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Sirsa News: स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की पहचान करेगा शिक्षा विभाग, फिर करवाई जाएगी पढ़ाई
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राजकीय विद्यालय में कक्षा में पढ़ते विद्यार्थी। फाइल फोटो
- फोटो : Sirsa
सिरसा। सभी बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए शिक्षा विभाग ने योजना तैयार की है। अब आउट ऑफ स्कूल बच्चों को वापस लाया जाएगा और पढ़ाई शुरू करवाई जाएगी। इसके लिए विभाग ने सर्वे करवाने का फैसला लिया है। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से सर्वे किया जा रहा है। इसके लिए शिक्षा स्वयंसेवक की ड्यूटी लगाई गई है। अब तक यह कार्य शिक्षकों के माध्यम से ही किया जाता था।
शिक्षा स्वयंसेवक तीन सरकारी विभागों के अलावा सामाजिक संस्थाओं की मदद से सर्वे कार्य करेंगे। सत्र 2023-24 के सर्वे को लेकर परियोजना परिषद प्रदेश समन्वयक ने सभी जिलों में जिला परियोजना समन्वयक को लेकर पत्र भेजा है। आदेश में बताया गया है कि इस काम में पंचायती राज, महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, सामाजिक संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाएगा। परिषद ने सर्वे फॉर्मेट जारी कर दिया है। इसमें दिए कॉलम सर्वेयर को भरने हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सर्वे कार्य कराया जाना है। इसमें जो बच्चे स्कूल से दूर हैं या किसी वजह से स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे बच्चों की भी पहचान की जानी है, ताकि इनको भी शिक्षा दिलाई जा सके।
लक्ष्य पूरा करने के लिए एनजीओ को भी जोड़ा
शिक्षा विभाग हर साल ड्रॉप आउट बच्चों की पहचान कराता है। इसके बावजूद भी 100 प्रतिशत बच्चों को स्कूल लाने का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता। ऐसे में इस बार इसमें थोड़ा बदलाव किया गया है। इसमें एनजीओ को जोड़ा जा रहा है, जिससे इस कार्य में वॉलंटियर्स का सहयोग भी मिल सके। इसके साथ ही ब्लॉक रिसोर्स पर्सन, जिला समन्वयक स्काउट्स, एनएसएस के जिला समन्वयक को भी साथ जोड़ा गया है। इसमें शामिल सदस्य मोहल्लों में जाकर कम्यूनिटी से बातचीत करेंगे।
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अधिकारियों की तय की जिम्मेदारी
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्कूल से लेकर जिला स्तर तक ये सर्वे होना है। इसके लिए स्कूल से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय है। इसको प्रबंध पोर्टल बनाया गया। प्रबंध पोर्टल पर ही इससे संबंधित डाटा अपलोड किया जाना है। स्कूल मुखिया अपनी रिपोर्ट जिला समन्वयक के पास भेजेंगे। उनके यहां से कंपाइल रिपोर्ट हेडक्वार्टर भेजी जाएगी। ब्लॉक स्तर पर देखरेख का जिम्मा बीईओ को सौंपा गया है। पूरे जिले में ही विशेष फोकस रखा जाएगा। श्रेणी अनुसार कूड़ा ढो रहे बच्चे, गली में घूमने वाले, होमलेस, माइग्रेट बच्चों को पहचान सर्वे के माध्यम से की जाएगी।
जो मुख्यधारा शिक्षा से छूट चुके हैं या फिर स्कूल छोड़ चुके हैं, ऐसे बच्चों की पहचान विभाग द्वारा की जा रही है। इसके लिए सर्वे करवाया जा रहा है। यह सर्वे बीआरसी, एबीआरसी कर रहे हैं। - बूटा सिंह, जिला परियोजना अधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान, सिरसा।
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शिक्षा स्वयंसेवक तीन सरकारी विभागों के अलावा सामाजिक संस्थाओं की मदद से सर्वे कार्य करेंगे। सत्र 2023-24 के सर्वे को लेकर परियोजना परिषद प्रदेश समन्वयक ने सभी जिलों में जिला परियोजना समन्वयक को लेकर पत्र भेजा है। आदेश में बताया गया है कि इस काम में पंचायती राज, महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, सामाजिक संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाएगा। परिषद ने सर्वे फॉर्मेट जारी कर दिया है। इसमें दिए कॉलम सर्वेयर को भरने हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सर्वे कार्य कराया जाना है। इसमें जो बच्चे स्कूल से दूर हैं या किसी वजह से स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे बच्चों की भी पहचान की जानी है, ताकि इनको भी शिक्षा दिलाई जा सके।
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लक्ष्य पूरा करने के लिए एनजीओ को भी जोड़ा
शिक्षा विभाग हर साल ड्रॉप आउट बच्चों की पहचान कराता है। इसके बावजूद भी 100 प्रतिशत बच्चों को स्कूल लाने का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता। ऐसे में इस बार इसमें थोड़ा बदलाव किया गया है। इसमें एनजीओ को जोड़ा जा रहा है, जिससे इस कार्य में वॉलंटियर्स का सहयोग भी मिल सके। इसके साथ ही ब्लॉक रिसोर्स पर्सन, जिला समन्वयक स्काउट्स, एनएसएस के जिला समन्वयक को भी साथ जोड़ा गया है। इसमें शामिल सदस्य मोहल्लों में जाकर कम्यूनिटी से बातचीत करेंगे।
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अधिकारियों की तय की जिम्मेदारी
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्कूल से लेकर जिला स्तर तक ये सर्वे होना है। इसके लिए स्कूल से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय है। इसको प्रबंध पोर्टल बनाया गया। प्रबंध पोर्टल पर ही इससे संबंधित डाटा अपलोड किया जाना है। स्कूल मुखिया अपनी रिपोर्ट जिला समन्वयक के पास भेजेंगे। उनके यहां से कंपाइल रिपोर्ट हेडक्वार्टर भेजी जाएगी। ब्लॉक स्तर पर देखरेख का जिम्मा बीईओ को सौंपा गया है। पूरे जिले में ही विशेष फोकस रखा जाएगा। श्रेणी अनुसार कूड़ा ढो रहे बच्चे, गली में घूमने वाले, होमलेस, माइग्रेट बच्चों को पहचान सर्वे के माध्यम से की जाएगी।
जो मुख्यधारा शिक्षा से छूट चुके हैं या फिर स्कूल छोड़ चुके हैं, ऐसे बच्चों की पहचान विभाग द्वारा की जा रही है। इसके लिए सर्वे करवाया जा रहा है। यह सर्वे बीआरसी, एबीआरसी कर रहे हैं। - बूटा सिंह, जिला परियोजना अधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान, सिरसा।