सिरसा: सीडीएलयू के प्रोफेसर के लीयन बर्खास्तगी के फैसले पर हाईकोर्ट का स्टे
सीडीएलयू के फैसले को प्रोफेसर ने दी न्यायालय में चुनौती थी। अब अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
विस्तार
हरियाणा के सिरसा में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू) के फैसले पर उच्च न्यायालय ने स्टे ऑर्डर जारी कर दिया है। साथ ही सीडीएलयू और सरकार को भी कोर्ट ने तलब किया है ताकि दोनों पक्षों की सुनवाई हो सके। सीडीएलयू ने विधि विभाग में कार्यरत एक प्रोफेसर का लीयन (अवकाश) बर्खास्त कर दिया था और कार्यकारी परिषद की बैठक में पास भी करवा लिया। लेकिन अब मामला न्यायालय में है। अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
सीडीएलयू के विधि विभाग के प्रोफेसर रहे डॉ. राजेश मलिक ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इसमें उन्होंने कहा कि सीडीएलयू से लीयन यानी अवकाश लेकर उन्होंने महेंद्रगढ़ स्थित केंद्रीय विद्यालय के विधि विभाग में ज्वाइन किया है। लेकिन अभी वे केवल सशर्त कंफर्म हुए हैं। उन्होंने कहा कि नियम अनुसार लीयन पांच साल तक लिया था सकता है जो 13 अगस्त 2023 तक बनता है।
इतना ही नहीं सीडीएलयू ने 13 अगस्त 2022 तक का लीयन लेने की लिखित अनुमति दे भी रखी है। प्रो. राजेश मलिक ने आरोप लगाया कि सीडीएलयू ने 29 दिसंबर को बिना किसी नोटिस के लीयन बर्खास्त कर दिया है। अब इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने सीडीएलयू के इस फैसले पर स्टे लगा दिया। हाईकोर्ट ने सरकार और सीडीएलयू को नोटिस भी भेजा है। सरकार और सीडीएलयू की ओर से नोटिस स्वीकार भी कर लिया गया है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
सीडीएलयू की कार्यकारी परिषद ले चुकी फैसला, बैठक से पहले भी चेताया था
सीडीएलयू ने 29 दिसंबर 2021 को फैसला लेते हुए प्रो. राजेश मलिक का लीयन बर्खास्त कर दिया। इस पर राजेश मलिक ने आपत्ति जतायी। इसके बाद इस मुद्दे को सीडीएलयू प्रशासन कार्यकारी परिषद में ले गया। 15 फरवरी को हुई बैठक में ले जाने की सूचना प्रो. राजेश मलिक को मिली तो उन्होंने परिषद के सभी सदस्यों को एडवांस लीगल नोटिस भी भेजकर चेताया। इसके बावजूद कार्यकारी परिषद ने लीयन बर्खास्तगी पर मोहर लगा दी।
ये है पूरा मामला
सीडीएलयू के विधि विभाग में प्रो. राजेश मलिक कार्यरत थे। उन्होंने करीब 3 साल पहले महेंद्रगढ़ की सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ज्वाइन कर लिया था और अब वे सीडीएलय से अवकाश लेकर लीयन पर हैं। प्रो. मलिक का लीयन का मंजूरशुदा पीरियड 14 अगस्त 2021 से 13 अगस्त 2022 तक है। बताया जा रहा है कि लेकिन इसी बीच सीडीएलयू ने एक फैसला लेते हुए 29 दिसंबर को प्रो. राजेश मलिक का लीयन बर्खास्त कर दिया।
जानिये... क्या है लीयन
जब एक प्रोफेसर एक विश्वविद्यालय में रहते हुए किसी दूसरे विश्वविद्यालय में जाकर नौकरी ज्वाइन कर ले। लेकिन पहले से चल रही नौकरी से भी त्यागपत्र ना दे। ऐसे में वह प्राध्यापक लीयन ले सकता है। इसका मतलब वह अवकाश पर रहेगा और लीयन के तहत नए विश्वविद्यालय में नौकरी करेगा। इसके लिए दोनों विश्वविद्यालय सहमत होना जरूरी है। एक वर्ष का लीयन होता है, जिसे समय और आवश्यकता अनुसार आगे भी बढ़ाया जा सकता है। नियम कहते हैं कि लीयन को बर्खास्त करने के लिए प्राध्यापक को कम से कम तीन माह का नोटिस दिया जाना भी जरूरी है।
उच्च न्यायलय ने दिया है स्टे ऑर्डर : रमेश मलिक
सीडीएलयू ने प्रो. राजेश मलिक का लीयन बिना किसी पूर्व सूचना और नियमों के खिलाफ बर्खास्त कर दिया था। इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी और याचिका दायर की। 3 मार्च को सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने स्टे ऑर्डर जारी कर दिया है। अब अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी। - रमेश मलिक एडवोकेट, प्रो. राजेश मलिक के वकील।
मुझे जानकारी नहीं है : रजिस्ट्रार
उच्च न्यायालय की ओर से स्टे ऑर्डर लगाए जाने की मुझे जानकारी नहीं है। हो सकता है आदेश की कॉपी अभी तक हमारे कार्यालय में नहीं पहुंची हो। फैसला देखकर ही कुछ बताया जा सकता है। - प्रो. मोनिका वर्मा, रजिस्ट्रार, सीडीएलयू, सिरसा।