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कमेटी को नहीं मिल रही जमीन, दोबारा श्मशान के पास प्राथमिक पाठशाला बनाने का प्रस्ताव भेजा
ब्यूरो / अमर उजाला , सिरसा
Updated Wed, 27 Jul 2016 12:47 AM IST
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बस्तड़ी
- फोटो : अमर उजाला
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सीएम की घोषणा को सिरे चढ़ाने के लिए नगर परिषद ने दलित बस्ती के बच्चों के लिए श्मशान भूमि के साथ पाठशाला बनाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि उस जमीन पर नगर परिषद शहर की गंदगी डालती है। एक दफा जिला कमेटी प्रस्ताव पर आपत्ति जाहिर कर चुकी है। इसके बावजूद दूसरी बार नगर परिषद ने यह प्रस्ताव रखा है।
बता दें कि साल 2013 में महक हत्याकांड के बाद कबीर बस्ती के लोगों ने वहां प्राथमिक पाठशाला बनाने की मांग उठाई थी। दो साल से चली आ रही मांग पर 2015 में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने पांच करोड़ रुपये की मंजूरी देते हुए मुहर लगा दी। सीएम की घोषणा को एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी विभाग और प्रशासन पाठशाला के जमीन तक नहीं ढूंढ सका है।
जगह के चुनाव के लिए बनी थी कमेटी
जगह का चुनाव करने के लिए खंड स्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन हुआ। कमेटी में तहसीलदार, बीईईओ तथा नगर परिषद सचिव शामिल थे। दिसंबर 2015 में कमेटी ने प्रस्ताव पारित किया कि श्मशान भूमि के साथ जगह स्कूल बनाने के लिए उचित है। पांच जनवरी 2016 को डीईईओ ने जगह को बच्चों के लिए श्मशान से लगते हुए जगह सेफ करार न देते हुए उपायुक्त को रिपोर्ट प्रेषित कर दी।
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सर्वे के बाद भी नहीं हो पाया अमल
कुछ समय पूर्व सीएम घोषणा को सिरे चढ़ाने पर काम दोबारा शुरू हुआ। कबीर बस्ती में सर्वे करवाकर देखा गया कि ऐसे कितने बच्चे हैं जो पढ़ने के लिए बाहर जाते हैं। सर्वे में सामने आया कि पहली से पांचवीं कक्षा के 138 बच्चे चलकर दो से ढाई किलोमीटर दूर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंबर एक तथा तीन में पहुंचते हैं। कक्षावार सर्वे भी हुआ। जिसमें प्राथमिक पाठशालाओं ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बावजूद बच्चों के भविष्य के साथ न्याय नहीं हुआ।
दूसरी बार कमेटी पाठशाला बनाने के लिए रखेगी जमीन का प्रस्ताव
पिछले दिनों संत कबीर जयंती के उपलक्ष्य में डबवाली में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने आई भाजपा नेत्री सुनीता दुग्गल को दलितों ने सीएम घोषणा की याद दिलाते हुए लघु सचिवालय के पीछे स्थित जमीन पाठशाला को देने की मांग की। दलितों की मांग जैसे ही सरकार के पास पहुंची तो एकाएक पुन: जमीन की तलाश शुरू हुई। एसडीएम डबवाली ने पुन: तीन सदस्यीय कमेटी से रिपोर्ट मांगी। 25 जुलाई 2016 को नगर परिषद ने श्मशान के साथ स्कूल बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह दूसरा मौका होगा, जब प्रस्ताव को मंजूरी के लिए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी की मार्फत उपायुक्त के पास भेजा जाएगा।
कबीर बस्ती के बच्चे, जो पढ़ने जाते हैं। कक्षा वाईज स्थिति।
कक्षा बच्चे
1 18
2 33
3 30
4 26
5 31
कुल 138
बस्ती के लोगों ने कहा, हमारे साथ हो रहा भेदभाव
दलित नेता अमरनाथ बागड़ी, विजय खनगवाल के अनुसार सरकार जानबूझकर दलितों के साथ भेदभाव कर रही है। जगह की तलाश में मामला लटकाया जा रहा है। लघु सचिवालय के पीछे हुड्डा की जमीन पड़ी है। हम मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार गंभीर नहीं।
