है। ठंड लगना, सिरदर्द, भूख का कम हो जाना, बुखार और बीमार महसूस करना इसके लक्षणों में शामिल है। इसके साथ ही लार ग्रंथियों में सूजन आ जाती है। करीब पांच साल बाद इसका संक्रमण जिले में देखने का मिल रहा है। प्रतिदिन निजी व सरकारी अस्पतालों में संक्रमण से ग्रसित करीब 30 से 40 मरीज सामने आ रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है।
शहर से लेकर गांवों में भी मम्प्स अपने पैर पसारने में लगा है। इस बीमारी का पहलू यह है कि यह बच्चों के कान के नीचे उभरती है और बच्चों में सुस्ती व बुखार जैसी शिकायत आने लगती हैं। कई लोग तो इसे सामान्य बीमारी मानकर दरकिनार कर रहे हैं और सामान्य उपचार ले रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी को दरकिनार नहीं करना चाहिए। इससे पहले सिरसा में इस बीमारी का प्रकोप 5 साल पहले देखा गया था। गावों में बैठे लोग आज भी इस वायरस को बीमारी न समझकर झाड़-फूंक से ही काम चला रहे हैं। संवाद
बीमारी लंबी होने से वायरस दिमागी हिस्से पर करता है असर, यह जानलेवा भी हो सकता है
शहर के एक निजी अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ आशीष खुराना ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 15 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें अधिकतर बच्चे ही इस बीमारी से ग्रसित हैं। बच्चों के साथ-साथ महिलाओं में भी इस वायरस का असर देखने को मिल रहा है। डाक्टर ने बताया कि मम्प्स के लक्षणों में गले में सूजन और दर्द के साथ शारीरिक कमजोरी का महसूस होना शामिल है। कान के नीचे और गले के बीच फुंसी के समान बढ़ने वाला बड़ा हिस्सा भी मम्प्स की पहचान हो सकता है। डॉक्टर खुराना ने बताया कि काफी मरीजों में यह बीमारी एक सप्ताह में ही ठीक हो जाती है। कुछ केसों में यह लंबी चलने के बाद खतरनाक रूप भी ले सकती है। इससे यह वायरस दिमागी हिस्से पर जाकर असर करता है और यह जानलेवा भी हो जाती है। संक्रमण के लक्षण 16 से 18 दिनों में दिखने लगते हैं। इस समस्या का सही समय पर परामर्श और उपचार करवाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि प्रभावित मरीजों को नरम आहार देना और डॉक्टरों के निर्देशानुसार उपचार शुरू करना चाहिए।
विज्ञापन
13 से 14 महीने के शिशु का होता है टीकाकरण
बच्चों को जन्म के बाद 13 से 14 महीने की आयु में विभिन्न टीकाकरण दिए जाते हैं। इसमें मम्प्स का टीका भी शामिल होता है। यह टीकाकरण मम्प्स संक्रमण को रोकने में मदद करता है। कई बार अज्ञानतावश लोग मम्प्स का टीकाकरण बच्चों को नहीं करवाते। इसके बाद में बच्चे इसका शिकार होने लगते हैं। खासतौर पर गर्मी के सीजन में इस बीमारी का प्रकोप अधिक रहता है। संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना और सफाई रखना अति आवश्यक है।
नागरिक अस्पताल में मम्प्स बीमारी से ग्रसित मरीज आ रहे हैं। बच्चे इसका अधिक शिकार हो रहे हैं। अस्पताल में 20 से 25 मरीज सामने आ रहे हैं, जिनका उपचार चल रहा है। ऐसे लक्षण पाए जाएं तो बच्चों को तुरंत उपचार के लिए चिकित्सक के पास लेकर जाएं। - डॉ. भारत भूूषण, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल सिरसा।
विज्ञापन
सिरसा। मम्प्स एक वायरल संक्रमण होता है। ठंड लगना, सिरदर्द, भूख का कम हो जाना, बुखार और बीमार महसूस करना इसके लक्षणों में शामिल है। इसके साथ ही लार ग्रंथियों में सूजन आ जाती है। करीब पांच साल बाद इसका संक्रमण जिले में देखने का मिल रहा है। प्रतिदिन निजी व सरकारी अस्पतालों में संक्रमण से ग्रसित करीब 30 से 40 मरीज सामने आ रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है।
शहर से लेकर गांवों में भी मम्प्स अपने पैर पसारने में लगा है। इस बीमारी का पहलू यह है कि यह बच्चों के कान के नीचे उभरती है और बच्चों में सुस्ती व बुखार जैसी शिकायत आने लगती हैं। कई लोग तो इसे सामान्य बीमारी मानकर दरकिनार कर रहे हैं और सामान्य उपचार ले रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी को दरकिनार नहीं करना चाहिए। इससे पहले सिरसा में इस बीमारी का प्रकोप 5 साल पहले देखा गया था। गावों में बैठे लोग आज भी इस वायरस को बीमारी न समझकर झाड़-फूंक से ही काम चला रहे हैं। संवाद
विज्ञापन
बीमारी लंबी होने से वायरस दिमागी हिस्से पर करता है असर, यह जानलेवा भी हो सकता है
शहर के एक निजी अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ आशीष खुराना ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 15 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें अधिकतर बच्चे ही इस बीमारी से ग्रसित हैं। बच्चों के साथ-साथ महिलाओं में भी इस वायरस का असर देखने को मिल रहा है। डाक्टर ने बताया कि मम्प्स के लक्षणों में गले में सूजन और दर्द के साथ शारीरिक कमजोरी का महसूस होना शामिल है। कान के नीचे और गले के बीच फुंसी के समान बढ़ने वाला बड़ा हिस्सा भी मम्प्स की पहचान हो सकता है। डॉक्टर खुराना ने बताया कि काफी मरीजों में यह बीमारी एक सप्ताह में ही ठीक हो जाती है। कुछ केसों में यह लंबी चलने के बाद खतरनाक रूप भी ले सकती है। इससे यह वायरस दिमागी हिस्से पर जाकर असर करता है और यह जानलेवा भी हो जाती है। संक्रमण के लक्षण 16 से 18 दिनों में दिखने लगते हैं। इस समस्या का सही समय पर परामर्श और उपचार करवाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि प्रभावित मरीजों को नरम आहार देना और डॉक्टरों के निर्देशानुसार उपचार शुरू करना चाहिए।
विज्ञापन
13 से 14 महीने के शिशु का होता है टीकाकरण
बच्चों को जन्म के बाद 13 से 14 महीने की आयु में विभिन्न टीकाकरण दिए जाते हैं। इसमें मम्प्स का टीका भी शामिल होता है। यह टीकाकरण मम्प्स संक्रमण को रोकने में मदद करता है। कई बार अज्ञानतावश लोग मम्प्स का टीकाकरण बच्चों को नहीं करवाते। इसके बाद में बच्चे इसका शिकार होने लगते हैं। खासतौर पर गर्मी के सीजन में इस बीमारी का प्रकोप अधिक रहता है। संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना और सफाई रखना अति आवश्यक है।
नागरिक अस्पताल में मम्प्स बीमारी से ग्रसित मरीज आ रहे हैं। बच्चे इसका अधिक शिकार हो रहे हैं। अस्पताल में 20 से 25 मरीज सामने आ रहे हैं, जिनका उपचार चल रहा है। ऐसे लक्षण पाए जाएं तो बच्चों को तुरंत उपचार के लिए चिकित्सक के पास लेकर जाएं। - डॉ. भारत भूूषण, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल सिरसा।