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लंपी स्किन बीमारी : एक दिन में 21 पशुओं की मौत, विभाग ने शुरू किया टीकाकरण
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श्री गोशाला में साफ सफाई व पशुओं के लिए किया गया विशेष प्रबंध।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। जिले में पशुओं में लंपी स्किन बीमारी खतरनाक स्तर पर पहुंचने लगी है। 24 घंटे के दौरान संक्रमण की चपेट में आने से 21 पशुओं की मौत हो गई। वहीं संक्रमण को और फैलने से रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। टीकाकरण के लिए विभाग ने 228 टीमों का गठन कर दिया है। पहले दिन विभाग ने 363 पशुओं का टीकाकरण किया गया।
जिले में लंपी स्किन बीमारी से ग्रसित पशुओं का आंकड़ा 4727 तक पहुंच चुका है। इनमें गायों के अलावा 30 भैंस भी शामिल हैं। पशुओं के संक्रमित होने से दूध उत्पादन पर विपरीत असर पड़ रहा है। वहीं विभाग के पास 21 हजार 100 वैक्सीन का स्टॉक आ गया है। अधिकारियों ने पशुपालकों से अपील की है कि लक्षण नजर आने पर विभाग के डॉक्टर के पास जाएं और झोलाछाप से इलाज करवाने से बचें। वहीं जिले में अब तक संक्रमण से 105 पशुओं की मौत हो चुकी है। इनमें पिछले 24 घंटे में 21 पशुओं की मौत हुई जबकि एक दिन पहले 17 पशुओं की मौत हुई थी। जहां एक ओर विभाग ने शुक्रवार को पहले दिन 363 पशुओं का टीकाकरण किया। वहीं निजी तौर पर पशुपालकों ने 936 पशुओं का टीकाकरण करवाया। पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं में लंपी बीमारी से बचाव और इलाज के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। बताया जा रहा है कि विभाग ने 80 हजार दवाओं का स्टॉक मांगा था। इसमें से करीब 26 हजार दवाएं आ चुकी हैं। इसके अलावा 21 हजार 100 वैक्सीन का स्टॉक भी जिले को मिल चुका है। अब पशुओं के वैक्सीनेशन पर जोर दिया जा रहा है।
प्रत्येक गांव में चलाया अभियान, 228 टीमें गठित
पशुपालन विभाग के गांवों में पशु चिकित्सालय हैं। यहां विभाग के डॉक्टर और अन्य कर्मचारी तैनात हैं। लंपी वायरस को देखते हुए विभागीय अधिकारियों ने 228 टीमों का गठन टीकाकरण के लिए कर दिया है। इनमें 168 वीएलडीए पर आधारित टीमें हैं। जबकि 60 पशु चिकित्सकों के नेतृत्व में टीमों का गठन कर फील्ड में उतारा गया है। हालांकि विभाग के पास एक मोबाइल यूनिट भी है लेकिन गाड़ी का चालक न होने के कारण उसे संचालित नहीं किया जा रहा है।
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दूध उत्पादन घटा, डॉक्टर बोले- घबराएं नहीं
गाय और भैंसों में लंपी संक्रमण आने से वे बीमार हो रहे हैं। पशु बीमार होने से लाजिमी है कि वह दूध कम देगा। हालांकि अभी तक दूध की किल्लत नहीं हुई है लेकिन यदि जल्द ही इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो स्थिति खराब हो सकती है।
एक दिन में मौत
पशु-21
एक दिन में नए संक्रमित
पशु-285
एक दिन में स्वस्थ
पशु -161
जानिये... क्या है लंपी स्किन बीमारी
पशुपालन विभाग के डॉक्टर विद्यासागर बांसल के अनुसार लंपी स्किन बीमारी एक वायरल बीमारी है। यह कैपरी पॉक्स वायरस द्वारा होती है। यह मक्खियों व मच्छरों के काटने से फैलती है। इस बीमारी में शुरू में दो-तीन दिन तक बुखार आता है तथा बाद में शरीर में सारी चमड़ी के ऊपर 2 से 5 सेंटीमीटर तक की गांठें बन जाती हैं। यह गांठे गोल व उभरी हुई होती है। गांठे कभी-कभी मुंह में तथा श्वासनली में भी हो जाती है। इस बीमारी में पशु कमजोर व लिम्फनोडज बड़ी हो जाती है तथा पैरों पर सूजन आ जाती है। साथ ही दूध उत्पादकता कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि कभी-कभी पशुओं में गर्भपात भी हो जाता है। अमूमन पशु 2 से 3 सप्ताह के अंदर ठीक हो जाता है। इस रोग के फैलने की दर 10 से 20% है तथा इस रोग में मृत्यु दर लगभग 1 से 5% तक है।
