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Sirsa News: सरसों के सरकारी खरीद बंद, किसानों को प्रति क्विंटल 1200 रुपये तक का नुकसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। सरकारी खरीद बंद होने के बाद किसानों को एक हजार से 1200 रुपये प्रति क्विंटल के नुकसान पर सरसों निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है। दाम कम मिलने के कारण किसानों में भारी रोष है। अभी भी काफी किसान सरकारी खरीद दोबारा से शुरू होने की उम्मीद में सरसों घर पर रखे हुए हैं।
एक मई को हैफेड ने मुख्यालय के आदेश पर सरकारी खरीद बंद कर दी है।सरकारी खरीद बंद होने से पहले मंडियों में हर रोज 20 हजार क्विंटल के करीब सरसों की आवक हो रही थी, जबकि सरकारी खरीद के अंतिम दिन यह आंकड़ा 60 हजार क्विंटल तक पहुंच गया था। एक मई को जिले में करीब 700 किसानों ने टोकन कटवाया। दिनभर प्रदर्शन करने के बाद भी किसानों की सरसों की खरीद नहीं हो पाई। हालांकि किसान सरकारी खरीद शुरू करवाने काे लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी तरफ से मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर सरसों का रजिस्ट्रेशन भी करवाया गया था। लेकिन इसके बाद भी उनकी सरसों एमएसपी पर नहीं बिक पाई ऐसे में अब एक हजार रुपये का प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गेहूं की आवक घटी, मंडियों में 27 लाख 66 हजार क्विंटल गेहूं का उठान बाकी
गेहूं का सीजन भी अब समाप्ति की ओर है। सरकार ने 15 मई तक गेहूं की सरकारी खरीद किए जाने का ऐलान किया है। अभी जिले में एक लाख 70 हजार क्विंटल गेहूं की हर रोज आवक हो रही है। जिले में अभी तक 71 लाख 94 हजार 219 क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। जिसमें से मंडियों में अभी 27 लाख 66 हजार 405 क्विंटल गेहूं का उठान होना शेष है। वहीं मौसम खराब होने के चलते अब मंडियों में पड़ा गेहूं खराब होने की भी आशंका बनी हुई है। मंडियों में आढ़तियों के पास पर्याप्त मात्रा में तिरपाल की भी व्यवस्था नहीं है।
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64 खरीद केंद्रों में से 30 पर शेड की व्यवस्था नहीं
पिछले कुछ दिनों से बारिश के आसार बने हुए हैं। कुछ क्षेत्रों में बारिश भी हुई है। इसके कारण मंडियों में खुले में पड़ा गेहूं भीग गया, क्योंकि जिले में 64 खरीद केंद्रों में से 30 खरीद केंद्रों पर शेड की कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि अधिक बारिश न होने के कारण गेहूं में अभी तक नुकसान नहीं है। अगर तेज बारिश होती है तो मंडियों में 27 लाख क्विंटल गेहूं भीगने की आशंका है।
एमएसपी पर सरसों की खरीद न होने के कारण मजबूरन निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ी। एमएसपी पर पहले 5450 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से सरसों बिकी रही थी। लेकिन हम सरसों नहीं बेच पाए। अब 4450 रुपये में सरसों बेचनी पड़ी। एक हजार रुपये का सीधा घाटा लगा है।-- गुरसाहब, महमदपुर
सरसों की दो दिन पहले ही सरकारी खरीद बंद हुई है। अब मजबूर होकर निजी व्यापारियों को सरसों बेचनी पड़ रही है। मंडियों में अन्य कई किसान निजी व्यापारियों को सरसों बेचकर लौट रहे हैं। निजी व्यापारियों की ओर से सरसों 4500 रुपये में खरीदी गई है। -प्रेम कुमार, अरनियांवाली
कई किसान मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाए और अब सरसों की सरकारी खरीद बंद कर दी गई है। जिससे किसानों को एक हजार रुपये से 1200 रुपये तक का प्रति क्विंटल नुकसान उठाना पड़ रहा है। अभी 25 फीसदी किसानों की सरसों घर पर ही पड़ी है। सरकार को सरसों की दोबारा से खरीद शुरू करनी चाहिए। -वीरभान मेहता, आढ़ती
सरसों की दोबारा से खरीद शुरू करने को लेकर अभी तक कोई भी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। मुख्यालय के आदेशों पर सरकारी खरीद बंद की गई है। नैफेड और हैफेड की ओर से पहले ही लक्ष्य से अधिक सरसों की खरीद की जा चुकी है।
