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Sirsa News: फसल पर गिरे ओले..., किसानों के अरमानों पर पानी
Sat, 12 Apr 2025 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 12 Apr 2025 12:00 AM IST
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चाेपटा मंडी में भीगी सरसों और गेहूं की ढेरियां।
सिरसा। जिले में शुक्रवार को दोपहर बाद मौसम बदल गया। तेज हवाओं के साथ 16 एमएम बारिश हुई। बारिश के साथ 20 मिनट तक जिले में ओलावृष्टि भी हुई। इससे खेतों में खड़ी गेंहू की फसल बिछ गई। ओलों ने गेहूं की बाल को बीच से तोड़ दिया। खेतों में कटाई कर बंडल बनाकर रखी गेहूं को भी नुकसान हुआ। जिससे 15 प्रतिशत तक गेहूं की फसल को नुकसान हो गया।
जिले की मंडियों और खरीद केंद्रों पर आई सरसों और गेहूं की शत प्रतिशत फसल बारिश में भीग गई। मंडियों में जलभराव के कारण सरसों की फसल को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ। फसलों को हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए कृषि विभाग की टीमें फील्ड में उतरेंगी और अपनी रिपोर्ट देंगी।
बड़ागुढ़ा और चोपटा ब्लॉक में सबसे ज्यादा ओलावृष्टि हुई। तेज हवा के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में बिजली के 70 खंबे टूट गए। 30 से ज्यादा जगहों पर पेड़ व टहनियां गिर गईं। इस कारण कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रही।
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वहीं सिरसा शहर में बारिश के कारण जलभराव की स्थिति देखने को मिली। हर चौराहे पर दो से तीन फीट तक पानी खड़ा नजर आया। मुख्य शहर में जलभराव के कारण सबसे ज्यादा परेशानी हुई। हालांकि शहर में बरसाती लाइन बिछाने का कार्य जारी है। लेकिन उसकी गति बेहद धीमी है। ऐसे में इस मानसून में भी शहरवासियों को जलभराव से जूझना पड़ेगा।
इन जगहों पर हुआ जलभराव
हिसार रोड, सुरखाब चौक, जनता भवन रोड, डबवाली रोड, मिनी बाईपास, बरनाला रोड, सिविल अस्पताल रोड, रानियां रोड, परशुराम चौक।
रानियां में पार्षद के घर पर गिरी बिजली
रानियां में पार्षद गुरदीप सिंह के घर पर बिजली गिरी। बिजली पानी की टंकी पर गिरी जिससे टंकी क्षतिग्रस्त हो गई। इस दौरान परिवार के सभी लोग घर पर ही मौजूद थे। किसी प्रकार का जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। वहीं तेज हवाओं के कारण शहर में लोगों के टीन शेड और फ्लैक्स बोर्ड दूर जाकर गिरे। ग्रामीण एरिया में भी टीन शेड की बनी छतों को भी नुकसान हुआ।
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फसल की एवरेज से होगा नुकसान का आंकलन
जिले भर में ओलावृष्टि हुई है। कहीं कम तो कहीं पर ज्यादा हुई है। पांच प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत तक गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। कृषि अधिकारियों के अनुसार बड़ागुढ़ा ब्लॉक, चोपटा ब्लॉक में ओलावृष्टि ज्यादा हुई है। ऐसे में गेहूं की औसत से नुकसान का पता लगेगा। किसानों की माने तो ओलावृष्टि के कारण फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। जानकारी के अनुसार गेहूं की अभी तक 5 प्रतिशत भी कटाई नहीं हुई है। 95 प्रतिशत गेहूं की फसल खेतों में खड़ी है। ऐसे में मौसम जब तक साफ नहीं होता है किसानों की चिंता बनी रहेगी। वहीं किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
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हिसार रोड पर सड़क धंसी
आंबेडकर चौक से परशुराम चौक तक बरसाती पेयजल लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। लाइन बिछाने के लिए कई जगहों पर सड़कों को खोद गया है और बाद में उसे मिट्टी से भर दिया गया। मगर, बारिश के बाद उस जगह से सड़क धंसने लगी। इस कारण हादसों का खतरा बन गया।
किसानों को तिरपाल मुहैया नहीं करवा पाए आढ़ती
अनाज मंडी में आने वाली फसल को बारिश से बचाने की जिम्मेदारी प्रशासन के साथ आढ़ती की होती है। आढ़ती को आढ़त के बदले यह व्यवस्था करनी होती है। अहम बात यह है कि अभी तक मंडी में 5 प्रतिशत गेहूं ही आया है। इन चंद किसानों को भी आढ़ती तिरपाल की सुविधा मुहैया नहीं करवाए। जिस कारण किसानों की मंडी में पड़ी गेहूं की फसल भीग गई। वहीं मंडी में खुले में पड़ी सरसों की फसल भी भीग गई।
