{"_id":"65b289d43645ac206400ead8","slug":"milk-committees-protest-continues-outside-the-plant-management-recovers-rs-45-crore-from-the-committees-sirsa-news-c-128-1-svns1027-114137-2024-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: दुग्ध समितियों का प्लांट के बाहर धरना जारी, प्रबंधन ने समितियों पर 45 करोड़ की निकाली रिकवरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: दुग्ध समितियों का प्लांट के बाहर धरना जारी, प्रबंधन ने समितियों पर 45 करोड़ की निकाली रिकवरी
विज्ञापन
सिरसा। बेगू रोड पर स्थित वीटा मिल्क प्लांट पर वीरवार को दुग्ध सोसायटी संचालकों ने पैसा जारी नहीं होने को लेकर अपना धरना शुरू कर दिया। सोसायटी पदाधिकारियों ने प्रशासन पर रिकवरी निकालकर दबाव बनाने का आरोप लगाया और साथ ही दो माह से कोई पैसा जारी नहीं करने की बात कहीं।
वहीं वीटा प्रबंधन ने कहा कि उन सोसायटी के पैसे को रोका गया है, जिन्होंने प्लांट के साथ धोखाधड़ी कर करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। इस संबंध में एमडी को पत्र लिखकर सारी जानकारी दे दी गई। साथ ही उन्हें प्लांट में हुए घोटाले की डिटेल रिपोर्ट भी भेजी गई है।
बता दें कि वीटा प्लांट में दो माह से दुग्ध समितियों का भुगतान अटका हुआ है। इसी के रोष स्वरूप वीरवार को दुग्ध समितियों के सदस्यों ने संयुक्त रूप से वीटा प्लांट के आगे धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रहे विनोद कुमार, विकास कुमार, सुरजीत, रोहताश, रविंद्र व कमलेश आदि ने बताया कि दो माह से एक भी पैसा समितियों को नहीं मिला है। जबकि समितियों की ओर से सभी किसानों को पैसा दिया जा चुका है। समितियों को खाते में दस से 20 हजार रुपये बचे हैं। अधिकारी समितियों का पैसा जारी करने के बजाय समितियों की तरफ ही बकाया निकाल रहे हैं।
विज्ञापन
ये कहना है अधिकारियों का
अधिकारियों के अनुसार दूध की गुणवत्ता के अनुसार 4 से 5 रुपये कम समितियों को दिया जाना था। समितियों की ओर से गलत पेमेंट पूर्व में जारी करवाई गई है। ऐसे में 26 के आसपास समितियों का बकाया बनाया गया है। जो कि 45 करोड़ रुपये के आसपास बनता है। इस बारे में बोर्ड सदस्यों और एमडी को जानकारी दे दी गई है। 27 तारीख को बोर्ड की दोबारा से बैठक होगी। जिसमें इसे रखा जाएगा।
समितियों का कहना
समितियों को गलत पैसा जारी किया गया है तो इसके लिए अधिकारी दोषी है। पूर्व अधिकारियों ने जांच करने के उपरांत ही पैसा जारी किया था। प्रशासन को चाहिए कि उन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करें। समितियों का इसमें दोष क्या है।
ये है स्थिति
कुल दुग्ध समितियां - 289 समितियां
वीटा प्लांट ने पूर्व में सरकार से लिया हुआ लोन - 69 करोड़ रुपये
वीटा प्लांट का मौजूदा समय में लोन पास हुआ है - 80 करोड़ रुपये ।
वीटा प्लांट की ओर से समितियों की तरफ निकाली गई रिकवरी - अनुमानित 45 करोड़ रुपये।
वीटा प्लांट को समितियों को देना है - करीबन 21 करोड़ रुपये।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
दुग्ध समितियों को पेमेंट दुग्ध की गुणवत्ता के अनुरूप जारी की जा रही है। सरकारी विभागों में बड़े स्तर पर पेमेंट बकाया है, जो जल्द ही आने की उम्मीद है। समितियों का नियमानुसार जो पैसा बनेगा जारी किया जाएगा। प्लांट के साथ गड़बड़ी करने वाली समितियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। करीबन 45 करोड़ की रिकवरी कई समितियों में निकलती है।
-चरणजीत सिंह, चेयरमैन, वीटा मिल्क प्लांट
विज्ञापन
वहीं वीटा प्रबंधन ने कहा कि उन सोसायटी के पैसे को रोका गया है, जिन्होंने प्लांट के साथ धोखाधड़ी कर करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। इस संबंध में एमडी को पत्र लिखकर सारी जानकारी दे दी गई। साथ ही उन्हें प्लांट में हुए घोटाले की डिटेल रिपोर्ट भी भेजी गई है।
विज्ञापन
बता दें कि वीटा प्लांट में दो माह से दुग्ध समितियों का भुगतान अटका हुआ है। इसी के रोष स्वरूप वीरवार को दुग्ध समितियों के सदस्यों ने संयुक्त रूप से वीटा प्लांट के आगे धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रहे विनोद कुमार, विकास कुमार, सुरजीत, रोहताश, रविंद्र व कमलेश आदि ने बताया कि दो माह से एक भी पैसा समितियों को नहीं मिला है। जबकि समितियों की ओर से सभी किसानों को पैसा दिया जा चुका है। समितियों को खाते में दस से 20 हजार रुपये बचे हैं। अधिकारी समितियों का पैसा जारी करने के बजाय समितियों की तरफ ही बकाया निकाल रहे हैं।
विज्ञापन
ये कहना है अधिकारियों का
अधिकारियों के अनुसार दूध की गुणवत्ता के अनुसार 4 से 5 रुपये कम समितियों को दिया जाना था। समितियों की ओर से गलत पेमेंट पूर्व में जारी करवाई गई है। ऐसे में 26 के आसपास समितियों का बकाया बनाया गया है। जो कि 45 करोड़ रुपये के आसपास बनता है। इस बारे में बोर्ड सदस्यों और एमडी को जानकारी दे दी गई है। 27 तारीख को बोर्ड की दोबारा से बैठक होगी। जिसमें इसे रखा जाएगा।
समितियों का कहना
समितियों को गलत पैसा जारी किया गया है तो इसके लिए अधिकारी दोषी है। पूर्व अधिकारियों ने जांच करने के उपरांत ही पैसा जारी किया था। प्रशासन को चाहिए कि उन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करें। समितियों का इसमें दोष क्या है।
ये है स्थिति
कुल दुग्ध समितियां - 289 समितियां
वीटा प्लांट ने पूर्व में सरकार से लिया हुआ लोन - 69 करोड़ रुपये
वीटा प्लांट का मौजूदा समय में लोन पास हुआ है - 80 करोड़ रुपये ।
वीटा प्लांट की ओर से समितियों की तरफ निकाली गई रिकवरी - अनुमानित 45 करोड़ रुपये।
वीटा प्लांट को समितियों को देना है - करीबन 21 करोड़ रुपये।
दुग्ध समितियों को पेमेंट दुग्ध की गुणवत्ता के अनुरूप जारी की जा रही है। सरकारी विभागों में बड़े स्तर पर पेमेंट बकाया है, जो जल्द ही आने की उम्मीद है। समितियों का नियमानुसार जो पैसा बनेगा जारी किया जाएगा। प्लांट के साथ गड़बड़ी करने वाली समितियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। करीबन 45 करोड़ की रिकवरी कई समितियों में निकलती है।
-चरणजीत सिंह, चेयरमैन, वीटा मिल्क प्लांट