{"_id":"63011fe3cb823859081be9b4","slug":"lumpy-s-fear-destitute-animals-are-no-longer-getting-shelter-in-nandishalas-sirsa-news-hsr639691784","type":"story","status":"publish","title_hn":"लंपी का डर : नंदीशालाओं में बेसहारा पशुओं को अब नहीं मिल रही है शरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लंपी का डर : नंदीशालाओं में बेसहारा पशुओं को अब नहीं मिल रही है शरण
विज्ञापन
केलनियां स्थित नंदीशाला में नजर आती साफ सफाई व विचरण करते पशु। संवाद
- फोटो : Sirsa
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। लंपी बीमारी के प्रकोप बढ़ने के कारण गोशाला व नंदीशाला संचालकों ने शहर के बेसहारा पशुओं को अब लेने से इन्कार कर दिया है। नतीजन बेसहारा पशु शहर की सड़कों पर घूम रहे हैं, जो हादसों की वजह बनते जा रहे हैं। सरकार की ओर से वैक्सीन वितरण व्यवस्था सुचारु नहीं होने से लंपी के मामले काफी बढ़ चुके हैं।
जिले में दो सप्ताह पहले लंपी के मामले सामने आने लगे थे। अब तक जिले में करीब 5000 पशु इस रोग से पीड़ित हो चुके हैं। विभाग के पास तीन दिन पहले ही वैैक्सीन पहुंची है। इससे पूर्व जिले की कई गोशालाओं में प्रबंधकों द्वारा निजी तौर पर वैक्सीनेशन किया जा चुका है। शहर में चार प्रमुख गोशाला व नंदीशाला है, जिनमें करीब 3500 की संख्या में पशु हैं, जो कि स्वस्थ हैं। यहां के प्रबंधकों द्वारा एक सप्ताह पहले ही निजी तौर पर पशुओं में वैक्सीन लगवाई जा चुकी है। इसके साथ-साथ गोशालाओं व नंदीशालाओं में सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। वहीं, नंदीशाला व गोशाला संचालकों का कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें किसी तरह का भी सहयोग नहीं दिया गया है।
उबाल कर खूब पीएं दूध, नहीं करेगा नुकसान
शहर की नंदीशाला व गोशाला में हो रहे दूध उत्पादन तथा खरीद पर कोई असर नहीं पड़ा है। श्री गोशाला में करीब 21 क्विंटल दूध प्रति दिन उत्पादन हो रहा है तो वहीं रामनगरिया नंदी गोशाला में दो क्विंटल तथा केलनियां स्थित नंदीशाला में एक क्विंटल दूध का उत्पादन हो रहा है, जो कि हमेशा की तरह लोगों द्वारा खरीदा जा रहा है। लंपी से संक्रमित पशु के दूध का इंसानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस बात की पुष्टि पशुपालन विभाग के डॉ. विद्यासागर बांसल भी कर चुके हैं। दूध को उबालने के बाद इसमें मौजूद जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। वैसे भी सामान्य तौर पर भी दूध को उबालकर ही उपयोग में लाया जाता है।
विज्ञापन
नंदीशाला में रखा जाता है बेसहारा पशुओं को
केलनियां स्थित बनाई गई नंदीशाला में गाय कम व नंदी की तादाद अधिक है। यहां शहर में घूम रहे बेसहारा पशुओं को रखा जाता है। यहां पर करीब 575 पशु हैं, जिनके लिए 6 बड़े शेड है। बाहर खुले में अलग-अलग बाड़े बनाए गए हैं। पशुओं के लिए बाड़ों के बीच में पानी की होदी बनी हुई है। साफ सफाई व देखरेख के लिए 23 कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। सुबह की शुरुआत पशुओं को चारा से होती है। इसके पश्चात सफाई की जाती है। श्री गोशाला में भी सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है और यहां 2300 पशुओं के लिए करीब 100 कर्मचारी लगाए गए हैं। वहीं, रामनगरिया नंदीगोशाला में 393 पशुओं के लिए 10 कर्मचारी देखरेख के लिए नियुक्त किए गए हैं। इसी प्रकार श्याम गोरक्षा दल में भी 342 पशुओं के लिए आठ कर्मचारी लगाए गए हैं।