गेहूं की फसल की कटाई अभी शुरू हुई है, इसलिए खेतों में ही फसल खड़ी थी। गेहूं की फसल को कई जगहों पर नुकसान हुआ है। अब गेहूं की औसत से ही नुकसान का सही आंकलन हो पाएगा। इसी आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। - डाॅ. सुखदेव सिंह, कंबोज, कृषि अधिकारी
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जिले की मंडियों और खरीद केंद्रों पर आई सरसों और गेहूं की शत प्रतिशत फसल बारिश में भीग गई। मंडियों में जलभराव के कारण सरसों की फसल को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ। फसलों को हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए कृषि विभाग की टीमें फील्ड में उतरेंगी और अपनी रिपोर्ट देंगी।
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बड़ागुढ़ा और चोपटा ब्लॉक में सबसे ज्यादा ओलावृष्टि हुई। तेज हवा के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में बिजली के 70 खंबे टूट गए। 30 से ज्यादा जगहों पर पेड़ व टहनियां गिर गईं। इस कारण कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रही।
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वहीं सिरसा शहर में बारिश के कारण जलभराव की स्थिति देखने को मिली। हर चौराहे पर दो से तीन फीट तक पानी खड़ा नजर आया। मुख्य शहर में जलभराव के कारण सबसे ज्यादा परेशानी हुई। हालांकि शहर में बरसाती लाइन बिछाने का कार्य जारी है। लेकिन उसकी गति बेहद धीमी है। ऐसे में इस मानसून में भी शहरवासियों को जलभराव से जूझना पड़ेगा।
इन जगहों पर हुआ जलभराव
हिसार रोड, सुरखाब चौक, जनता भवन रोड, डबवाली रोड, मिनी बाईपास, बरनाला रोड, सिविल अस्पताल रोड, रानियां रोड, परशुराम चौक।
रानियां में पार्षद के घर पर गिरी बिजली
रानियां में पार्षद गुरदीप सिंह के घर पर बिजली गिरी। बिजली पानी की टंकी पर गिरी जिससे टंकी क्षतिग्रस्त हो गई। इस दौरान परिवार के सभी लोग घर पर ही मौजूद थे। किसी प्रकार का जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। वहीं तेज हवाओं के कारण शहर में लोगों के टीन शेड और फ्लैक्स बोर्ड दूर जाकर गिरे। ग्रामीण एरिया में भी टीन शेड की बनी छतों को भी नुकसान हुआ।
फसल की एवरेज से होगा नुकसान का आंकलन
जिले भर में ओलावृष्टि हुई है। कहीं कम तो कहीं पर ज्यादा हुई है। पांच प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत तक गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। कृषि अधिकारियों के अनुसार बड़ागुढ़ा ब्लॉक, चोपटा ब्लॉक में ओलावृष्टि ज्यादा हुई है। ऐसे में गेहूं की औसत से नुकसान का पता लगेगा। किसानों की माने तो ओलावृष्टि के कारण फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। जानकारी के अनुसार गेहूं की अभी तक 5 प्रतिशत भी कटाई नहीं हुई है। 95 प्रतिशत गेहूं की फसल खेतों में खड़ी है। ऐसे में मौसम जब तक साफ नहीं होता है किसानों की चिंता बनी रहेगी। वहीं किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
हिसार रोड पर सड़क धंसी
आंबेडकर चौक से परशुराम चौक तक बरसाती पेयजल लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। लाइन बिछाने के लिए कई जगहों पर सड़कों को खोद गया है और बाद में उसे मिट्टी से भर दिया गया। मगर, बारिश के बाद उस जगह से सड़क धंसने लगी। इस कारण हादसों का खतरा बन गया।
किसानों को तिरपाल मुहैया नहीं करवा पाए आढ़ती
अनाज मंडी में आने वाली फसल को बारिश से बचाने की जिम्मेदारी प्रशासन के साथ आढ़ती की होती है। आढ़ती को आढ़त के बदले यह व्यवस्था करनी होती है। अहम बात यह है कि अभी तक मंडी में 5 प्रतिशत गेहूं ही आया है। इन चंद किसानों को भी आढ़ती तिरपाल की सुविधा मुहैया नहीं करवाए। जिस कारण किसानों की मंडी में पड़ी गेहूं की फसल भीग गई। वहीं मंडी में खुले में पड़ी सरसों की फसल भी भीग गई।
गेहूं की फसल की कटाई अभी शुरू हुई है, इसलिए खेतों में ही फसल खड़ी थी। गेहूं की फसल को कई जगहों पर नुकसान हुआ है। अब गेहूं की औसत से ही नुकसान का सही आंकलन हो पाएगा। इसी आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। - डाॅ. सुखदेव सिंह, कंबोज, कृषि अधिकारी