- मांगेराम, डीएम, हैफेड सिरसा।
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सिरसा। सरकारी खरीद बंद होने के बाद किसानों को एक हजार से 1200 रुपये प्रति क्विंटल के नुकसान पर सरसों निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है। दाम कम मिलने के कारण किसानों में भारी रोष है। अभी भी काफी किसान सरकारी खरीद दोबारा से शुरू होने की उम्मीद में सरसों घर पर रखे हुए हैं।
एक मई को हैफेड ने मुख्यालय के आदेश पर सरकारी खरीद बंद कर दी है।सरकारी खरीद बंद होने से पहले मंडियों में हर रोज 20 हजार क्विंटल के करीब सरसों की आवक हो रही थी, जबकि सरकारी खरीद के अंतिम दिन यह आंकड़ा 60 हजार क्विंटल तक पहुंच गया था। एक मई को जिले में करीब 700 किसानों ने टोकन कटवाया। दिनभर प्रदर्शन करने के बाद भी किसानों की सरसों की खरीद नहीं हो पाई। हालांकि किसान सरकारी खरीद शुरू करवाने काे लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी तरफ से मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर सरसों का रजिस्ट्रेशन भी करवाया गया था। लेकिन इसके बाद भी उनकी सरसों एमएसपी पर नहीं बिक पाई ऐसे में अब एक हजार रुपये का प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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गेहूं की आवक घटी, मंडियों में 27 लाख 66 हजार क्विंटल गेहूं का उठान बाकी
गेहूं का सीजन भी अब समाप्ति की ओर है। सरकार ने 15 मई तक गेहूं की सरकारी खरीद किए जाने का ऐलान किया है। अभी जिले में एक लाख 70 हजार क्विंटल गेहूं की हर रोज आवक हो रही है। जिले में अभी तक 71 लाख 94 हजार 219 क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। जिसमें से मंडियों में अभी 27 लाख 66 हजार 405 क्विंटल गेहूं का उठान होना शेष है। वहीं मौसम खराब होने के चलते अब मंडियों में पड़ा गेहूं खराब होने की भी आशंका बनी हुई है। मंडियों में आढ़तियों के पास पर्याप्त मात्रा में तिरपाल की भी व्यवस्था नहीं है।
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64 खरीद केंद्रों में से 30 पर शेड की व्यवस्था नहीं
पिछले कुछ दिनों से बारिश के आसार बने हुए हैं। कुछ क्षेत्रों में बारिश भी हुई है। इसके कारण मंडियों में खुले में पड़ा गेहूं भीग गया, क्योंकि जिले में 64 खरीद केंद्रों में से 30 खरीद केंद्रों पर शेड की कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि अधिक बारिश न होने के कारण गेहूं में अभी तक नुकसान नहीं है। अगर तेज बारिश होती है तो मंडियों में 27 लाख क्विंटल गेहूं भीगने की आशंका है।
एमएसपी पर सरसों की खरीद न होने के कारण मजबूरन निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ी। एमएसपी पर पहले 5450 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से सरसों बिकी रही थी। लेकिन हम सरसों नहीं बेच पाए। अब 4450 रुपये में सरसों बेचनी पड़ी। एक हजार रुपये का सीधा घाटा लगा है।
सरसों की दो दिन पहले ही सरकारी खरीद बंद हुई है। अब मजबूर होकर निजी व्यापारियों को सरसों बेचनी पड़ रही है। मंडियों में अन्य कई किसान निजी व्यापारियों को सरसों बेचकर लौट रहे हैं। निजी व्यापारियों की ओर से सरसों 4500 रुपये में खरीदी गई है। -प्रेम कुमार, अरनियांवाली
कई किसान मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाए और अब सरसों की सरकारी खरीद बंद कर दी गई है। जिससे किसानों को एक हजार रुपये से 1200 रुपये तक का प्रति क्विंटल नुकसान उठाना पड़ रहा है। अभी 25 फीसदी किसानों की सरसों घर पर ही पड़ी है। सरकार को सरसों की दोबारा से खरीद शुरू करनी चाहिए। -वीरभान मेहता, आढ़ती
सरसों की दोबारा से खरीद शुरू करने को लेकर अभी तक कोई भी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। मुख्यालय के आदेशों पर सरकारी खरीद बंद की गई है। नैफेड और हैफेड की ओर से पहले ही लक्ष्य से अधिक सरसों की खरीद की जा चुकी है।
- मांगेराम, डीएम, हैफेड सिरसा।