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Sirsa News: संगीत का शौक ऐसा चढ़ा की बना दिया नवस्वर रागनी वाद्ययंत्र, निकलती हैं तीन धुन एक साथ

Mon, 26 Feb 2024 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Mon, 26 Feb 2024 11:40 PM IST
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He became so fond of music that he made a new musical instrument, which produces three tunes simultaneously
नवस्वर रागनी वाद्ययंत्र बजाते सुभाषचंद्र घोष
सिरसा। संगीत का शौक किस कदर जुनूनी बना सकता है, इसका जीवंत उदाहरण पद्म विभूषण से अलंकृत कलाकार सुभाष चंद्र घोष हैं। जिन्होंने एक ऐसा वाद्य यंत्र बना है, जिससे एक साथ तीन धुन निकलती है। ये वाद्ययंत्र पूरे देश में एक ही है। राजकीय नेशनल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे संगीतकार सुभाष चंद्र घोष ने संवाददाता से परिचर्चा में इस यंत्र के खूबियों के बारे में बताया।
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संगीतकार घोष ने बताया कि वे बचपन से ही संगीत के दीवाने रहे हैं। उनको संगीत की दीक्षा विरासत में ही मिली है। उनके पिता और चाचा से उन्हें तबले और गाने की तालीम मिली है। संगीत के क्षेत्र में कुछ नया कर गुजरने की चाहत में उन्होंने एक ऐसे वाद्ययंत्र की खोज की है जिससे एकसाथ तीन धुन निकलती है। घोष ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने अपनी शिक्षा पिता सुनील कुमार से ली। उसके बाद उस्ताद अमजद अली खान साहेब से संगीत और गायन की शिक्षा ली। संवाद
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6 सालों में बहुत बार टूटा वाद्ययंत्र, लेकिन बरकरार रहा
सुभाष घोष ने बताया कि नव स्वर रागनी वाद्ययंत्र बनाने में उन्हें 5 से 6 साल लग गए। ये वाद्ययंत्र एक लकड़ी पर बना हुआ है। इन 6 साल में यंत्र बहुत बार टूटा। लेकिन इसे बनाने का जुनून इतना था कि आखिरकार नव स्वर वाद्ययंत्र बन गया। इस वाद्य यंत्र से तीन धुन एकसाथ निकलती हैं। जिसमें से शास्त्रीय संगीत, गायकी अंग व पाश्चात्य संगीत की धुन निकलती है।
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इस प्रकार आकार दिया है यंत्र को
संगीतकार व गायक सुभाष चंद्र घोष ने बताया कि इस यंत्र को एक लकड़ी के टुकड़े से बनाया गया है। इस लकड़ी को अंदर से खोदा गया और वीणा का आकार दिया गया। इसमें सरोद वाद्य यंत्र की तरह 22 तार लगाए गए हैं। जिसकी वजह से यह सरोद की तरह बजाई जा सकती है। इसकी खूबी है कि इससे वेस्टर्न क्लासिक व इंडियन क्लासिकल म्यूजिक बजाया जा सकता है।
बंगाल में हुई परवरिश, अब हरियाणा के दामाद
सुभाष चंद्र घोष का बचपन बंगाल में बीता है और उनकी परवरिश भी बंगाल में हुई है। लेकिन घोष की शादी हरियाणा में हुई और अब वो पंचकूला में रहते हैं। घोष ने बताया कि वह विज्ञान के विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने रसायन से पोस्ट ग्रेजुएशन की है। लेकिन संगीत के शौक ने उन्हें कलाकार बना दिया। उनका कहना है कि कहीं न कहीं विज्ञान का विद्यार्थी होने का भी फायदा मिला जो उन्होंने इस नव स्वर रागनी वाद्य यंत्र को बना दिया। घोष पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी द्वारा लिखा गया गाना क्या खोया, क्या पाया भी गा चुके हैं।

30 साल से दे रहे निशुल्क में शिक्षा
संगीतकार सुभाष चंद्र घोष ने बताया कि इस समय शास्त्रीय संगीत और गायन वर्तमान में विलुप्त होता जा रहा है। जिसके चलते पिछले 30 साल से शास्त्रीय संगीत की विद्या निशुल्क में दे रहे हैं। इन बच्चों को वो पीएचडी तक निशुल्क में शास्त्रीय संगीत व गायन सिखाते हैं।
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