पाठशाला बनाने के लिए चार कनाल जमीन चाहिए। नगर परिषद ने श्मशान भूमि के साथ पाठशाला बनाने का प्रस्ताव रखा है। चूंकि इसके अलावा नगर परिषद के पास कोई जमीन नहीं है। मुझे नहीं लगता प्रस्ताव सिरे चढ़ेगा। चूंकि पाठशाला के यह लोकेशन गलत है। डीईईओ करीब सात माह पहले भी इस प्रस्ताव पर असहमति जता चुके हैं। कबीर बस्ती निवासियों ने कोई जगह सुझाई है, इसके बारे में मुझे मालूम नहीं।
बलजिंद्र सिंह भंगू, बीईओ, डबवाली
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बता दें कि साल 2013 में महक हत्याकांड के बाद कबीर बस्ती के लोगों ने वहां प्राथमिक पाठशाला बनाने की मांग उठाई थी। दो साल से चली आ रही मांग पर 2015 में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने पांच करोड़ रुपये की मंजूरी देते हुए मुहर लगा दी। सीएम की घोषणा को एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी विभाग और प्रशासन पाठशाला के जमीन तक नहीं ढूंढ सका है।
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जगह के चुनाव के लिए बनी थी कमेटी
जगह का चुनाव करने के लिए खंड स्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन हुआ। कमेटी में तहसीलदार, बीईईओ तथा नगर परिषद सचिव शामिल थे। दिसंबर 2015 में कमेटी ने प्रस्ताव पारित किया कि श्मशान भूमि के साथ जगह स्कूल बनाने के लिए उचित है। पांच जनवरी 2016 को डीईईओ ने जगह को बच्चों के लिए श्मशान से लगते हुए जगह सेफ करार न देते हुए उपायुक्त को रिपोर्ट प्रेषित कर दी।
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सर्वे के बाद भी नहीं हो पाया अमल
कुछ समय पूर्व सीएम घोषणा को सिरे चढ़ाने पर काम दोबारा शुरू हुआ। कबीर बस्ती में सर्वे करवाकर देखा गया कि ऐसे कितने बच्चे हैं जो पढ़ने के लिए बाहर जाते हैं। सर्वे में सामने आया कि पहली से पांचवीं कक्षा के 138 बच्चे चलकर दो से ढाई किलोमीटर दूर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंबर एक तथा तीन में पहुंचते हैं। कक्षावार सर्वे भी हुआ। जिसमें प्राथमिक पाठशालाओं ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बावजूद बच्चों के भविष्य के साथ न्याय नहीं हुआ।
दूसरी बार कमेटी पाठशाला बनाने के लिए रखेगी जमीन का प्रस्ताव
पिछले दिनों संत कबीर जयंती के उपलक्ष्य में डबवाली में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने आई भाजपा नेत्री सुनीता दुग्गल को दलितों ने सीएम घोषणा की याद दिलाते हुए लघु सचिवालय के पीछे स्थित जमीन पाठशाला को देने की मांग की। दलितों की मांग जैसे ही सरकार के पास पहुंची तो एकाएक पुन: जमीन की तलाश शुरू हुई। एसडीएम डबवाली ने पुन: तीन सदस्यीय कमेटी से रिपोर्ट मांगी। 25 जुलाई 2016 को नगर परिषद ने श्मशान के साथ स्कूल बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह दूसरा मौका होगा, जब प्रस्ताव को मंजूरी के लिए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी की मार्फत उपायुक्त के पास भेजा जाएगा।
कबीर बस्ती के बच्चे, जो पढ़ने जाते हैं। कक्षा वाईज स्थिति।
कक्षा बच्चे
1 18
2 33
3 30
4 26
5 31
कुल 138
बस्ती के लोगों ने कहा, हमारे साथ हो रहा भेदभाव
दलित नेता अमरनाथ बागड़ी, विजय खनगवाल के अनुसार सरकार जानबूझकर दलितों के साथ भेदभाव कर रही है। जगह की तलाश में मामला लटकाया जा रहा है। लघु सचिवालय के पीछे हुड्डा की जमीन पड़ी है। हम मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार गंभीर नहीं।
पाठशाला बनाने के लिए चार कनाल जमीन चाहिए। नगर परिषद ने श्मशान भूमि के साथ पाठशाला बनाने का प्रस्ताव रखा है। चूंकि इसके अलावा नगर परिषद के पास कोई जमीन नहीं है। मुझे नहीं लगता प्रस्ताव सिरे चढ़ेगा। चूंकि पाठशाला के यह लोकेशन गलत है। डीईईओ करीब सात माह पहले भी इस प्रस्ताव पर असहमति जता चुके हैं। कबीर बस्ती निवासियों ने कोई जगह सुझाई है, इसके बारे में मुझे मालूम नहीं।
बलजिंद्र सिंह भंगू, बीईओ, डबवाली