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दिवाली से 5 दिन पहले भरे 6 दुकानों से सैंपल, 14 दिन में आएगी रिपोर्ट
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सैंपल लेने के बाद सील लगाते इंस्पेक्टर।
- फोटो : Sirsa
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त्योहारी सीजन को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंगलवार को जिले में छह दुकानों से मिठाइयों के सैंपल भरे। सैंपल दीपावली से पांच दिन पहले भरे गए, जिसकी रिपोर्ट आने की प्रक्रिया 14 दिन की है। ऐसे में दीपावली का त्योहार जाने के बाद उपभोक्ताओं को यह पता चलेगा कि किस दुकान की मिठाई के सैंपल फेल आए है।
फूड इंस्पेक्टर डॉ. महावीर ने मंगलवार को सुबह ही दुकानों पर जाकर चेकिंग शुरू कर दी। जिन दुकानों पर उन्हें मिलावटी मिठाई होने की आशंका थी, उन दुकानों पर टीम ने खाद्य सामग्री के सैंपल भरे। इंस्पेक्टर ने बताया कि उन्होंने सुबह सिरसा की चार दुकानों से सैंपल भरे थे। इसके बाद रानियां क्षेत्र से तीन दुकानों से खाद्य सामग्री के सैंपल लिए हैं।
डॉ. महावीर ने बताया कि ये सैंपल जांच कराने के लिए चंडीगढ़ भेजे जाएंगे। किसी सैंपल में मिलावट मिली तो उस पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना किया जाएगा। वहीं, अगर किसी भी दुकान से खाने पीने का सामान दूषित पाया गया तो उस दुकानदार के खिलाफ जुर्माना अथवा सजा भी हो सकती है।
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अगस्त में भी लिए थे सैंपल
फूड इंस्पेक्टर डा. महावीर की टीम ने बीती 11 अगस्त 2019 को भी शहर से पांच दुकानों की मिठाइयों के सेंपल भरे थे। डॉ. महावीर ने बताया कि जो चार सेंपल बीते दिनों लिए थे उसकी अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। जैसे ही रिपोर्ट आएगी उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फूड इंस्पेक्टर महावीर ने बताया कि सैंपल चंडीगढ़ भेजे जाएंगे। इसकी प्रक्रिया 14 दिन की है। यदि लैब में सैंपल ज्यादा होते हैं तो रिपोर्ट आने में देरी हो सकती है।
पिछले वर्ष 97 दुकानों से भरे थे सैंपल, 21 की रिपोर्ट आई थी फेल
बीते वर्ष 2018 त्योहारी सीजन में फूूड सेफ्टी विभाग ने 97 प्रतिष्ठानों से खोया, पनीर, दूध के सैंपल लिए थे। इसमें से 21 सैंपल की रिपोर्ट फेल आई है। वहीं, वर्ष 2017 में विभाग ने 94 खाद्य सामग्री के सैंपल लिए थे। इसमें तीन सैंपल की रिपोर्ट अनसेफ आई थी। जबकि छह सैंपल स्टेंडर्ड पाए गए थे। पिछले चार वर्षों में 20 केसों में कोर्ट से सात लाख रुपये का जुर्माना हुआ है।
रेहड़ी संचालकों को फूड सेफ्टी की दी जानकारी
डॉ. महावीर ने बताया कि सालासर मंदिर के पास जो प्रसाद देने के लिए रेहड़ियां लगाई गई है। उन्हें फूड सेफ्टी के बारे में जानकारी दी गई है। जिस पर उन्हें बताया गया है कि वह अपना रजिस्ट्रेशन करवा लें तथा साफ सफाई का भी पूरा ध्यान रखें। इसको लेकर डॉ. महावीर ने रेहड़ी संचालकों को अपनी ओर से सिर के लिए टोपी तथा मिठाई पर डालने के लिए कपड़ा और हाथ के दस्ताने दिए हैं, वे इन्हें पहनकर ही लोगों को प्रसाद दें।
डॉ. महावीर की आम जनता को सलाह
डॉ. महावीर ने आम जनता से अपील की है कि कोई भी उस दुकान से सामान ना खरीदें जो नई दुकानें खुली हों। इसका कारण है कि वे कैसा सामान रखता है अथवा कैसा नहीं इसके बारे में फूड डिपार्टमेंट को जानकारी नहीं होती। क्योंकि ये दुकानदार केवल त्योहार पर ही बाहर निकलते हैं, जिनका डिपार्टमेंट में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया होता। साथ ही डॉक्टर ने कहा कि खुले में पड़ी मिठाई तथा अधिक रंग इस्तेेमाल कर बनाई हुई मिठाई ना खरीदें जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है। डॉ. महावीर ने दुकानदारों से भी अपील की कि कोई भी दुकानदार पुराना सामान ना बेचें तथा प्रतिबंधित रंगों का इस्तेमाल ना करें। डॉ. ने कहा कि दुकानदार अपनी दुकानों का रजिस्ट्रेशन भी फूड सप्लाई विभाग में करवा लें। जिससे उनके लिए भी सुविधाजनक रहेगा तथा आम जनता को भी कोई परेशानी नहीं होगी।
