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तिलक लगाकर किया पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों का स्वागत, पहले दिन डिजिटल बोर्ड पर की पढ़ाई
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सिरसा। राजकीय स्कूलों में सोमवार को पहली से तीसरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को तिलक लगाकर स्वागत किया गया। पहले दिन कक्षाओं में अपने दोस्तों से मिल विद्यार्थी खुश नजर आए। पुस्तकें ना होने पर विद्यार्थियों को डिजिटल बोर्ड पर पढ़ाया गया। पहले दिन रोस्टर नियम के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े स्कूलों में आंकड़ा 80 फीसदी तो शहर में स्थित स्कूलों का आंकड़ा 20 फीसदी रहा। वहीं स्कूलों में पहली से 12वीं कक्षा में अधिक संख्या वाले स्कूलों को खुले में कक्षाएं लगानी पड़ रही है।
प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को करीब डेढ़ साल बाद स्कूल बुुलाया गया है। इतना समय स्कूल से दूर रहे बच्चे पहले दिन कक्षाओं में काफी खुश नजर आए। सुबह प्रवेश के दौरान बच्चों की थर्मल स्कैनिंग कर तापमान जांचा गया। स्कूल में प्रवेश के दौरान अध्यापकों ने तिलक लगाकर बच्चों का स्वागत किया। इतने लंबे समय बाद बच्चे अपने दोस्तों व अध्यापकों से मिलकर खुश नजर आए। इतने लंबे समय बाद स्कूल आए पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों का स्कूल में मन लगाने व पढ़ाई रोचक ढंग से करवाने के लिए डिजिटल बोर्ड का प्रयोग किया गया।
कमरों की कमी व विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने पर खुले में लग रही है कक्षाएं
कोविड के दौरान अधिकतर विद्यार्थियों ने प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर राजकीय स्कूलों में दाखिला ले लिया था। अब राजकीय स्कूलों में 20 सितंबर से पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी ऑफलाइन कक्षाएं लगाने स्कूल आ रहे है। जिसके कारण जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक थी उनमें कमरों की कमी हो रही है। जिसके कारण विद्यार्थियों की कक्षाएं खुले में या फिर बरामदे में लगाई जा रही है। शहर के खैरपुर स्थिति राजकीय विद्यालय की प्रिंसिपल कुलदीप कौर ने जिला शिक्षा विभाग को पत्र लिख दो चरणों में कक्षाएं लगाने की मांग की है।
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गांवों के स्कूलों में 80 फीसदी तो शहरी में ना के बराबर
ऑफलाइन कक्षाओं के पहले दिन पहली से तीसरी कक्षा के बच्चे स्कूल पहुंचे। जिसमें गांवों में स्थित प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या रोस्टर के अनुसार 80 फीसदी व शहरी क्षेत्र में स्थापित स्कूलों में यह संख्या केवल 20 फीसदी ही रही।
बच्चों के पास नहीं है वर्कबुक, कॉपी में कर रहे हैं पढ़ाई
जिला शिक्षा विभाग की ओर से पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों को पढ़ने के लिए वर्कबुक दी जाती है। इस बार कोरोना के चलते विभाग ने बच्चों को पुस्तकें नहीं दी है। किताबें ना मिलने से सबसे अधिक नुकसान पहली से तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों को हो रहा है। वर्कबुक ना होने के कारण उन्हें पढ़ने में परेेशानी आ रही है।
बिना नेट के टैब पड़े हैं बंद
जिले के स्कूल हेड को ऑनलाइन कार्य करने के लिए मिले टैब में एप डाउनलोड नहीं हो रही है। जिसके कारण अध्यापकों को अब भी ऑनलाइन कार्य मोबाइल से करने पड़ रहे हैं। स्कूल हेड का कहना है कि एप डाउनलोड नहीं हो रही है। जिसके कारण बच्चों की हाजिरी व तापमान का रिकॉर्ड अब भी मोबाइल फोन से अपलोड करना पड़ता है। टैब चलाने के लिए विभाग की तरफ से नेट सुविधा भी उपलब्ध नहीं करवाई गई है।
पहली से तीसरी कक्षा के विद्यार्थी ऑफलाइन कक्षाएं लगाने के लिए स्कूल आ रहे हैं। बच्चों को डिजिटल बोर्ड के माध्यम से रोचक ढंग से पढ़ाई करवाई जा रही है।
-आत्म प्रकाश मेहरा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सिरसा।
