{"_id":"0c2703bfe8452309d4eed988d0c6d8eb","slug":"game-the-game-became-a-death-trap-swing","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेल-खेल में झूला बना मौत का फंदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेल-खेल में झूला बना मौत का फंदा
sirsa
Updated Tue, 24 Jun 2014 11:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झूला झूलने की हसरत पूरी करने के लिए छत के गाडर में डाली गई रस्सी सोमवार को एक मासूम की मौत का फंदा बन गई। थेहड़ मोहल्ला की गली मोचियावाली निवासी परिजन 11 वर्षीय मोनांक को अस्पताल लेकर गए, लेकिन उसकी जान नहीं बस सकी। घटना के वक्त घर पर उसकी 9 वर्षीय बहन ही थी। उसकी मां पड़ोस में निधन पर शोक व्यक्त करने गई थी, जबकि पिता काम पर गए थे। शव का पोस्टमार्टम मंगलवार दोपहर सामान्य अस्पताल में किया गया।
विज्ञापन
मोचियावाली गली निवासी रोहताश एमआर है। उसका 11 वर्षीय बेटा मोनांक कक्षा सातवीं में एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ता था। नौ वर्षीय बेटी बार्बी भी भाई के साथ स्कूल में है। कुछ दिन पहले पड़ोस में निहाल चंद नामक व्यक्ति का निधन हो गया था। रोहताश की पत्नी रेणु सोमवार करीब पांच बजे मोनांक और बार्बी को स्कूल से मिला छुट्टियों का होमवर्क करने की कहकर पड़ोसी के घर शोक जताने के लिए चली गई।
विज्ञापन
पीछे से मोनांक ने छोटी बहन बार्बी को झूला झूलने के बारे में पूछा। दोनों ने कमरे की छत पर लगे गाडर पर रस्सी से झूला डालने की योजना बनाई। वह कुर्सी पर चढ़ा और चारपाई में प्रयोग होने वाली रस्सी गाडर में फंसा कर गांठ लगाने लगा तो अचानक कुर्सी नीचे गिर गई। इससे रस्सी मोनांक के गले में फंदे की भांति फंस गई। कुछ देर बाद दादी खजानी देवी घर पहुंची तो मोनांक फंदे पर लटका हुआ मिला।
विज्ञापन
उसने शोर मचाया तो शोक जताने गई मां घर लौटी और बेटे के गले से रस्सी निकाली। परिजन उसे तुरंत निजी अस्पताल में ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर सब्जी मंडी चौकी प्रभारी देसराज मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल ले जाया गया। मंगलवार दोपहर को शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद गमगीन माहौल में मृतक मोनांक का उसे पिता ने अंतिम संस्कार किया।
नानी मैं नहीं जाऊंगा
मोनांक की मौत से नानी प्र्रेेमलता का विलाप से बुरा हाल हो गया है। बरनाला रोड निवासी प्रेम लता ने बताया कि सुबह रोहताश मोनांक को ननिहाल में छोड़कर कोर्ट में किसी काम से गया था। मोनांक ने नानी से कहा कि मैं गर्मी की छुट्टियां पूरी होने तक ननिहाल में रहूंगा। दोपहर को करीब एक बजे रोहताश आया और मोनांक को अपने साथ वापस घर ले गया। मोनांक को उसकी नानी घर नहीं ले जाने देना चाहती थी, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।
किसी ने हिम्मत दिखाई होती तो बच जाता मेेरा लाल
कोख उजड़ने की असहनीय पीड़ा झेल रही मोनांक की मां रेणु बाला का कहना है कि उसकी वृद्ध सास खजानी देवी ने जब मोनांक को देखा तो उसकी सांस चल रही थी। दादी ने शोर मचाया और पड़ोस के कुछ लोग भी वहां पहुंचे, लेकिन किसी ने उसके बेटे के गले से रस्सी नहीं निकाली। सब तमाशबीनों की भांति खडे़ होकर तड़प रे उसके लाल को देखते रहे। किसी ने हिम्मत दिखाई होती तो उसका लाल बच जाता।
पढ़ाई में अव्वल था मोनांक
मौहल्लेवालों का कहना है कि मोनांक बहुत होनाहर बच्चा था। उसकी बातें दिल को छू जाती थी। उसे पढ़ाने वाले शिक्षकों का कहना है कि मोनांक पढ़ाई में काफी अच्छा था और हर परीक्षा में उसके बेहतरीन अंक आते थे। हाल ही में संपन्न हुई परीक्षा में मोनांक 80 प्रतिशत अंकों से पास हुआ था।
कोट
मृतक के पिता रोहताश के बयानों के आधार पर पुलिस ने 174 सीआरपीसी के तहत इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई की है। जिस रस्सी से मोनांक की जान गई उसे सील कर दिया गया है।
- देसराज, जांच अधिकारी