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Sirsa News: बच्चों से जुड़ाव के लिए शिक्षा विभाग शिक्षकों को देगा ट्रेनिंग
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सिरसा। बच्चों में मानसिक तनाव और अवसाद को देखते हुए उसे दूर करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से नई पहल शुरू की गई। इस पहल में जिले के शिक्षकों को 26 से 28 नवंबर तक मनोवैज्ञानिक की तर्ज पर विद्यार्थियों की काउंसिलिंग के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। ताकि स्कूल लेवल पर ही बच्चों की काउंसिलिंग हो सके।
आधुनिकता की इस दौड़ में बच्चे कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं। समय नहीं मिलने से बच्चे एकाकीपन का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में वर्चुअल दुनिया ही दोस्त हैं। जिसमें मोबाइल का ज्यादा शिकार हो रहे हैं। मोबाइल गेमिंग के चलते वो मानसिक रोगी बन रहे हैं। घर से लेकर स्कूल तक वर्चुअल दुनिया उनके साथ चलती है। बच्चों को भावनात्मक लगाव घर और स्कूल में कम होने से वे अपनों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों के मानसिक विकार और अवसाद दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। इसके लिए शिक्षकों को इस तरह से ट्रेंड किया जाएगा कि बच्चे उनके साथ अपना जुड़ाव महसूस कर सकें। जिले के प्रत्येक स्कूल में शिक्षक को ही नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो अन्य शिक्षकों को इस बारे में ट्रेनिंग देगा।
कुछ बुरा होने पर बच्चे ने नहीं बता पाते किसी को
जिला निदेशालय द्वारा प्रदेश लेवल पर विश्लेषण किया गया कि सामाजिक परिवेश में बच्चों के साथ स्कूल में ही नहीं घर में भी बहुत सी विपरीत घटनाएं घट रही है। जिसे बच्चे न तो घर पर किसी को बता रहे हैं और न ही स्कूल में किसी शिक्षक को। जिसके कारण बहुत से बच्चे मानसिक रोगी भी हो रहे हैं। जिसको देखते हुए निदेशालय द्वारा इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेशभर में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की योजना शुरू की गई है।
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ये होगा प्रशिक्षण में
जिले के सभी राजकीय स्कूलों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। ये नोडल अधिकारी शिक्षकों को ही बनाया गया है। जिलेभर के 844 विद्यालयों में से कुल 1 हजार 44 शिक्षक ट्रेनिंग लेंगे। इस ट्रेनिंग में 326 पीजीटी, 194 टीजीटी, 524 पीआरटी ट्रेनिंग में हिस्सा लेंगे। इस ट्रेनिंग को जिले में 26, 27, 28 नवंबर को आयोजित किया जाना है। इस ट्रेनिंग में नोडल अधिकारी को ही ट्रेनिंग दी जाएगी कि किस प्रकार से उनको बच्चों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा करना है। शिक्षक को किस प्रकार से बच्चों की काउंसिलिंग करनी है और किस प्रकार से घटना होने पर बच्चों को संभालना है आदि। विशेष तौर पर इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि बच्चों और शिक्षकों में एक ऐसा रिश्ता कायम हो। जिससे बच्चे या विद्यार्थी बिना किसी झिझक के शिक्षक को अपनी बात कह सके। इन शिक्षकों को 50 मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण देंगे।
हर स्कूल में से नोडल नियुक्त किए गए हैं। जिन्हें इस ट्रेनिंग में शामिल किया जाएगा। इस ट्रेनिंग में शिक्षकों को किस प्रकार से बच्चों के साथ रिश्ता बनाना है सिखाया जाएगा। इस ट्रेनिंग के लिए बजट भी जारी किया गया। जिसमें करीब 16 लाख 80 हजार रुपये का बजट आया है। ये ट्रेनिंग 26 से 28 नवंबर को आयोजित होगी।
-गोपाल कृष्ण शुक्ला, सहायक परियोजना अधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान, सिरसा।
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आधुनिकता की इस दौड़ में बच्चे कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं। समय नहीं मिलने से बच्चे एकाकीपन का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में वर्चुअल दुनिया ही दोस्त हैं। जिसमें मोबाइल का ज्यादा शिकार हो रहे हैं। मोबाइल गेमिंग के चलते वो मानसिक रोगी बन रहे हैं। घर से लेकर स्कूल तक वर्चुअल दुनिया उनके साथ चलती है। बच्चों को भावनात्मक लगाव घर और स्कूल में कम होने से वे अपनों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों के मानसिक विकार और अवसाद दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। इसके लिए शिक्षकों को इस तरह से ट्रेंड किया जाएगा कि बच्चे उनके साथ अपना जुड़ाव महसूस कर सकें। जिले के प्रत्येक स्कूल में शिक्षक को ही नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो अन्य शिक्षकों को इस बारे में ट्रेनिंग देगा।
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कुछ बुरा होने पर बच्चे ने नहीं बता पाते किसी को
जिला निदेशालय द्वारा प्रदेश लेवल पर विश्लेषण किया गया कि सामाजिक परिवेश में बच्चों के साथ स्कूल में ही नहीं घर में भी बहुत सी विपरीत घटनाएं घट रही है। जिसे बच्चे न तो घर पर किसी को बता रहे हैं और न ही स्कूल में किसी शिक्षक को। जिसके कारण बहुत से बच्चे मानसिक रोगी भी हो रहे हैं। जिसको देखते हुए निदेशालय द्वारा इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेशभर में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की योजना शुरू की गई है।
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ये होगा प्रशिक्षण में
जिले के सभी राजकीय स्कूलों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। ये नोडल अधिकारी शिक्षकों को ही बनाया गया है। जिलेभर के 844 विद्यालयों में से कुल 1 हजार 44 शिक्षक ट्रेनिंग लेंगे। इस ट्रेनिंग में 326 पीजीटी, 194 टीजीटी, 524 पीआरटी ट्रेनिंग में हिस्सा लेंगे। इस ट्रेनिंग को जिले में 26, 27, 28 नवंबर को आयोजित किया जाना है। इस ट्रेनिंग में नोडल अधिकारी को ही ट्रेनिंग दी जाएगी कि किस प्रकार से उनको बच्चों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा करना है। शिक्षक को किस प्रकार से बच्चों की काउंसिलिंग करनी है और किस प्रकार से घटना होने पर बच्चों को संभालना है आदि। विशेष तौर पर इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि बच्चों और शिक्षकों में एक ऐसा रिश्ता कायम हो। जिससे बच्चे या विद्यार्थी बिना किसी झिझक के शिक्षक को अपनी बात कह सके। इन शिक्षकों को 50 मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण देंगे।
हर स्कूल में से नोडल नियुक्त किए गए हैं। जिन्हें इस ट्रेनिंग में शामिल किया जाएगा। इस ट्रेनिंग में शिक्षकों को किस प्रकार से बच्चों के साथ रिश्ता बनाना है सिखाया जाएगा। इस ट्रेनिंग के लिए बजट भी जारी किया गया। जिसमें करीब 16 लाख 80 हजार रुपये का बजट आया है। ये ट्रेनिंग 26 से 28 नवंबर को आयोजित होगी।
-गोपाल कृष्ण शुक्ला, सहायक परियोजना अधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान, सिरसा।