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Sirsa News: कालांवाली के रामबाग में लगी इलेक्ट्रिक मशीन, बिजली व गैस तकनीक से होगा दाह संस्कार
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कालांवाली। शहर का रामबाग में अब इलेक्ट्रिक मशीन से दाह संस्कार होगा। इसके लिए नगर पालिका प्रशासन और रामबाग कमेटी ने तैयारियां पूर्ण कर ली है। रामबाग में दाह संस्कार के लिए लगाई गई इलेक्ट्रिक मशीन का सात फरवरी को ट्रायल लिया जाएगा। यह ट्रायल चंडीगढ़ की तकनीकी टीम के द्वारा लिया जाएगा। ट्रायल सफल होने के बाद इलेक्ट्रिक मशीन से दाह संस्कार शुरू होने पर लकड़ियों व समय की बचत होगी। इससे प्रदूषण से राहत मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
नगरपालिका प्रशासन के द्वारा रामबाग में लगभग 68 लाख रुपये की लागत से दाह संस्कार करने के लिए इलेक्ट्रिक मशीन लगाई गई है। दाह संस्कार मशीन बिजली से संचालित होगी। इसमें पावर कट बाधा पैदा नहीं कर सकेगा। मशीन में गैस का भी ऑप्शन होगा। पावर कट की स्थिति में गैस ऑप्शन से मशीन को संचालित किया जा सकेगा। इससे पहले भी रामबाग में एक भट्ठी लगी हुई है। इसमें दाह संस्कार के लिए लगभग 70 किलोग्राम लकड़ी खर्च होती है।
हर साल होते है 200 से 300 दाह संस्कार
कालांवाली में हर साल करीब 200 से 300 के बीच दाह संस्कार किए जाते हैं। परंपरागत तरीके से होने वाले दाह संस्कार पर करीब 3 से 4 क्विंटल लकड़ियां और कई तरह की सामग्री देने के बाद मुखाग्नि दी जाती है। लकड़ियों के जलने से काफी मात्रा में प्रदूषण होता है। इसके अलावा परंपरागत दाह संस्कार में लगभग 2 से 4 घंटे का समय लगता है। नई तकनीक की दाह संस्कार भट्टी कवर्ड एरिया में लगाई गई है। ऐसे में आंधी, बरसात आदि की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा। साथ में हर साल खर्च होने वाली लाखों रुपयों की लकड़ियों की बचत होगी। इलेक्ट्रिक मशीन में बिजली या गैस की लागत लकड़ियों के मुकाबले आधे से भी कम आएगी।
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रामबाग में दाह संस्कार के लिए लगाई गई इलेक्ट्रानिक मशीन लगभग एक माह में शुरू हो जाएगी। नई तकनीक से दाह संस्कार पर खर्च होने वाली लकड़ियों, समय आदि की बचत होगी। साथ में प्रदूषण कम होने से पर्यावरण सरंक्षण को भी बढ़ावा मिलेगी। - सुरेश सिंगला रंटी, प्रधान, रामबाग कमेटी, कालांवाली
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नगरपालिका प्रशासन के द्वारा रामबाग में लगभग 68 लाख रुपये की लागत से दाह संस्कार करने के लिए इलेक्ट्रिक मशीन लगाई गई है। दाह संस्कार मशीन बिजली से संचालित होगी। इसमें पावर कट बाधा पैदा नहीं कर सकेगा। मशीन में गैस का भी ऑप्शन होगा। पावर कट की स्थिति में गैस ऑप्शन से मशीन को संचालित किया जा सकेगा। इससे पहले भी रामबाग में एक भट्ठी लगी हुई है। इसमें दाह संस्कार के लिए लगभग 70 किलोग्राम लकड़ी खर्च होती है।
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हर साल होते है 200 से 300 दाह संस्कार
कालांवाली में हर साल करीब 200 से 300 के बीच दाह संस्कार किए जाते हैं। परंपरागत तरीके से होने वाले दाह संस्कार पर करीब 3 से 4 क्विंटल लकड़ियां और कई तरह की सामग्री देने के बाद मुखाग्नि दी जाती है। लकड़ियों के जलने से काफी मात्रा में प्रदूषण होता है। इसके अलावा परंपरागत दाह संस्कार में लगभग 2 से 4 घंटे का समय लगता है। नई तकनीक की दाह संस्कार भट्टी कवर्ड एरिया में लगाई गई है। ऐसे में आंधी, बरसात आदि की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा। साथ में हर साल खर्च होने वाली लाखों रुपयों की लकड़ियों की बचत होगी। इलेक्ट्रिक मशीन में बिजली या गैस की लागत लकड़ियों के मुकाबले आधे से भी कम आएगी।
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रामबाग में दाह संस्कार के लिए लगाई गई इलेक्ट्रानिक मशीन लगभग एक माह में शुरू हो जाएगी। नई तकनीक से दाह संस्कार पर खर्च होने वाली लकड़ियों, समय आदि की बचत होगी। साथ में प्रदूषण कम होने से पर्यावरण सरंक्षण को भी बढ़ावा मिलेगी। - सुरेश सिंगला रंटी, प्रधान, रामबाग कमेटी, कालांवाली