पशुपालक ये रखें सावधानी
1. इस बीमारी से ग्रस्त पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए।
2. जिस पशु के शरीर पर इस तरह की गांठें हो उस पशु को बाड़े में अंदर नहीं रखना चाहिए।
3. मक्खियों, मच्छरों व चिचड़ियों को नियंत्रित करने के लिए उचित दवा का छिड़काव करना चाहिए।
4. पशु मेला व पशु मंडियों के आयोजन को बंद कर देना चाहिए ताकि पशुओं के आवागमन पर रोक लग सके।
5. पशुबाड़ों में सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा पशुओं के नीचे जहां तक संभव हो सके, फर्श सूखा रखना चाहिए।
6. पशुशाला/पशुबाड़ों की सफाई के लिए क्लोरोफॉर्म, फार्मेलिन, फिनॉल व सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसे रासायनों का प्रयोग करना चाहिए
ये कर सकते हैं घरेलू उपचार
डॉक्टरों का कहना है कि वायरल जनित बीमारी होने के कारण इसका कोई विशेष उपचार नहीं है। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखा जाता है तथा लक्षण अनुसार पशु का इलाज किया जाता है। अगर पशु को बुखार है तो बुखार की दवाई ,अगर पशु के दर्द है तो दर्द की दवाई तथा सोजिश है तो सोजिश की दवाई दी जाती है। चमड़ी के ऊपर गांठों पर एंटीसेप्टिक दवाई का लेप लगाना चाहिए। तरल व नरम भोजन खिलाना चाहिए तथा हरे चारे की मात्रा प्रचुर मात्रा में होनी चाहिए।
लंपी स्किन बीमारी के नियंत्रण को लेकर योजना तैयार की गई है। करीब 228 टीमों को फील्ड में उतारा गया है। टीकाकरण किया जा रहा है। अवकाश के बावजूद नियमित रूप से सभी कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं। वैक्सीनेशन के लिए स्टॉक मिल गया और टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है। अभियान में और तेजी लाएंगे।
-डॉ. विद्यासागर बांसल, उप निदेशक पशुपालन विभाग।
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जिले में लंपी स्किन बीमारी से ग्रसित पशुओं का आंकड़ा 4727 तक पहुंच चुका है। इनमें गायों के अलावा 30 भैंस भी शामिल हैं। पशुओं के संक्रमित होने से दूध उत्पादन पर विपरीत असर पड़ रहा है। वहीं विभाग के पास 21 हजार 100 वैक्सीन का स्टॉक आ गया है। अधिकारियों ने पशुपालकों से अपील की है कि लक्षण नजर आने पर विभाग के डॉक्टर के पास जाएं और झोलाछाप से इलाज करवाने से बचें। वहीं जिले में अब तक संक्रमण से 105 पशुओं की मौत हो चुकी है। इनमें पिछले 24 घंटे में 21 पशुओं की मौत हुई जबकि एक दिन पहले 17 पशुओं की मौत हुई थी। जहां एक ओर विभाग ने शुक्रवार को पहले दिन 363 पशुओं का टीकाकरण किया। वहीं निजी तौर पर पशुपालकों ने 936 पशुओं का टीकाकरण करवाया। पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं में लंपी बीमारी से बचाव और इलाज के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। बताया जा रहा है कि विभाग ने 80 हजार दवाओं का स्टॉक मांगा था। इसमें से करीब 26 हजार दवाएं आ चुकी हैं। इसके अलावा 21 हजार 100 वैक्सीन का स्टॉक भी जिले को मिल चुका है। अब पशुओं के वैक्सीनेशन पर जोर दिया जा रहा है।
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प्रत्येक गांव में चलाया अभियान, 228 टीमें गठित
