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रोमानिया और पोलैंड से दो से तीन दिनों बाद मिल रही फ्लाइट
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साथियों के साथ यूक्रेन से वापस लौटा कालांवाली निवासी शिवम बांसल।
- फोटो : Sirsa
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सिरसा। यू्क्रेन के शहरों से निकलकर काफी संख्या में विद्यार्थी पोलैंड, हंगरी और रोमानिया देश में पहुंच रहे हैं। यूक्रेन से रोमानिया और पोलैंड में पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को दो से तीन दिन का समय लगा रहा है। जबकि इसके बाद दूसरे देशों में पहुंच रहे विद्यार्थियों को दो से तीन दिन बाद फ्लाइट मिल रही है। वहीं यूक्रेन के खारकीव शहर में फंसे विद्यार्थियों तीन दिन से खाना तक नहीं मिल पाया। विद्यार्थी पानी पीकर ही गुजारा करने को मजबूर हो रहे हैं।
वहीं शनिवार को भी स्वदेश में चार विद्यार्थी वापस लौटे है। इनमें से कई विद्यार्थी गुरुग्राम तो कई विद्यार्थी अभी घर पहुंच चुके हैं। हालांकि खारकीव में भी अभी सिरसा के नौ विद्यार्थी फंसे हुए है। जिसके कारण उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है। हालांकि खारकीव से विद्यार्थियों को निकालने के लिए बसें पहुंच रही हैं। लेकिन स्थिति खराब होने और बमबारी के कारण बस चालकों की ओर से भी विद्यार्थियों को सही तरीके से निकालने के लिए अलग-अलग स्थानों पर रोका जा रहा है। गोलीबारी होने और बमबारी न हो इसके कारण मुख्य मार्ग को छोड़ ग्रामीण क्षेत्रों से बसों को निकाला जा रहा है।
लवीब स्टेशन पर 15 घंटे करना पड़ता इंतजार : मनीष
शहर निवासी जितेंद्र ने बताया कि उसका बेटा मनीष कुमार पोलैंड से अब वापस लौट रहा है। दिल्ली से वह सिरसा आ रहा है। वह कीव से लवीब शहर में पहुंचा था। इस दौरान भीड़ अधिक होने के कारण उसे 15 घंटे तक रेलवे स्टेशन पर ही इंतजार करना पड़ा था। जिसके बाद वह पोलैंड पर पहुंचा है। पोलैंड में एंट्री करने के लिए उन्हें काफी समय तक इंतजार करना पड़ा था। पोलैंड में पहुंचने के बाद उसे वहां से दिल्ली के लिए दो दिन बाद फ्लाइट मिल पाई है। अब वह वापस घर आ रहा है। जिससे उनकी चिंता भी खत्म हो चुकी है।
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कालांवाली निवासी शिवम बांसल भी लौटा वापस
वहीं कालांवाली निवासी आत्माराम का बेटा शिवम बंसल भी वतन वापसी कर चुका है। कीव में पढ़ाई करने के लिया गया था। एक मार्च को वह कीव से निकले थे और लवीब में पहुंचे थे। इसके बाद वह बस में सवार होकर वह बस में रोमानिया में पहुंचे था। इस दौरान उन्होंने कई तरह की परेशानी भी उठानी पड़ी थी। वहीं रानियां निवासी मानसी भी यूक्रेन से लौट चुकी है।
गांव से बस में सवार होकर जा रहे है लवीब
वहीं गुरुनानक नगर निवासी बिमला का बेटा वैभव अभी भी खारकीव शहर के साथ लगते गांव पिसोचीन में फंसा हुआ है। खारकीव खाली करवाने बाद उन्हें 12 किलोमीटर दूर गांव में भेज दिया गया। यह सफर उन्हें पैदल ही तय करना पड़ा। अब वह वहां से बस में सवार होकर लवीब की तरफ जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही वह वहां से सुरक्षित दूसरे देश में पहुंच जाए। भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दो से तीन दिनों से उन्होंने कुछ भी नहीं खाया। स्थिति अभी वहां पर खराब बता रहे है। जिसके कारण चिंता भी बढ़ती जा रही है।
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वहीं शनिवार को भी स्वदेश में चार विद्यार्थी वापस लौटे है। इनमें से कई विद्यार्थी गुरुग्राम तो कई विद्यार्थी अभी घर पहुंच चुके हैं। हालांकि खारकीव में भी अभी सिरसा के नौ विद्यार्थी फंसे हुए है। जिसके कारण उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है। हालांकि खारकीव से विद्यार्थियों को निकालने के लिए बसें पहुंच रही हैं। लेकिन स्थिति खराब होने और बमबारी के कारण बस चालकों की ओर से भी विद्यार्थियों को सही तरीके से निकालने के लिए अलग-अलग स्थानों पर रोका जा रहा है। गोलीबारी होने और बमबारी न हो इसके कारण मुख्य मार्ग को छोड़ ग्रामीण क्षेत्रों से बसों को निकाला जा रहा है।
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लवीब स्टेशन पर 15 घंटे करना पड़ता इंतजार : मनीष
शहर निवासी जितेंद्र ने बताया कि उसका बेटा मनीष कुमार पोलैंड से अब वापस लौट रहा है। दिल्ली से वह सिरसा आ रहा है। वह कीव से लवीब शहर में पहुंचा था। इस दौरान भीड़ अधिक होने के कारण उसे 15 घंटे तक रेलवे स्टेशन पर ही इंतजार करना पड़ा था। जिसके बाद वह पोलैंड पर पहुंचा है। पोलैंड में एंट्री करने के लिए उन्हें काफी समय तक इंतजार करना पड़ा था। पोलैंड में पहुंचने के बाद उसे वहां से दिल्ली के लिए दो दिन बाद फ्लाइट मिल पाई है। अब वह वापस घर आ रहा है। जिससे उनकी चिंता भी खत्म हो चुकी है।
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कालांवाली निवासी शिवम बांसल भी लौटा वापस
वहीं कालांवाली निवासी आत्माराम का बेटा शिवम बंसल भी वतन वापसी कर चुका है। कीव में पढ़ाई करने के लिया गया था। एक मार्च को वह कीव से निकले थे और लवीब में पहुंचे थे। इसके बाद वह बस में सवार होकर वह बस में रोमानिया में पहुंचे था। इस दौरान उन्होंने कई तरह की परेशानी भी उठानी पड़ी थी। वहीं रानियां निवासी मानसी भी यूक्रेन से लौट चुकी है।
गांव से बस में सवार होकर जा रहे है लवीब
वहीं गुरुनानक नगर निवासी बिमला का बेटा वैभव अभी भी खारकीव शहर के साथ लगते गांव पिसोचीन में फंसा हुआ है। खारकीव खाली करवाने बाद उन्हें 12 किलोमीटर दूर गांव में भेज दिया गया। यह सफर उन्हें पैदल ही तय करना पड़ा। अब वह वहां से बस में सवार होकर लवीब की तरफ जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही वह वहां से सुरक्षित दूसरे देश में पहुंच जाए। भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दो से तीन दिनों से उन्होंने कुछ भी नहीं खाया। स्थिति अभी वहां पर खराब बता रहे है। जिसके कारण चिंता भी बढ़ती जा रही है।