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Sirsa News: सरदूलगढ़ में खतरे के निशान पर पहुंचा घग्गर का जलस्तर

Thu, 28 Aug 2025 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Thu, 28 Aug 2025 12:39 AM IST
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Ghaggar water level reached danger mark in Sardulgarh
रोड़ी। हरियाणा-पंजाब सीमा से गुजरने वाली घग्गर नदी पंजाब के सरदूलगढ़ से हरियाणा में प्रवेश करती है। यह सिरसा जिले के मत्तड़, लहंगेवाला व रंगा गांवों से होकर बहती है। पंजाब के सरदूलगढ़ स्थित घग्गर पुल पर लगी गेज मशीन के अनुसार मंगलवार को जलस्तर 16 फीट दर्ज किया गया था, जो बुधवार शाम तक 20 फीट तक पहुंच गया। रोड़ी क्षेत्र में जलस्तर बाढ़ के निशान के पास पहुंच चुका है। ऐसे में तटीय क्षेत्रों में बसे ग्रामीणों व किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गांव लहंगेवाला के किसान बादल सिंह, चंद सिंह, जनक सिंह, जगरूप सिंह, कश्मीर सिंह, नायब सिंह और मंदर सिंह ने बताया कि रातों-रात करीब तीन फीट पानी बढ़ गया। इससे खेतों में पानी भरने लगा है।
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किसानों ने बताया कि तटबंध के साथ लगते खेतों में पानी भरने लगा था। रिसाव की सूचना जैसे ही किसानों को मिली तो घग्गर के किनारों को मजबूत करने का काम शुरू कर दिया। इसके साथ ही गांव के रास्तों को भी मजबूत करने का काम जारी है, ताकि गांवों में पानी न आए।
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अब घग्गर का पानी सीवरेज लाइन से आने लगा : किसानों ने बताया कि गांव के गंदे पानी की निकासी पाइपलाइन के माध्यम से घग्गर में की गई थी। घग्गर में अब जलस्तर बढ़ने के कारण उस पाइपलाइन से गांव में पानी आने लगा है। जैसे ही इस पानी के लाइन से आने की जानकारी ग्रामीणों को मिली तो तुरंत प्रभाव से इन लाइन को बंद करने का कार्य किया गया, ताकि गांवों में पानी न भरे।
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प्रशासन नहीं है साथ, नहीं होती सुनवाई
किसानों का कहना है कि मत्तड़, लहंगेवाला और रंगा गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। हर बार की तरह प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय दिखाई दे रहा है और मौके पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब तक बाढ़ नहीं आती और किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद नहीं होती, तब तक प्रशासन सिर्फ नींद में सोता रहता है। बाढ़ आने पर भी अधिकारी केवल औपचारिकता निभाने के लिए ही पहुंचते हैं। ग्रामीणों और किसानों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत प्रभाव से तटबंधों को मजबूत करे और बाढ़ की आशंका को देखते हुए पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि गांवों को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
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