मच्छरों के खिलाफ जंग में खल रही है स्टाफ की कमी
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जिले के सेम प्रभावित क्षेत्र में मलेरिया का प्रकोप तो शहरी आबादी में डेंगू का प्रकोप बना रहता है। गत वर्ष 201 डेंगू तो मलेरिया के 154 मामले प्रकाश में आए थे। बरसात का दौर शुरू हो चुका है, डेंगू और मलेरिया दस्तक दे चुके हैं। दोनों की आहट पाकर स्वास्थ्य विभाग भी चौकस हो गया है। कही पर फॉगिंग तो कही पर डेल्टा मैथरिन दवा का छिड़काव किया जा रहा है। घर या कार्यालय में मच्छर का लार्वा मिलने पर एक हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। विभाग की ओर से सौ लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। मलेरिया और डेंगू के खिलाफ जंग में कर्मचारियों की कमी आड़े आ रही है।
हरियाणा के अंतिम छोर पर बसा सिरसा जिला राजस्थान और पंजाब की सीमाओं से घिरा हुआ है। भौगोलिक स्थिति मलेरिया फैलाने वाले मच्छर के अनुकूल है। चोपटा, डबवाली और ओढा ब्लॉक में कुछ क्षेत्र सेम प्रभावित है जहां पर मच्छर तेजी से पनपता है और लोग इन रोगों की चपेट में आते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए नाथूसरी चोपटा, डबवाली, माधोसिंघाना और ओढां क्षेत्र को संवेदनशीन क्षेत्र में रखा हुआ है। जहां पर मलेरिया सबसे ज्यादा फैलता है। डेंगू का प्रकोप सिरसा शहर में सबसे ज्यादा रहता है जबकि कुछ मरीज रानियां क्षेत्र भी आए थे।
2015 में था डेंगू का प्रकोप
जिला मलेरिया अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ (वीबीडी) डॉ. दीप गगनेजा के अनुसार वर्ष 2014 में मलेरिया के 603, डेंगू के पांच, वर्ष 2015 में मलेरिया के 154 और डेंगू के 201 वर्ष 2016 में मलेरिया के अब तक 35 और डेंगू के अब तक तीन मरीज सामने आए है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में सिरसा में प्लाजमोडियम फल्सीफेरम (पीएफ) के दो और वर्ष 2015 में भी दो केस सामने आए थे।
कार्ड मैथड से होती है जांच
उन्होंने बताया कि जिले के हर प्राथमिक, सामुदायिक, नागरिक अस्पताल, सब हेल्थ सेंटर पर मलेरिया और डेंगू की जांच की नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध करवाई गई है और उपचार भी पूरी तरह से नि:शुल्क दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 20-30 अच्छी प्राइवेट प्रयोगशालाएं है। जहां पर पहले डेंगू की जांच के नाम पर मनमाने रेट लिये जाते थे पर अब रेट 660 रुपये फिक्स कर दिए गए हैं। डेंगूू की जांच कार्ड मेथड से की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम समय समय पर ऐसी प्रयोगशालाओं पर जाकर जांच करती रहती है, अगर कोई ज्यादा रेट वसूलता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्टाफ कम, मच्छर ज्यादा
दूसरी ओर मलेरिया और डेंगू के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने जंग का ऐलान तो कर दिया है पर उसके पास स्टाफ की कमी है और इसी का फायदा उठाकर दोनों रोग फैलाने वाले मच्छर अपना कुनबा बढ़ा सकते है। जैसे ही इनका कुनबा बढ़ेगा आदमी की परेशानी भी बढ़ जाएगी। मलेरिया विभाग 65 प्रतिशत स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। कुछ स्वयंसेवियों को साथ लेकर जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे है। सहायक मलेरिया अधिकारी के पद रिक्त पड़ें हैं। यही नहीं, दवाओं के छिड़काव व जागरुकता के अभियान की देख-देख करने के लिए 45 फील्ड वर्करों की जगह महज आठ फील्ड वर्कर काम कर रहे हैं। कुछ कर्मचारियों की भर्ती पर आठ टीमों का गठन किया गया है। सुपरवाइजरों की संख्या भी 40 प्रतिशत है।
