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बिजली चोरी जुर्माने में वृद्धि सर्कुलर को रद्द करना सरकार का किसान हितैषी फैसला : बिजली मंत्री
Tue, 23 May 2023 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 23 May 2023 11:29 PM IST
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पत्रकारों को संबोधित करते बिजली मंत्री रणजीत सिंह । विज्ञप्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। बिजली मंत्री रणजीत सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) की सिफारिश को खारिज करते हुए किसानों के बिजली चोरी जुर्माने में वृद्धि के आदेश को रद्द कर दिया है। प्रदेश सरकार द्वारा पुरानी पॉलिसी के अनुसार ही कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी स्पष्ट किया है कि एचईआरसी के आदेश मानने के लिए सरकार बाध्य नहीं है। सरकार ने सर्कुलर को वापस ले लिया है।
बिजली मंत्री मंगलवार को स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पुराने नियम के अनुसार एक मेगावाट पर 2 हजार रुपये तथा इससे अधिक 10 मेगावाट तक 20 हजार रुपये जुर्माना करने का प्रावधान था और अब भी पुराने नियम में प्रदेश में लागू रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली की स्थित बहुत अच्छी है, वर्तमान में साढे 9 हजार मेगावाट प्रतिदिन की बिजली की खपत है। पिछले वर्ष में अधिकतम बिजली की खपत 12 हजार 185 मेगावाट थी। जून और जुलाई में सबसे अधिक गर्मी का प्रभाव होता है और फसलों में भी पानी की जरूरत बढ़ जाती है, उन दिनों में 12 हजार मेगावाट प्रतिदिन की बिजली की खपत होती है। बिजली मंत्री ने कहा कि खेदड़ के दोनों यूनिट से 1200 मेगावाट, यमुनानगर के दोनों यूनिट से 700 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। पानीपत के तीन यूनिट में से दो चल रहे हैं तथा एक यूनिट में तकनीकी खामी है जिसे जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश को केंद्र सरकार से भी बिजली मिल रही है। प्रदेश वासियों को बिजली के मामले में कभी कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
ट्यूबवेल पर खर्च होता है 5800 करोड़
बिजली मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा ट्यूबवेल पर करीब 5800 करोड़ रुपये खर्च किया जाता है। इसमें से किसान के हिस्से में बहुत ही कम जाता है, शेष राशि सरकार द्वारा सब्सिडी के तौर पर खर्च की जाती है। इसके अलावा केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक व ओडिशा में समय पर बारिश आने से वहां के नेशनल ग्रिड से आसानी से बिजली मिल जाती है। सरकार को सात से आठ रुपये प्रति यूनिट खर्च आता है, लेकिन सरकार किसानों से 10 पैसे प्रति यूनिट ट्यूबवेल की बिजली का बिल ले रही है। 2018 तक लगभग 50 हजार लोगों ने सोलर ट्यूबवेल के लिए पैसे जमा करवाए थे, उन्हें लगभग कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। अब केवल जमीनी विवाद, कोर्ट केस या कोई व्यक्ति शर्तें पूरी नहीं कर रहा है, ऐसे लोगों के कनेक्शन लंबित है। वर्ष 2019, 2020 व 2021 में लगभग 61 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 10 मेगावाट के 31 हजार सोलर मेगावाट के आवेदन शामिल हैं, जो अगले छह माह में दे दिए जाएंगे, शेष 29 हजार कनेक्शन की प्रक्रिया इसी एक वर्ष में पूरी कर दी जाएगी। सोलर पैनल पर 30 प्रतिशत केंद्र तथा 45 प्रतिशत राज्य सरकार सब्सिडी दे रही है।
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रिकवरी बढ़ी, लाइन लॉस घटा
प्रदेश में बिजली चोरी पर रोक के लिए टीमों द्वारा लगातार छापे मारे जाते हैं तथा करोड़ों रुपये की रिकवरी भी की जाती है। पिछले वर्ष रिवेन्यू रिकवरी 31 हजार करोड़ रुपये थी तथा इस यह बढ़कर वर्ष 34 हजार करोड़ रुपये हो गई है। सरकार ने घरेलू व औद्योगिक बिजली के इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया है। जो लाइन लोस 34 प्रतिशत था, वह घटकर 11 प्रतिशत हो गया है, हमारा प्रयास है कि लाइन लॉस को और कम किया जाए।
अब तक लगाए सात लाख स्मार्ट मीटर
बिजली मंत्री ने बताया कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल व पानीपत में स्मार्ट मीटर लगाने शुरु कर दिए हैं। अब तक सात लाख मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर बहुत ही उपयोगी है, कभी भी चेक किया जा सकता है कि बिजली की कितनी खपत हुए है तथा घर से बाहर जाते समय इन्हें बंद भी किया जा सकता है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे बिजली जरूरत के मुताबिक ही उपयोग करें ताकि ऊर्जा संरक्षित की जा सके।