श्री श्याम गोरक्षा दल में आठ पशु लंपी से संक्रमित
शहर की श्रीश्याम गोरक्षा दल में कुल 342 पशु हैं। इनमें से 8 पशु लंपी से संक्रमित है। ये संक्रमित पशु गोरक्षा दल में हाल ही में बेसहारा पशु लाए गए हैं, जिन्हें संस्था के बाड़े से काफी दूर ग्रीन बेल्ट में रखे गए हैं। संस्था के द्वारा इनका इलाज चल रहा है। उपचार के बाद इनकी सेहत में भी सुधार आया है।
गोशालाओं में नहीं पहुंची सरकार की तरफ से मदद
स्थिति को देखते हुए अभी तक सरकार की तरफ से गोशालाओं में मदद नहीं पहुंची है। खासकर शहर की गोशालाओं में तो बिलकुल भी नहीं। यहां बेसहारा पशुओं को अलग से रखने के लिए या फिर वैक्सीन तक की सुविधा नहीं दी गई है, जिसका गोशाला प्रबंधकों को काफी मलाल भी है।
डिंग क्षेत्र के लिए 2000 वैक्सीन पहुंची
लंपी संक्रमण के लिए डिंग मंडी क्षेत्र के लिए 2000 वैक्सीन पहुंच गई है। शनिवार को गांव शेरपुरा गोशाला से वैक्सीनेशन शुरू किया गया है। यहां की श्री कृष्ण गोशाला में कुल 700 पशु हैं, जिनमें से लगभग 400 पशुओं को वैक्सीन दी गई। रविवार को डिंग गोशाला में वैक्सीनेशन किया जाएगा।
नंदीशाला में तमाम पशुओं के वैक्सीनेशन कर दिया गया है। इसके लिए निजी तौर पर वैक्सीन मंगवाई थी। विभाग से हमें अभी तक टीकाकरण व दवा से संबंधित सहायता नहीं मिली है। सुरक्षा की दृष्टि से नए पशुओं को नंदीशाला में नहीं लिया जा रहा है। प्रशासन के दिशा निर्देश अनुसार पशुओं के पास साफ सफाई व दवा आदि का छिड़काव समय पर किया जा रहा है। - सुधीर ललीत, उपप्रधान, नंदीशाला केलनियां।
विज्ञापन
सिरसा। लंपी बीमारी के प्रकोप बढ़ने के कारण गोशाला व नंदीशाला संचालकों ने शहर के बेसहारा पशुओं को अब लेने से इन्कार कर दिया है। नतीजन बेसहारा पशु शहर की सड़कों पर घूम रहे हैं, जो हादसों की वजह बनते जा रहे हैं। सरकार की ओर से वैक्सीन वितरण व्यवस्था सुचारु नहीं होने से लंपी के मामले काफी बढ़ चुके हैं।
जिले में दो सप्ताह पहले लंपी के मामले सामने आने लगे थे। अब तक जिले में करीब 5000 पशु इस रोग से पीड़ित हो चुके हैं। विभाग के पास तीन दिन पहले ही वैैक्सीन पहुंची है। इससे पूर्व जिले की कई गोशालाओं में प्रबंधकों द्वारा निजी तौर पर वैक्सीनेशन किया जा चुका है। शहर में चार प्रमुख गोशाला व नंदीशाला है, जिनमें करीब 3500 की संख्या में पशु हैं, जो कि स्वस्थ हैं। यहां के प्रबंधकों द्वारा एक सप्ताह पहले ही निजी तौर पर पशुओं में वैक्सीन लगवाई जा चुकी है। इसके साथ-साथ गोशालाओं व नंदीशालाओं में सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। वहीं, नंदीशाला व गोशाला संचालकों का कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें किसी तरह का भी सहयोग नहीं दिया गया है।
विज्ञापन
उबाल कर खूब पीएं दूध, नहीं करेगा नुकसान
