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Sirsa News: सूखी नहर में लेटकर किसानों ने जताई नाराजगी
सार
डबवाली में चौटाला माइनर के किसान सूखी नहर में लेटकर पानी की कमी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशासन के दावों के बावजूद किसानों को सिंचाई और पीने का पानी नहीं मिल रहा है। आंदोलन ने क्षेत्र में जल संकट की गंभीरता उजागर की है।
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चोटाला। नहर के अंदर लेटकर विरोध जाते हुए ग्रामीण। संवाद
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डबवाली। चौटाला माइनर के किसानों का धरना निरंतर जारी है। प्रशासन की ओर से समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया है। ऐसे में वीरवार को टेल के अंतिम छोर पर सूखी पड़ी नहर में लेटकर किसानों ने अपना प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारी अब भी सब ठीक है की रट लगाए बैठे हैं।
प्रशासन दावा कर रहा है कि चौटाला माइनर में एक फुट पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। किसान ने कहा कि खेती तो दूर, हमें तो पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। दरअसल, किसान कभी सूखी नहर में दौड़कर तो कभी लेटकर अपना विरोध जता रहा है।
किसान प्रशासन की नींद खोलने के लिए वह हर संभव प्रयास कर रहे हैं, ताकि समस्या का स्थाई समाधान हो। धरनास्थल पर उपस्थित किसान दयाराम उलाणिया, सुधीर सहारण, भंवरलाल, अजय सहारण, अनिल जाखड़, राधेश्याम, कुलदीप, अनिल पुनिया, चानणराम और कपूर सिंह ने बताया कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो किसान कोई ठोस और निर्णायक कदम उठाने को विवश होंगे।
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इसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। वहीं गांववासियों व किसानों का कहना है कि नहर वर्षों से उपेक्षित रही है और मरम्मत अथवा सफाई के नाम पर केवल कागजी काम ही हुआ है। यह आंदोलन न सिर्फ चौटाला माइनर, बल्कि पूरे क्षेत्र में पानी की व्यवस्था की बदहाली को उजागर करता है।
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प्रशासन दावा कर रहा है कि चौटाला माइनर में एक फुट पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। किसान ने कहा कि खेती तो दूर, हमें तो पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। दरअसल, किसान कभी सूखी नहर में दौड़कर तो कभी लेटकर अपना विरोध जता रहा है।
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किसान प्रशासन की नींद खोलने के लिए वह हर संभव प्रयास कर रहे हैं, ताकि समस्या का स्थाई समाधान हो। धरनास्थल पर उपस्थित किसान दयाराम उलाणिया, सुधीर सहारण, भंवरलाल, अजय सहारण, अनिल जाखड़, राधेश्याम, कुलदीप, अनिल पुनिया, चानणराम और कपूर सिंह ने बताया कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो किसान कोई ठोस और निर्णायक कदम उठाने को विवश होंगे।
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इसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। वहीं गांववासियों व किसानों का कहना है कि नहर वर्षों से उपेक्षित रही है और मरम्मत अथवा सफाई के नाम पर केवल कागजी काम ही हुआ है। यह आंदोलन न सिर्फ चौटाला माइनर, बल्कि पूरे क्षेत्र में पानी की व्यवस्था की बदहाली को उजागर करता है।