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ऐलनाबाद उपचुनाव : जनादेश तय करेगा सत्ता में भागीदारी या विपक्ष की परंपरा
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सिरसा। ऐलनाबाद उपचुनाव का परिणाम मंगलवार को आ जाएगा। परिणाम के साथ ही ये भी तय हो जाएगा कि ऐलनाबाद विधानसभा की जनता हमेशा की तरह विपक्ष को चुनने की परंपरा जारी रखेगी या इस बार पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए सत्ता के साथ जाने का मन बनाएगी। एक तरफ कृषि कानूनों को लेकर सरकार का हर तरफ विरोध हुआ लेकिन दूसरी तरफ सरकार के विधायकों, मंत्रियों और सीएम का वादा रहा कि सत्ता में भागीदारी मिली तो ऐलनाबाद में विकास के नये रास्तेेेे खुलेंगे और समस्याओं का भी समाधान होगा। अब तक के 55 वर्ष के राजनीतिक सफरनामे में ऐलनाबाद विधानसभा की जनता ने केवल एक बार सत्ता में सीधी भागीदारी को चुना है जबकि हर बार विपक्ष में रहने का फैसला किया।
ऐलनाबाद उपचुनाव में मतदान हो चुका है और मंगलवार को परिणाम आएगा। इसके लिए सीडीएलयू के आंबेडकर भवन में मतगणना होगी। इस बार वैसे तो 19 प्रत्याशी मैदान में थे लेकिन मुख्य मुकाबला इनेलो प्रत्याशी अभय सिंह चौटाला, भाजपा-जजपा के साझे प्रत्याशी गोबिंद कांडा और कांग्रेस प्रत्याशी पवन बैनीवाल के बीच ही रहा। अभय सिंह चौटाला लगातार तीन बार से ऐलनाबाद के विधायक चुने जाते रहे हैं। प्रत्याशी गोबिंद कांडा हाल ही में भाजपा में शामिल हुए और उन्हें पार्टी ने मौका देकर प्रत्याशी बनाया है। इसी प्रकार कांग्रेस ने प्रबल दावेदार पूर्व विधायक भरत सिंह बैनीवाल की टिकट काटकर हाल ही में बीजेपी छोड़ पार्टी में शामिल हुए पवन बैनीवाल पर विश्वास जताया और उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया। अब मंगलवार को तय हो जाएगा कि जनता ने किसे अपना आशीर्वाद दिया है।
इस बार भी कांटे की टक्कर रहने की उम्मीद
ऐलनाबाद का सियासी सफर रोचक रहा है। 55 वर्ष के सियासी सफर के दौरान एक-दो बार को छोड़कर ऐलनाबाद विधानसभा की जनता ने विपक्ष के नेता को ही अपना प्रतिनिधि चुना है। शायद यही कारण भी है कि ये एरिया विकास से दूर ही रहा। यहां के लोग सेम, सिंचाई और शिक्षा के क्षेत्र में समस्याएं झेल रहा है। खास बात ये है कि अभी तक भाजपा एक बार भी ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के लोगों में जगह नहीं बना पाई। वर्ष 1967 से लेकर अब तक ऐलनाबाद का 55 वर्ष का राजनीतिक सफर रहा है। इस दौरान वर्ष 1987 और 1991 को छोड़कर कभी भी ऐलनाबाद विधानसभा को सत्ता में भागीदारी नहीं मिली। वर्ष 1987 में ऐलनाबाद के विधायक निर्वाचित हुए भागीराम तत्कालीन देवीलाल सरकार में राज्य मंत्री बने थे। हालांकि 1991 में ऐलनाबाद से कांग्रेस की टिकट पर विधायक चुने गए मनीराम केहरवाला हरको बैंक के चेयरमैन रहे थे। इसी विधानसभा क्षेत्र से 1970 और 2009 में चुनकर विधायक बनने वाले ओमप्रकाश चौटाला पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने, लेकिन जब-जब वे ऐलनाबाद से विधायक चुने गए, तब-तब वे विपक्ष में ही रहे।
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सीट पर चौटाला गांव का रहा हमेशा दबदबा