शहर की नंदीशाला व गोशाला में हो रहे दूध उत्पादन तथा खरीद पर कोई असर नहीं पड़ा है। श्री गोशाला में करीब 21 क्विंटल दूध प्रति दिन उत्पादन हो रहा है तो वहीं रामनगरिया नंदी गोशाला में दो क्विंटल तथा केलनियां स्थित नंदीशाला में एक क्विंटल दूध का उत्पादन हो रहा है, जो कि हमेशा की तरह लोगों द्वारा खरीदा जा रहा है। लंपी से संक्रमित पशु के दूध का इंसानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस बात की पुष्टि पशुपालन विभाग के डॉ. विद्यासागर बांसल भी कर चुके हैं। दूध को उबालने के बाद इसमें मौजूद जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। वैसे भी सामान्य तौर पर भी दूध को उबालकर ही उपयोग में लाया जाता है।
विज्ञापन
नंदीशाला में रखा जाता है बेसहारा पशुओं को
केलनियां स्थित बनाई गई नंदीशाला में गाय कम व नंदी की तादाद अधिक है। यहां शहर में घूम रहे बेसहारा पशुओं को रखा जाता है। यहां पर करीब 575 पशु हैं, जिनके लिए 6 बड़े शेड है। बाहर खुले में अलग-अलग बाड़े बनाए गए हैं। पशुओं के लिए बाड़ों के बीच में पानी की होदी बनी हुई है। साफ सफाई व देखरेख के लिए 23 कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। सुबह की शुरुआत पशुओं को चारा से होती है। इसके पश्चात सफाई की जाती है। श्री गोशाला में भी सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है और यहां 2300 पशुओं के लिए करीब 100 कर्मचारी लगाए गए हैं। वहीं, रामनगरिया नंदीगोशाला में 393 पशुओं के लिए 10 कर्मचारी देखरेख के लिए नियुक्त किए गए हैं। इसी प्रकार श्याम गोरक्षा दल में भी 342 पशुओं के लिए आठ कर्मचारी लगाए गए हैं।
श्री श्याम गोरक्षा दल में आठ पशु लंपी से संक्रमित
शहर की श्रीश्याम गोरक्षा दल में कुल 342 पशु हैं। इनमें से 8 पशु लंपी से संक्रमित है। ये संक्रमित पशु गोरक्षा दल में हाल ही में बेसहारा पशु लाए गए हैं, जिन्हें संस्था के बाड़े से काफी दूर ग्रीन बेल्ट में रखे गए हैं। संस्था के द्वारा इनका इलाज चल रहा है। उपचार के बाद इनकी सेहत में भी सुधार आया है।
गोशालाओं में नहीं पहुंची सरकार की तरफ से मदद
स्थिति को देखते हुए अभी तक सरकार की तरफ से गोशालाओं में मदद नहीं पहुंची है। खासकर शहर की गोशालाओं में तो बिलकुल भी नहीं। यहां बेसहारा पशुओं को अलग से रखने के लिए या फिर वैक्सीन तक की सुविधा नहीं दी गई है, जिसका गोशाला प्रबंधकों को काफी मलाल भी है।
डिंग क्षेत्र के लिए 2000 वैक्सीन पहुंची
लंपी संक्रमण के लिए डिंग मंडी क्षेत्र के लिए 2000 वैक्सीन पहुंच गई है। शनिवार को गांव शेरपुरा गोशाला से वैक्सीनेशन शुरू किया गया है। यहां की श्री कृष्ण गोशाला में कुल 700 पशु हैं, जिनमें से लगभग 400 पशुओं को वैक्सीन दी गई। रविवार को डिंग गोशाला में वैक्सीनेशन किया जाएगा।
नंदीशाला में तमाम पशुओं के वैक्सीनेशन कर दिया गया है। इसके लिए निजी तौर पर वैक्सीन मंगवाई थी। विभाग से हमें अभी तक टीकाकरण व दवा से संबंधित सहायता नहीं मिली है। सुरक्षा की दृष्टि से नए पशुओं को नंदीशाला में नहीं लिया जा रहा है। प्रशासन के दिशा निर्देश अनुसार पशुओं के पास साफ सफाई व दवा आदि का छिड़काव समय पर किया जा रहा है। - सुधीर ललीत, उपप्रधान, नंदीशाला केलनियां।

रामनगरिया स्थित नंदी गोशाला में विचरण करते पशु। संवाद- फोटो : Sirsa