आठ टीमें कर रहीं काम
डॉ. दीप ने बताया कि इस बार फॉगिंग का जिम्मा नगर पालिका और परिषदों को सौंपा गया है। सिरसा, डबवाली, रानियां और कालंावाली में एक-एक गाड़ी नपा और नप को उपलब्ध करवाई गई है। इन क्षेत्रों में फॉगिंग जारी है। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अतर सिंह ने बताया कि वार्ड वाइज फॉगिंग जारी है। पहले डीडीटी का छिड़काव किया जाता था पर अब डेल्टा मैथरिन दवा का ढाई-ढाई माह के बाद छिड़काव किया जाता है। पहला चरण जारी है और दूसरा ढाई माह बाद शुरू होगा। जिले में आठ टीमें कार्य कर रही है। सिरसा शहर में खैरपुर, चत्तरगढ़टी, मेला ग्राऊंड, जेजे कॉलोनी पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
क्या है मलेरिया
सामान्य रूप में मलेरिया मच्छर मादा एनाफिलीज के काटने से फैलने वाली बीमारी है। मादा एनाफिलीज ही मलेरिया के कारक प्लाजमोडियम वाइवेक्स नामक प्रोटोजोआ का वाहक होती है। मादा एनाफिलीज ही संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में इसका प्रसार करती है। सामान्य तौर पर इस मच्छर के काटने के 14 दिन बाद मलेरिया के लक्षण सामने आते हैं। डेंगू एडीज मच्छर के काटने से होता है।
मलेरिया के लक्षण
सिर दर्द व उल्टी आना।
सर्दी व कंपन के साथ तेज बुखार।
बुखार हर रोज या एक दिन छोड़कर आना।
कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है।
ये उपाय करें
बुखार होने पर खून की जांच करवाएं।
मलेरिया की दवा सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है।
ऐसे कपड़े पहनें, जिनसे बांहें और टांगें ढकी रहें।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें।
नीम-हकीमों के चक्कर में न पड़ें।
ऐसे करें मच्छरों पर नियंत्रण
अनावश्यक जलभराव नहीं होने दें।
सोते समय मच्छरदानी लगाएं।
खुले अंगों पर सरसों या नीम का तेल लगाएं।
सप्ताह से पहले ही कूलर, टैंक व घड़ों का पानी बदलें।
तेज बुखार होने पर क्या करें
डॉ. दीप ने बताया कि डेंगू और मलेरिया में रोगी को तेज बुखार होता है। जब भी तेज बुखार हो मरीज के शरीर पर ठंडे पानी की पट्टी रखनी चाहिए, मरीज को पैरासीटामोल की गोली देकर तुरंत डाक्टर की सलाह पर उपचार शुरू कर देना चाहिए। साथ ही रक्त की जांच जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि ऐसी मरीज को किसी भी हालत में एस्प्रिन की गोली नहीं खानी चाहिए।
क्या है आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेदाचार्य डॉ. राजेंद्र कुमार के अनुसार मरीज को शीतल खानपान, अधिक परिश्रम और तनाव से बचते हुए मिश्री के साथ ठंडा दूध लेना चाहिए। एक छोटी चम्मच गिलोय का चूर्ण आधा गिलास उबाले पानी में मिलाकर बने पेय के साथ दो ग्राम सौंठ का चूर्ण दिन में दो बार, छह से 12 साल के बच्चों को आधी खुराक, छह से कम आयु के बच्चों को चौथाई मात्रा देनी चाहिए। गिलोय के साथ शहद भी मिलाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 10 से 15 तुलसी के पत्ते, 10 से 15 ग्राम धनियां चूर्ण को एक लीटर पानी में दस मिनट तक उबालकर ठंडा करे जिसके तीन में तीन-तीन घंटे बाद सेवन करना चाहिए।