ऐलनाबाद विधानसभा सीट पर ज्यादातर चौटाला गांव का ही दबदबा रहा है। 1970 और 2009 में ओमप्रकाश चौटाला यहां से विधायक रहे। 1967 में प्रताप सिंह चौटाला विधायक बने। वर्ष 1972 में बृजलाल गोदारा को जनता ने प्रतिनिधि चुना। इसके अलावा वर्ष 2010, 2014 और 2019 में इनेलो के अभय सिंह चौटाला यहां से विधायक रहे हैं। इस बार भी इनेलो के अभय सिंह चौटाला ही मैदान में हैं।
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ऐलनाबाद उपचुनाव में मतदान हो चुका है और मंगलवार को परिणाम आएगा। इसके लिए सीडीएलयू के आंबेडकर भवन में मतगणना होगी। इस बार वैसे तो 19 प्रत्याशी मैदान में थे लेकिन मुख्य मुकाबला इनेलो प्रत्याशी अभय सिंह चौटाला, भाजपा-जजपा के साझे प्रत्याशी गोबिंद कांडा और कांग्रेस प्रत्याशी पवन बैनीवाल के बीच ही रहा। अभय सिंह चौटाला लगातार तीन बार से ऐलनाबाद के विधायक चुने जाते रहे हैं। प्रत्याशी गोबिंद कांडा हाल ही में भाजपा में शामिल हुए और उन्हें पार्टी ने मौका देकर प्रत्याशी बनाया है। इसी प्रकार कांग्रेस ने प्रबल दावेदार पूर्व विधायक भरत सिंह बैनीवाल की टिकट काटकर हाल ही में बीजेपी छोड़ पार्टी में शामिल हुए पवन बैनीवाल पर विश्वास जताया और उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया। अब मंगलवार को तय हो जाएगा कि जनता ने किसे अपना आशीर्वाद दिया है।
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इस बार भी कांटे की टक्कर रहने की उम्मीद
ऐलनाबाद का सियासी सफर रोचक रहा है। 55 वर्ष के सियासी सफर के दौरान एक-दो बार को छोड़कर ऐलनाबाद विधानसभा की जनता ने विपक्ष के नेता को ही अपना प्रतिनिधि चुना है। शायद यही कारण भी है कि ये एरिया विकास से दूर ही रहा। यहां के लोग सेम, सिंचाई और शिक्षा के क्षेत्र में समस्याएं झेल रहा है। खास बात ये है कि अभी तक भाजपा एक बार भी ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के लोगों में जगह नहीं बना पाई। वर्ष 1967 से लेकर अब तक ऐलनाबाद का 55 वर्ष का राजनीतिक सफर रहा है। इस दौरान वर्ष 1987 और 1991 को छोड़कर कभी भी ऐलनाबाद विधानसभा को सत्ता में भागीदारी नहीं मिली। वर्ष 1987 में ऐलनाबाद के विधायक निर्वाचित हुए भागीराम तत्कालीन देवीलाल सरकार में राज्य मंत्री बने थे। हालांकि 1991 में ऐलनाबाद से कांग्रेस की टिकट पर विधायक चुने गए मनीराम केहरवाला हरको बैंक के चेयरमैन रहे थे। इसी विधानसभा क्षेत्र से 1970 और 2009 में चुनकर विधायक बनने वाले ओमप्रकाश चौटाला पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने, लेकिन जब-जब वे ऐलनाबाद से विधायक चुने गए, तब-तब वे विपक्ष में ही रहे।
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सीट पर चौटाला गांव का रहा हमेशा दबदबा
ऐलनाबाद विधानसभा सीट पर ज्यादातर चौटाला गांव का ही दबदबा रहा है। 1970 और 2009 में ओमप्रकाश चौटाला यहां से विधायक रहे। 1967 में प्रताप सिंह चौटाला विधायक बने। वर्ष 1972 में बृजलाल गोदारा को जनता ने प्रतिनिधि चुना। इसके अलावा वर्ष 2010, 2014 और 2019 में इनेलो के अभय सिंह चौटाला यहां से विधायक रहे हैं। इस बार भी इनेलो के अभय सिंह चौटाला ही मैदान में हैं।