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कला तरंगिणी : सुर, ताल और अभिनय की सजी त्रिवेणी
Fri, 25 Sep 2026 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 25 Sep 2026 11:29 PM IST
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राजकीय नेशनल महाविद्यालय में कला तरंगिणी उत्सव में विद्यार्थी मंच पर प्रस्तुति देते हुए। कॉलेज
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। राजकीय नेशनल महाविद्यालय में तीन दिवसीय प्रतिभा खोज अभियान कला तरंगिणी का अंतिम दिन शुक्रवार को सुर, ताल व अभिनय की शानदार त्रिवेणी से सजा। दो दिनों की प्रतियोगिताओं और छंटनी के बाद विद्यार्थियों ने अंतिम चरण में प्रस्तुतियां दीं।
उन्होंने नृत्य, फिल्मी एवं सुगम गायन तथा नुक्कड़ नाटक जैसी विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। महाविद्यालय की प्राचार्य अनीता सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। सांस्कृतिक गतिविधियों की संयोजिका स्मृति कम्बोज के मार्गदर्शन में यह आयोजन हुआ।
मंच संचालन का दायित्व साक्षी और सरबजीत कौर ने निभाया। निर्णायक मंडल में सरस्वती और करण शामिल थे जिन्होंने प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया। महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रेम कम्बोज समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
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आठ वर्ष पूर्व महाविद्यालय में प्राचार्य रहे प्रेम कम्बोज ने अपने कार्यकाल के संस्मरण साझा किए। उन्होंने पूर्व सहयोगियों और वरिष्ठ प्राध्यापकों के साथ बिताए अकादमिक दिनों को याद किया।
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सिरसा। राजकीय नेशनल महाविद्यालय में तीन दिवसीय प्रतिभा खोज अभियान कला तरंगिणी का अंतिम दिन शुक्रवार को सुर, ताल व अभिनय की शानदार त्रिवेणी से सजा। दो दिनों की प्रतियोगिताओं और छंटनी के बाद विद्यार्थियों ने अंतिम चरण में प्रस्तुतियां दीं।
उन्होंने नृत्य, फिल्मी एवं सुगम गायन तथा नुक्कड़ नाटक जैसी विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। महाविद्यालय की प्राचार्य अनीता सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। सांस्कृतिक गतिविधियों की संयोजिका स्मृति कम्बोज के मार्गदर्शन में यह आयोजन हुआ।
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मंच संचालन का दायित्व साक्षी और सरबजीत कौर ने निभाया। निर्णायक मंडल में सरस्वती और करण शामिल थे जिन्होंने प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया। महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रेम कम्बोज समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
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आठ वर्ष पूर्व महाविद्यालय में प्राचार्य रहे प्रेम कम्बोज ने अपने कार्यकाल के संस्मरण साझा किए। उन्होंने पूर्व सहयोगियों और वरिष्ठ प्राध्यापकों के साथ बिताए अकादमिक दिनों को याद किया।