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भावदीन और खुईयां मलकाना टोल पर जुटे सैकड़ों किसान
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सिरसा के भावदीन टोल प्लाजा पर धरने पर बैठे किसानों को संबोधित करते किसान नेता।
- फोटो : Sirsa
भावदीन टोल प्लाजा को खाली करवाकर पर्ची शुरू करने को लेकर वायरल हुए मैसेज के कारण वीरवार सुबह से किसान भावदीन और खुईयां मलकाना टोल प्लाजा पर पहुंचना शुरू हो गए थे। जब पुलिस की टुकड़ी भावदीन टोल पर पहुंची तो किसानों ने वीडियो वायरल कर अधिक से अधिक किसानों को टोल पर पहुंचने की अपील की। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों किसान टोल प्लाजा पर चल रहे धरनास्थल पर पहुंच गए। वहीं टोल प्लाजा पर शांति बनाए रखने को दिनभर सदर थाना डीएसपी संजय सिंह और डिंग थाना प्रभारी सुखवीर सिंह उपस्थित रहे।
बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में किसान भावदीन और खुईयां मलकाना टोल प्लाजा को बीते 12 दिसंबर से पर्ची मुक्त कर धरना दे रहे हैं, जिसके कारण दोनों टोल प्लाजा को हर रोज 14 लाख का घाटा हो रहा है। हालांकि अब तक टोल प्लाजा को करोड़ों रुपये का घाटा हो चुका है। वहीं दूसरी तरफ किसानों के चल रहे धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता लखविंद्र सिंह औलख, स्वर्ण सिंह विर्क ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने बलपूर्वक तानाशाही करते हुए टोल प्लाजा पर चल रहे धरने को उठाने का प्रयास किया तो किसान उसका मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार हैं। वहीं स्वर्ण सिंह विर्क ने कहा कि किसान मोर्चा के बैनर तले टोल पर्ची मुक्त रहेगा। जब तक सरकार तीनों कानूनों को वापस नहीं लेती, तब तक टोल को पर्ची मुक्त रखा जाएगा। हरियाणा किसान सभा के नेता रोशन सुचान ने कहा कि किसान संघर्ष पहले से और तेज होगा। किसान आंदोलन को बदनाम करने की जो कोशिश दिल्ली में भाजपा सरकार ने की, वह बेनकाब हो चुकी है। किसान नेता डॉ. सुखदेव सिंह जम्मू, रामचंद्र, तिलकराज, हरविंद्र थिंद, गुरप्रीत, ब्रह्मजीत कंग ने कहा कि वे किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेंगे और जिला प्रशासन किसानों के साथ टकराने की कोशिश न करें।
किसान आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास कर रही है सरकार : जोधकां
वहीं किसान नेता रणधीर जोधकां ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर डटे किसानों को बदनाम करने के लिए केंद्र सरकार तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। गणतंत्र दिवस पर किसान परेड को भी सरकार ने बदनाम करने का प्रयास किया है, लेकिन वह किसानों की एकता को तोड़ने में कभी सफल नहीं हो पाएगी।
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किसान 30 जनवरी को शहर में निकालेंगे मौन मार्च
वहीं शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम में चल रहे किसानों के पक्का मोर्चा धरनास्थल पर किसान नेताओं ने पत्रकार वार्ता की। किसान नेता लखविंद्र सिंह लखा, सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान मदन लाल खोथ, मैक्स साहुवाला, गुरप्रीत गिल ने संयुक्त रूप से कहा कि दिल्ली लाल किले में झंडा फहराने वाले किसान नहीं, बल्कि सरकार की तरफ से ही भेजे हुए लोग थे। जिनको पहले ही लालकिले में भेज दिया गया था। सरकार किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। किसान देशद्रोही नहीं हो सकता। किसान व मजदूर का बेटा देश की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात है, इसलिए वे तिरंगे का अपमान नहीं कर सकता। वहीं उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने ट्रैक्टर परेड के दौरान उपद्रव फैलाया, उनका किसान आंदोलन से कुछ भी लेना देना नहीं है। जिन लोगों ने उपद्रव फैलाया है, पुलिस उन्हें जल्द गिरफ्तार करें। उपद्रव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को करते हुए किसानों ने 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर मुंह पर पट्टी बांधकर शहर में मौन मार्च निकालने का एलान भी किया है। इसमें किसान और विभिन्न संगठनों के कर्मचारी भी उपस्थित होंगे। इस मौके पर किसान नेता सुखविंद्र धर्मपुरा, लखविंद्र सिंह औलख, मैक्स, गुरप्रीत, रोडवेज कर्मचारी नेता मदन लाल खोथ, रामकुमार चुरनियां उपस्थित रहे।
छह करोड़ 44 लाख का घाटा झेल चुकी हैं टोल कंपनियां
किसान आंदोलन के चलते बीते 46 दिनों से भावदीन और खुईयां मलकाना टोल पर्ची मुक्त है। ऐसे में अब तक दोनों टोल प्लॉजा कंपनियों को छह करोड़ 44 लाख की चपत लग चुकी है। भावदीन टोल प्लाजा की हर रोज 10 लाख के करीब आय है, जबकि खुईयां मलकाना टोल की आय चार लाख के करीब है। टोल पर्ची मुक्त होने के कारण कंपनियों को प्रतिदिन 14 लाख का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
कोट
टोल प्लाजा पर शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। किसानों से लगातार बातचीत की जा रही है। भावदीन टोल प्लाजा पर पुलिस की एक टुकड़ी तैनात है, ताकि किसी भी तरह की टोल पर घटना न हो सके।
