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मुआवजा के लिए किसानों ने की भूख हड़ताल

Wed, 17 Feb 2016 01:39 AM IST
ब्ययूराो/अमर उजाला /सिरसा
ब्ययूराो/अमर उजाला /सिरसा Updated Wed, 17 Feb 2016 01:39 AM IST
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सफेद मक्खी से खराब हुई कॉटन की फसल के मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। मंगलवार को पहले दिन कर्ज तले दबे छह किसानों ने सात घंटे भूख हड़ताल रखी। लघु सचिवालय में जुटे किसानों ने पीएम नरेंद्र मोदी तथा सीएम मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने सीएम के नाम 11 सूत्री मांग पत्र सौंपा।

राष्ट्रीय किसान संगठन के बैनर तले किसान लघु सचिवालय में एसडीएम कार्यालय के सामने जुटे। किसान ट्रॉलियों, जीपों में भरकर पहुंचे। सुबह 10 बजे धरना शुरू कर दिया। कर्ज तले दबे किसान मलकीत सिंह खालसा पन्नीवाला मोरिकां, देसूजोधा के किसान निर्मल सिंह, गुरमीत सिंह, कुलदीप सिंह, अलीकां के किसान गुरमीत सिंह तथा मटदादू के किसान गुरमेल सिंह भूख हड़ताल पर बैठ गए। देखते ही देखते काफी संख्या में किसान जमा हो गए। किसानों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दिया। मलकीत सिंह खालसा ने कहा कि वह छोटा किसान है। उसके पास महज चार एकड़ भूमि है। इस बार सात एकड़ ठेके पर ली थी। महज 22 मन नरमा मिला है। शेष फसल सफेद मक्खी की भेंट चढ़ गई। करीब दो से ढाई लाख रुपये का कर्जा उसके सिर चढ़ गया है। भूख हड़ताल पर बैठे दूसरे किसान गुरमेल सिंह ने कहा कि उसने 20 एकड़ में नरमा तथा 10 एकड़ में ग्वार लगाई थी। ठेके पर 15 एकड़ भूमि लेकर नरमा बिजाई किया था। सफेद मक्खी के चलते खराब हुई फसल के कारण करीब 21 लाख रुपये का कर्ज उसके सिर चढ़ गया है। मटदादू के किसान गुरमेल सिंह ने बताया कि वह छोटा किसान है। उसके पास महज पांच एकड़ जमीन है। इतनी ही जमीन उसने ठेका पर ली थी। ग्वपार तथा नरमा की फसल चौपट हो गई। करीब पांच लाख का कर्जदार हो गया है। गांव देसूजोधा के कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह ने बताया कि करीब 90 फीसदी फसल खराब हो गई है। लाखों रुपये कर्जा चढ़ गया है। सरकार से उम्मीद थी, उसने कुछ भी नहीं दिया। भूख हड़ताल पर बैठने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है। अलीकां के किसान गुरमीत सिंह ने बताया कि सफेद मक्खी की वजह से वह भी कर्जाऊ हो गया है।

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किसान नेता परमजीत माखा, जसवीर सिंह भाटी ने कहा कि वे कई बार स्थानीय तथा तीन बार जिला स्तर पर प्रदर्शन कर चुके हैं। सरकार ने आज तक सुध नहीं ली। मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। अगर भूख हड़ताल पर बैठे किसान को कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेवारी सरकार की होगी। जब तक सरकार मुआवजा नहीं देती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

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किसानों को समर्थन देने के लिए डॉ. केवी सिंह भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस नेता की हैसियत से नहीं बल्कि किसान तथा किसान के बेटे के रूप में यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कृषि मंत्री ओपी धनखड़ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दो-ढाई साल पहले धनखड़ स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने के लिए दिल्ली में अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन कर रहे थे। आज वे सत्ता में होते हुए भी रिपोर्ट लागू नहीं कर रहे। 15 सितंबर को मुआवजा देने, फिर चुनाव के बाद मुआवजा देने की बात करने वाले धनखड़ आज चुप्पी साधे हुए हैं।

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इन 11 मांगों के लिए संघर्ष

1. उचित मुआवजा कम से कम 30 हजार रुपये दिया जाए।

2. स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए।

3. सभी बैंकों के सभी प्रकार के कर्जे माफ किए जाएं।

4. बिजली बिल माफ किए जाएं।

5. अवारा पशुओं से होने वाले नुकसान से किसानों का बचाव किया जाए। नुकसान का मुआवजा दिया जाए।

6. रबि फसलों की सिंचाई के लिए पूरा नहरी पानी व लगातार दस घंटे बिजली दी जाए।

7. मनरेगा को कृषि कार्यों के साथ सीधा जोड़ा जाए।

8. गेहूं तथा सरसों में आ रहे रोगों के लिए कीटनाशक व फंगीसाईड मुफ्त दिए जाएं।

9. किसानों को मुआवजा स्पैशल गिरदावरी के अनुसार दिया जाए। किसी प्रकार की कांट छांट न की जाए।

10. सरकार के वायदे अनुसार खेती किसानों का बजट अलग से बनाया जाए।

11. रबी 2016 में बारिश न होने के कारण फसल गेहूं, सरसों व चना आदि की फसल ना होने के कारण सूखा क्षेत्र घोषित करके मुआवजा दिया जाए।

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