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फूड इंस्पेक्टर डॉ. महावीर ने मंगलवार को सुबह ही दुकानों पर जाकर चेकिंग शुरू कर दी। जिन दुकानों पर उन्हें मिलावटी मिठाई होने की आशंका थी, उन दुकानों पर टीम ने खाद्य सामग्री के सैंपल भरे। इंस्पेक्टर ने बताया कि उन्होंने सुबह सिरसा की चार दुकानों से सैंपल भरे थे। इसके बाद रानियां क्षेत्र से तीन दुकानों से खाद्य सामग्री के सैंपल लिए हैं।
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डॉ. महावीर ने बताया कि ये सैंपल जांच कराने के लिए चंडीगढ़ भेजे जाएंगे। किसी सैंपल में मिलावट मिली तो उस पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना किया जाएगा। वहीं, अगर किसी भी दुकान से खाने पीने का सामान दूषित पाया गया तो उस दुकानदार के खिलाफ जुर्माना अथवा सजा भी हो सकती है।
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अगस्त में भी लिए थे सैंपल
फूड इंस्पेक्टर डा. महावीर की टीम ने बीती 11 अगस्त 2019 को भी शहर से पांच दुकानों की मिठाइयों के सेंपल भरे थे। डॉ. महावीर ने बताया कि जो चार सेंपल बीते दिनों लिए थे उसकी अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। जैसे ही रिपोर्ट आएगी उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फूड इंस्पेक्टर महावीर ने बताया कि सैंपल चंडीगढ़ भेजे जाएंगे। इसकी प्रक्रिया 14 दिन की है। यदि लैब में सैंपल ज्यादा होते हैं तो रिपोर्ट आने में देरी हो सकती है।
पिछले वर्ष 97 दुकानों से भरे थे सैंपल, 21 की रिपोर्ट आई थी फेल
बीते वर्ष 2018 त्योहारी सीजन में फूूड सेफ्टी विभाग ने 97 प्रतिष्ठानों से खोया, पनीर, दूध के सैंपल लिए थे। इसमें से 21 सैंपल की रिपोर्ट फेल आई है। वहीं, वर्ष 2017 में विभाग ने 94 खाद्य सामग्री के सैंपल लिए थे। इसमें तीन सैंपल की रिपोर्ट अनसेफ आई थी। जबकि छह सैंपल स्टेंडर्ड पाए गए थे। पिछले चार वर्षों में 20 केसों में कोर्ट से सात लाख रुपये का जुर्माना हुआ है।
रेहड़ी संचालकों को फूड सेफ्टी की दी जानकारी
डॉ. महावीर ने बताया कि सालासर मंदिर के पास जो प्रसाद देने के लिए रेहड़ियां लगाई गई है। उन्हें फूड सेफ्टी के बारे में जानकारी दी गई है। जिस पर उन्हें बताया गया है कि वह अपना रजिस्ट्रेशन करवा लें तथा साफ सफाई का भी पूरा ध्यान रखें। इसको लेकर डॉ. महावीर ने रेहड़ी संचालकों को अपनी ओर से सिर के लिए टोपी तथा मिठाई पर डालने के लिए कपड़ा और हाथ के दस्ताने दिए हैं, वे इन्हें पहनकर ही लोगों को प्रसाद दें।
डॉ. महावीर की आम जनता को सलाह
डॉ. महावीर ने आम जनता से अपील की है कि कोई भी उस दुकान से सामान ना खरीदें जो नई दुकानें खुली हों। इसका कारण है कि वे कैसा सामान रखता है अथवा कैसा नहीं इसके बारे में फूड डिपार्टमेंट को जानकारी नहीं होती। क्योंकि ये दुकानदार केवल त्योहार पर ही बाहर निकलते हैं, जिनका डिपार्टमेंट में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया होता। साथ ही डॉक्टर ने कहा कि खुले में पड़ी मिठाई तथा अधिक रंग इस्तेेमाल कर बनाई हुई मिठाई ना खरीदें जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है। डॉ. महावीर ने दुकानदारों से भी अपील की कि कोई भी दुकानदार पुराना सामान ना बेचें तथा प्रतिबंधित रंगों का इस्तेमाल ना करें। डॉ. ने कहा कि दुकानदार अपनी दुकानों का रजिस्ट्रेशन भी फूड सप्लाई विभाग में करवा लें। जिससे उनके लिए भी सुविधाजनक रहेगा तथा आम जनता को भी कोई परेशानी नहीं होगी।