-संजय सिंह, डीएसपी, सदर थाना सिरसा
कोट
टोल को शुरू करने को लेकर किसानों से बातचीत चल रही है। पुलिस भी अलर्ट पर है। किसानों के साथ सहमति के बाद ही टोल पर पर्ची शुरू की जाएगी।
-अजय कुमार, मैनेजर, भावदीन टोल प्लाजा सिरसा।
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बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में किसान भावदीन और खुईयां मलकाना टोल प्लाजा को बीते 12 दिसंबर से पर्ची मुक्त कर धरना दे रहे हैं, जिसके कारण दोनों टोल प्लाजा को हर रोज 14 लाख का घाटा हो रहा है। हालांकि अब तक टोल प्लाजा को करोड़ों रुपये का घाटा हो चुका है। वहीं दूसरी तरफ किसानों के चल रहे धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता लखविंद्र सिंह औलख, स्वर्ण सिंह विर्क ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने बलपूर्वक तानाशाही करते हुए टोल प्लाजा पर चल रहे धरने को उठाने का प्रयास किया तो किसान उसका मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार हैं। वहीं स्वर्ण सिंह विर्क ने कहा कि किसान मोर्चा के बैनर तले टोल पर्ची मुक्त रहेगा। जब तक सरकार तीनों कानूनों को वापस नहीं लेती, तब तक टोल को पर्ची मुक्त रखा जाएगा। हरियाणा किसान सभा के नेता रोशन सुचान ने कहा कि किसान संघर्ष पहले से और तेज होगा। किसान आंदोलन को बदनाम करने की जो कोशिश दिल्ली में भाजपा सरकार ने की, वह बेनकाब हो चुकी है। किसान नेता डॉ. सुखदेव सिंह जम्मू, रामचंद्र, तिलकराज, हरविंद्र थिंद, गुरप्रीत, ब्रह्मजीत कंग ने कहा कि वे किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेंगे और जिला प्रशासन किसानों के साथ टकराने की कोशिश न करें।
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किसान आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास कर रही है सरकार : जोधकां
वहीं किसान नेता रणधीर जोधकां ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर डटे किसानों को बदनाम करने के लिए केंद्र सरकार तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। गणतंत्र दिवस पर किसान परेड को भी सरकार ने बदनाम करने का प्रयास किया है, लेकिन वह किसानों की एकता को तोड़ने में कभी सफल नहीं हो पाएगी।
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किसान 30 जनवरी को शहर में निकालेंगे मौन मार्च
वहीं शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम में चल रहे किसानों के पक्का मोर्चा धरनास्थल पर किसान नेताओं ने पत्रकार वार्ता की। किसान नेता लखविंद्र सिंह लखा, सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान मदन लाल खोथ, मैक्स साहुवाला, गुरप्रीत गिल ने संयुक्त रूप से कहा कि दिल्ली लाल किले में झंडा फहराने वाले किसान नहीं, बल्कि सरकार की तरफ से ही भेजे हुए लोग थे। जिनको पहले ही लालकिले में भेज दिया गया था। सरकार किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। किसान देशद्रोही नहीं हो सकता। किसान व मजदूर का बेटा देश की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात है, इसलिए वे तिरंगे का अपमान नहीं कर सकता। वहीं उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने ट्रैक्टर परेड के दौरान उपद्रव फैलाया, उनका किसान आंदोलन से कुछ भी लेना देना नहीं है। जिन लोगों ने उपद्रव फैलाया है, पुलिस उन्हें जल्द गिरफ्तार करें। उपद्रव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को करते हुए किसानों ने 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर मुंह पर पट्टी बांधकर शहर में मौन मार्च निकालने का एलान भी किया है। इसमें किसान और विभिन्न संगठनों के कर्मचारी भी उपस्थित होंगे। इस मौके पर किसान नेता सुखविंद्र धर्मपुरा, लखविंद्र सिंह औलख, मैक्स, गुरप्रीत, रोडवेज कर्मचारी नेता मदन लाल खोथ, रामकुमार चुरनियां उपस्थित रहे।
छह करोड़ 44 लाख का घाटा झेल चुकी हैं टोल कंपनियां
किसान आंदोलन के चलते बीते 46 दिनों से भावदीन और खुईयां मलकाना टोल पर्ची मुक्त है। ऐसे में अब तक दोनों टोल प्लॉजा कंपनियों को छह करोड़ 44 लाख की चपत लग चुकी है। भावदीन टोल प्लाजा की हर रोज 10 लाख के करीब आय है, जबकि खुईयां मलकाना टोल की आय चार लाख के करीब है। टोल पर्ची मुक्त होने के कारण कंपनियों को प्रतिदिन 14 लाख का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
कोट
टोल प्लाजा पर शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। किसानों से लगातार बातचीत की जा रही है। भावदीन टोल प्लाजा पर पुलिस की एक टुकड़ी तैनात है, ताकि किसी भी तरह की टोल पर घटना न हो सके।
-संजय सिंह, डीएसपी, सदर थाना सिरसा
कोट
टोल को शुरू करने को लेकर किसानों से बातचीत चल रही है। पुलिस भी अलर्ट पर है। किसानों के साथ सहमति के बाद ही टोल पर पर्ची शुरू की जाएगी।
-अजय कुमार, मैनेजर, भावदीन टोल प्लाजा सिरसा।

हिसार रोड स्थित भावदीन टोल प्लाजा पर धरना देकर बैठे किसान।- फोटो : Sirsa