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स्वर्ग की प्राप्ति करनी है तो यज्ञ करो : सुगन
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सिरसा। प्रभात पैलेस में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान हवन करते हुए समिति सदस्य व अन्य। समित
सिरसा। प्रभात पैलेस में श्री बंशीवट कथा समिति की ओर से शुक्रवार को आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर हवन का आयोजन किया गया। श्री बंशीवट कथा समिति के प्रधान इंद्रकुमार चिड़ावेवाला, उपप्रधान सुनील गोयल, सचिव संजय तायल व अन्य ने हवन में आहुतियां डाली। कथा व्यास पंडित सुगन शर्मा ने कहा कि वेद कहता है कि सर्व सुखों की प्राप्ति करनी है और स्वर्ग की प्राप्ति करनी है तो यज्ञ करो।
यज्ञ सर्व सुखों का स्रोत है। जब यज्ञ कुंड में शुद्ध सामग्री, खांड-बूरा, देसी घी की आहुति दी जाती है तो कुंड से एक दिव्य धुआं पैदा होता है। जो सभी रोगों को दूर करता है। उन्होंने कहा कि बादाम, किशमिश, काजू, अखरोट आदि पौष्टिक पदार्थ के मिश्रण से तैयार हवन सामग्री की आहुति हवन कुंड में डालने से एक विशेष प्रकार की ऊर्जा पैदा होती है, जो शरीर के छिद्रों के अंदर प्रवेश कर शरीर के अंदर छुपे हुए घातक कीटाणुओं का नाश करती है और शरीर सुंदर स्वस्थ हो जाता है।
कथाव्यास ने कहा कि हवन कुंड में वेद मंत्रों के साथ आहुति देने से दूर-दूर तक वातावरण शुद्ध हो जाता है और वायु मंडल में फैले हुए दुर्गुणों, दुर्विचारों, दुर्भाओं को नष्ट कर सदगुणों का संचार करती है। उन्होंने कहा कि यदि देश-विदेशों में बड़े-बड़े यज्ञ किए जाए तो इससे प्रदूषण नष्ट हो जाएगा और यह समस्या सदा के लिए हल हो जाएगी। हवन यज्ञ के उपरांत श्रीमद्भागवत की आरती की गई। बाद में भंडारे का प्रसाद वितरित किया गया।
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यज्ञ सर्व सुखों का स्रोत है। जब यज्ञ कुंड में शुद्ध सामग्री, खांड-बूरा, देसी घी की आहुति दी जाती है तो कुंड से एक दिव्य धुआं पैदा होता है। जो सभी रोगों को दूर करता है। उन्होंने कहा कि बादाम, किशमिश, काजू, अखरोट आदि पौष्टिक पदार्थ के मिश्रण से तैयार हवन सामग्री की आहुति हवन कुंड में डालने से एक विशेष प्रकार की ऊर्जा पैदा होती है, जो शरीर के छिद्रों के अंदर प्रवेश कर शरीर के अंदर छुपे हुए घातक कीटाणुओं का नाश करती है और शरीर सुंदर स्वस्थ हो जाता है।
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कथाव्यास ने कहा कि हवन कुंड में वेद मंत्रों के साथ आहुति देने से दूर-दूर तक वातावरण शुद्ध हो जाता है और वायु मंडल में फैले हुए दुर्गुणों, दुर्विचारों, दुर्भाओं को नष्ट कर सदगुणों का संचार करती है। उन्होंने कहा कि यदि देश-विदेशों में बड़े-बड़े यज्ञ किए जाए तो इससे प्रदूषण नष्ट हो जाएगा और यह समस्या सदा के लिए हल हो जाएगी। हवन यज्ञ के उपरांत श्रीमद्भागवत की आरती की गई। बाद में भंडारे का प्रसाद वितरित किया गया।
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