पशुपालन विभाग के गांवों में पशु चिकित्सालय हैं। यहां विभाग के डॉक्टर और अन्य कर्मचारी तैनात हैं। लंपी वायरस को देखते हुए विभागीय अधिकारियों ने 228 टीमों का गठन टीकाकरण के लिए कर दिया है। इनमें 168 वीएलडीए पर आधारित टीमें हैं। जबकि 60 पशु चिकित्सकों के नेतृत्व में टीमों का गठन कर फील्ड में उतारा गया है। हालांकि विभाग के पास एक मोबाइल यूनिट भी है लेकिन गाड़ी का चालक न होने के कारण उसे संचालित नहीं किया जा रहा है।
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दूध उत्पादन घटा, डॉक्टर बोले- घबराएं नहीं
गाय और भैंसों में लंपी संक्रमण आने से वे बीमार हो रहे हैं। पशु बीमार होने से लाजिमी है कि वह दूध कम देगा। हालांकि अभी तक दूध की किल्लत नहीं हुई है लेकिन यदि जल्द ही इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो स्थिति खराब हो सकती है।
एक दिन में मौत
पशु-21
एक दिन में नए संक्रमित
पशु-285
एक दिन में स्वस्थ
पशु -161
जानिये... क्या है लंपी स्किन बीमारी
पशुपालन विभाग के डॉक्टर विद्यासागर बांसल के अनुसार लंपी स्किन बीमारी एक वायरल बीमारी है। यह कैपरी पॉक्स वायरस द्वारा होती है। यह मक्खियों व मच्छरों के काटने से फैलती है। इस बीमारी में शुरू में दो-तीन दिन तक बुखार आता है तथा बाद में शरीर में सारी चमड़ी के ऊपर 2 से 5 सेंटीमीटर तक की गांठें बन जाती हैं। यह गांठे गोल व उभरी हुई होती है। गांठे कभी-कभी मुंह में तथा श्वासनली में भी हो जाती है। इस बीमारी में पशु कमजोर व लिम्फनोडज बड़ी हो जाती है तथा पैरों पर सूजन आ जाती है। साथ ही दूध उत्पादकता कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि कभी-कभी पशुओं में गर्भपात भी हो जाता है। अमूमन पशु 2 से 3 सप्ताह के अंदर ठीक हो जाता है। इस रोग के फैलने की दर 10 से 20% है तथा इस रोग में मृत्यु दर लगभग 1 से 5% तक है।
पशुपालक ये रखें सावधानी
1. इस बीमारी से ग्रस्त पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए।
2. जिस पशु के शरीर पर इस तरह की गांठें हो उस पशु को बाड़े में अंदर नहीं रखना चाहिए।
3. मक्खियों, मच्छरों व चिचड़ियों को नियंत्रित करने के लिए उचित दवा का छिड़काव करना चाहिए।
4. पशु मेला व पशु मंडियों के आयोजन को बंद कर देना चाहिए ताकि पशुओं के आवागमन पर रोक लग सके।
5. पशुबाड़ों में सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा पशुओं के नीचे जहां तक संभव हो सके, फर्श सूखा रखना चाहिए।
6. पशुशाला/पशुबाड़ों की सफाई के लिए क्लोरोफॉर्म, फार्मेलिन, फिनॉल व सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसे रासायनों का प्रयोग करना चाहिए
ये कर सकते हैं घरेलू उपचार
डॉक्टरों का कहना है कि वायरल जनित बीमारी होने के कारण इसका कोई विशेष उपचार नहीं है। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखा जाता है तथा लक्षण अनुसार पशु का इलाज किया जाता है। अगर पशु को बुखार है तो बुखार की दवाई ,अगर पशु के दर्द है तो दर्द की दवाई तथा सोजिश है तो सोजिश की दवाई दी जाती है। चमड़ी के ऊपर गांठों पर एंटीसेप्टिक दवाई का लेप लगाना चाहिए। तरल व नरम भोजन खिलाना चाहिए तथा हरे चारे की मात्रा प्रचुर मात्रा में होनी चाहिए।
लंपी स्किन बीमारी के नियंत्रण को लेकर योजना तैयार की गई है। करीब 228 टीमों को फील्ड में उतारा गया है। टीकाकरण किया जा रहा है। अवकाश के बावजूद नियमित रूप से सभी कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं। वैक्सीनेशन के लिए स्टॉक मिल गया और टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है। अभियान में और तेजी लाएंगे।
-डॉ. विद्यासागर बांसल, उप निदेशक पशुपालन विभाग।