स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने से कमरों की कमी सामने आ रही है। जिसके कारण कक्षाएं बाहर खुले में लगाई जा रही है। निदेशालय को इस बारे में पत्र भेजा गया है। साथ ही स्कूलों द्वारा दो शिफ्टों में कक्षाएं लगाने पर विचार किया जा रहा है।
-संत कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी सिरसा।
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प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को करीब डेढ़ साल बाद स्कूल बुुलाया गया है। इतना समय स्कूल से दूर रहे बच्चे पहले दिन कक्षाओं में काफी खुश नजर आए। सुबह प्रवेश के दौरान बच्चों की थर्मल स्कैनिंग कर तापमान जांचा गया। स्कूल में प्रवेश के दौरान अध्यापकों ने तिलक लगाकर बच्चों का स्वागत किया। इतने लंबे समय बाद बच्चे अपने दोस्तों व अध्यापकों से मिलकर खुश नजर आए। इतने लंबे समय बाद स्कूल आए पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों का स्कूल में मन लगाने व पढ़ाई रोचक ढंग से करवाने के लिए डिजिटल बोर्ड का प्रयोग किया गया।
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कमरों की कमी व विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने पर खुले में लग रही है कक्षाएं
कोविड के दौरान अधिकतर विद्यार्थियों ने प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर राजकीय स्कूलों में दाखिला ले लिया था। अब राजकीय स्कूलों में 20 सितंबर से पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी ऑफलाइन कक्षाएं लगाने स्कूल आ रहे है। जिसके कारण जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक थी उनमें कमरों की कमी हो रही है। जिसके कारण विद्यार्थियों की कक्षाएं खुले में या फिर बरामदे में लगाई जा रही है। शहर के खैरपुर स्थिति राजकीय विद्यालय की प्रिंसिपल कुलदीप कौर ने जिला शिक्षा विभाग को पत्र लिख दो चरणों में कक्षाएं लगाने की मांग की है।
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गांवों के स्कूलों में 80 फीसदी तो शहरी में ना के बराबर
ऑफलाइन कक्षाओं के पहले दिन पहली से तीसरी कक्षा के बच्चे स्कूल पहुंचे। जिसमें गांवों में स्थित प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या रोस्टर के अनुसार 80 फीसदी व शहरी क्षेत्र में स्थापित स्कूलों में यह संख्या केवल 20 फीसदी ही रही।
बच्चों के पास नहीं है वर्कबुक, कॉपी में कर रहे हैं पढ़ाई
जिला शिक्षा विभाग की ओर से पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों को पढ़ने के लिए वर्कबुक दी जाती है। इस बार कोरोना के चलते विभाग ने बच्चों को पुस्तकें नहीं दी है। किताबें ना मिलने से सबसे अधिक नुकसान पहली से तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों को हो रहा है। वर्कबुक ना होने के कारण उन्हें पढ़ने में परेेशानी आ रही है।
बिना नेट के टैब पड़े हैं बंद
जिले के स्कूल हेड को ऑनलाइन कार्य करने के लिए मिले टैब में एप डाउनलोड नहीं हो रही है। जिसके कारण अध्यापकों को अब भी ऑनलाइन कार्य मोबाइल से करने पड़ रहे हैं। स्कूल हेड का कहना है कि एप डाउनलोड नहीं हो रही है। जिसके कारण बच्चों की हाजिरी व तापमान का रिकॉर्ड अब भी मोबाइल फोन से अपलोड करना पड़ता है। टैब चलाने के लिए विभाग की तरफ से नेट सुविधा भी उपलब्ध नहीं करवाई गई है।
पहली से तीसरी कक्षा के विद्यार्थी ऑफलाइन कक्षाएं लगाने के लिए स्कूल आ रहे हैं। बच्चों को डिजिटल बोर्ड के माध्यम से रोचक ढंग से पढ़ाई करवाई जा रही है।
-आत्म प्रकाश मेहरा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सिरसा।
स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने से कमरों की कमी सामने आ रही है। जिसके कारण कक्षाएं बाहर खुले में लगाई जा रही है। निदेशालय को इस बारे में पत्र भेजा गया है। साथ ही स्कूलों द्वारा दो शिफ्टों में कक्षाएं लगाने पर विचार किया जा रहा है।
-संत कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी सिरसा।