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सिरसा। बिजली मंत्री रणजीत सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) की सिफारिश को खारिज करते हुए किसानों के बिजली चोरी जुर्माने में वृद्धि के आदेश को रद्द कर दिया है। प्रदेश सरकार द्वारा पुरानी पॉलिसी के अनुसार ही कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी स्पष्ट किया है कि एचईआरसी के आदेश मानने के लिए सरकार बाध्य नहीं है। सरकार ने सर्कुलर को वापस ले लिया है।
बिजली मंत्री मंगलवार को स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पुराने नियम के अनुसार एक मेगावाट पर 2 हजार रुपये तथा इससे अधिक 10 मेगावाट तक 20 हजार रुपये जुर्माना करने का प्रावधान था और अब भी पुराने नियम में प्रदेश में लागू रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली की स्थित बहुत अच्छी है, वर्तमान में साढे 9 हजार मेगावाट प्रतिदिन की बिजली की खपत है। पिछले वर्ष में अधिकतम बिजली की खपत 12 हजार 185 मेगावाट थी। जून और जुलाई में सबसे अधिक गर्मी का प्रभाव होता है और फसलों में भी पानी की जरूरत बढ़ जाती है, उन दिनों में 12 हजार मेगावाट प्रतिदिन की बिजली की खपत होती है। बिजली मंत्री ने कहा कि खेदड़ के दोनों यूनिट से 1200 मेगावाट, यमुनानगर के दोनों यूनिट से 700 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। पानीपत के तीन यूनिट में से दो चल रहे हैं तथा एक यूनिट में तकनीकी खामी है जिसे जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश को केंद्र सरकार से भी बिजली मिल रही है। प्रदेश वासियों को बिजली के मामले में कभी कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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ट्यूबवेल पर खर्च होता है 5800 करोड़
बिजली मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा ट्यूबवेल पर करीब 5800 करोड़ रुपये खर्च किया जाता है। इसमें से किसान के हिस्से में बहुत ही कम जाता है, शेष राशि सरकार द्वारा सब्सिडी के तौर पर खर्च की जाती है। इसके अलावा केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक व ओडिशा में समय पर बारिश आने से वहां के नेशनल ग्रिड से आसानी से बिजली मिल जाती है। सरकार को सात से आठ रुपये प्रति यूनिट खर्च आता है, लेकिन सरकार किसानों से 10 पैसे प्रति यूनिट ट्यूबवेल की बिजली का बिल ले रही है। 2018 तक लगभग 50 हजार लोगों ने सोलर ट्यूबवेल के लिए पैसे जमा करवाए थे, उन्हें लगभग कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। अब केवल जमीनी विवाद, कोर्ट केस या कोई व्यक्ति शर्तें पूरी नहीं कर रहा है, ऐसे लोगों के कनेक्शन लंबित है। वर्ष 2019, 2020 व 2021 में लगभग 61 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 10 मेगावाट के 31 हजार सोलर मेगावाट के आवेदन शामिल हैं, जो अगले छह माह में दे दिए जाएंगे, शेष 29 हजार कनेक्शन की प्रक्रिया इसी एक वर्ष में पूरी कर दी जाएगी। सोलर पैनल पर 30 प्रतिशत केंद्र तथा 45 प्रतिशत राज्य सरकार सब्सिडी दे रही है।
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रिकवरी बढ़ी, लाइन लॉस घटा
प्रदेश में बिजली चोरी पर रोक के लिए टीमों द्वारा लगातार छापे मारे जाते हैं तथा करोड़ों रुपये की रिकवरी भी की जाती है। पिछले वर्ष रिवेन्यू रिकवरी 31 हजार करोड़ रुपये थी तथा इस यह बढ़कर वर्ष 34 हजार करोड़ रुपये हो गई है। सरकार ने घरेलू व औद्योगिक बिजली के इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया है। जो लाइन लोस 34 प्रतिशत था, वह घटकर 11 प्रतिशत हो गया है, हमारा प्रयास है कि लाइन लॉस को और कम किया जाए।
अब तक लगाए सात लाख स्मार्ट मीटर
बिजली मंत्री ने बताया कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल व पानीपत में स्मार्ट मीटर लगाने शुरु कर दिए हैं। अब तक सात लाख मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर बहुत ही उपयोगी है, कभी भी चेक किया जा सकता है कि बिजली की कितनी खपत हुए है तथा घर से बाहर जाते समय इन्हें बंद भी किया जा सकता है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे बिजली जरूरत के मुताबिक ही उपयोग करें ताकि ऊर्जा संरक्षित की जा सके।