{"_id":"62853161c6c9cf23711eeb44","slug":"mammad-branch-broken-40-acres-of-crop-submerged-sirsa-news-hsr632030417","type":"story","status":"publish","title_hn":"मम्मड़ ब्रांच टूटी, 40 एकड़ फसल जलमग्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मम्मड़ ब्रांच टूटी, 40 एकड़ फसल जलमग्न
विज्ञापन
गांव दौलतपुर खेड़ा के निकट टूटी मम्मड़ ब्रांच का दृश्य। संवाद
- फोटो : Sirsa
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बडागुढ़ा। गांव दौलतपुर खेड़ा के निकट बुधवार को मम्मड़ ब्रांच नहर टूट गई। ब्रांच टूटने से किसानों की करीब 40 एकड़ नरमे की फसल जलमग्न हो गई तो वहीं करीब 60 एकड़ खाली पड़ी भूमि में पानी भर गया।
सूचना के बाद गांव दौलतपुर खेड़ा, सुब्बाखेड़ा व बडागुढ़ा से किसान मौके पर पहुंचे। वहीं विभाग के एसडीओ नरेश कुमार व अभियंता मनोज शर्मा ने मौके पर पहुंचकर गोलेवाला हेड से पानी बंद करवाते हुए नहर के टूटे हिस्से को जेसीबी मशीनों व मजदूरों की सहायता से पाटने का कार्य शुरू करवाया। किसान साहब राम, वीरा सिंह, गुरप्रीत सिंह, दर्शन सिंह, महेंद्र सिंह ने बताया कि 15 दिनों बाद नहरों में पानी आया था। ब्रांच के किनारे में बुधवार अलसुबह कटाव आ गया। इसके चलते न केवल नरमे की फसल नष्ट हो गई बल्कि अन्य किसानों की पानी की बारी भी प्रभावित हो गई। किसानों का आरोप है कि ब्रांच की सफाई न होने के चलते इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। किसानों के मुताबिक माइनर टूटने से उनकी फसलों में पानी घुस गया और ट्यूबवेल व खेतों में बने कमरे भी क्षतिग्रस्त हो गए। अधिकारियों का कहना है कि चूहों के बिल या वृक्षों के तने के कारण ब्रांच टूटी है।
शेखूपुरिया माइनर भी टूटी, 50 एकड़ नरमे की फसल जलमग्न
गांव बप्पां के निकट शेखूपुरिया माइनर भी टूट गई। जिसके चलते करीब 50 एकड़ नरमे की फसल जलमग्न हो गई। किसान यश कक्कड़, हरविंदर कंबोज व वीरा सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 10 बजे शेखूपुरिया माइनर टूट गई। सूचना देने के बाद भी अधिकारी बाद दोपहर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने तीन जेसीबी व ट्रैक्टर-ट्रालियों से टूटे हिस्से को पाटने कार्य शुरू करवाया। जेई नवीन कुमार के मुताबिक माइनर टूटने का कारण चूहों का बिल है। उन्होंने बताया कि करीब 12 फुट का कटाव आया है, टूटे हिस्से को शीघ्र ही दुरुस्त कर दिया गया है।
विज्ञापन
ब्रांच में करीब 70 फुट का कटाव हुआ है। टूटने का कारण चूहों के बिल या वृक्षों के तने हो सकते हैं। टूटे हिस्से को पाटने के लिए 2 जेसीबी एवं मजदूर लगाए गए हैं। करीब 100 एकड़ जगह में पानी भरा है। कटाव अधिक होने के कारण कार्य बुधवार देर रात्रि तक पूरा होगा। - नरेश कुमार, एसडीओ, नहरी एवं सिंचाई विभाग।
विज्ञापन
सूचना के बाद गांव दौलतपुर खेड़ा, सुब्बाखेड़ा व बडागुढ़ा से किसान मौके पर पहुंचे। वहीं विभाग के एसडीओ नरेश कुमार व अभियंता मनोज शर्मा ने मौके पर पहुंचकर गोलेवाला हेड से पानी बंद करवाते हुए नहर के टूटे हिस्से को जेसीबी मशीनों व मजदूरों की सहायता से पाटने का कार्य शुरू करवाया। किसान साहब राम, वीरा सिंह, गुरप्रीत सिंह, दर्शन सिंह, महेंद्र सिंह ने बताया कि 15 दिनों बाद नहरों में पानी आया था। ब्रांच के किनारे में बुधवार अलसुबह कटाव आ गया। इसके चलते न केवल नरमे की फसल नष्ट हो गई बल्कि अन्य किसानों की पानी की बारी भी प्रभावित हो गई। किसानों का आरोप है कि ब्रांच की सफाई न होने के चलते इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। किसानों के मुताबिक माइनर टूटने से उनकी फसलों में पानी घुस गया और ट्यूबवेल व खेतों में बने कमरे भी क्षतिग्रस्त हो गए। अधिकारियों का कहना है कि चूहों के बिल या वृक्षों के तने के कारण ब्रांच टूटी है।
विज्ञापन
शेखूपुरिया माइनर भी टूटी, 50 एकड़ नरमे की फसल जलमग्न
गांव बप्पां के निकट शेखूपुरिया माइनर भी टूट गई। जिसके चलते करीब 50 एकड़ नरमे की फसल जलमग्न हो गई। किसान यश कक्कड़, हरविंदर कंबोज व वीरा सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 10 बजे शेखूपुरिया माइनर टूट गई। सूचना देने के बाद भी अधिकारी बाद दोपहर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने तीन जेसीबी व ट्रैक्टर-ट्रालियों से टूटे हिस्से को पाटने कार्य शुरू करवाया। जेई नवीन कुमार के मुताबिक माइनर टूटने का कारण चूहों का बिल है। उन्होंने बताया कि करीब 12 फुट का कटाव आया है, टूटे हिस्से को शीघ्र ही दुरुस्त कर दिया गया है।
विज्ञापन
ब्रांच में करीब 70 फुट का कटाव हुआ है। टूटने का कारण चूहों के बिल या वृक्षों के तने हो सकते हैं। टूटे हिस्से को पाटने के लिए 2 जेसीबी एवं मजदूर लगाए गए हैं। करीब 100 एकड़ जगह में पानी भरा है। कटाव अधिक होने के कारण कार्य बुधवार देर रात्रि तक पूरा होगा। - नरेश कुमार, एसडीओ, नहरी एवं सिंचाई विभाग।