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मई के महीने में न करें ग्वार की बिजाई : डॉ.यादव
Wed, 06 May 2026 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 06 May 2026 11:57 PM IST
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- 15 रुपये की दवा से ग्वार के जड़गलन रोग को 85 से 90 प्रतिशत तक रोका संभव
फोटो - 1
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। मृतक लाइनमैन अमन की फाइल फोटो।ऐसे में किसानों को जागरूक करने के लिए पूर्व ही कृषि विभाग सिरसा के खंड नाथूसरी चोपटा के अधिकारी व ग्वार विशेषज्ञ की संयुक्त टीम जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है।
नाथूसरी चोपटा के एटीएम डॉ. मदन सिंह की देखरेख में ग्वार विशेषज्ञ डाॅ. बीडी यादव के सहयोग से खंड नाथूसरी चोपटा के गांव गुसाईयाना में ग्वार की ट्रेनिंग का आयोजन किया गया। इसमें ग्वार की समय से पहले बिजाई न करने व जड़गलन रोग की रोकथाम जो इस क्षेत्र की गंभीर समस्या है। उसके प्रति किसानों को जागरूक किया गया।
ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने किसानों से कहा कि ग्वार की बिजाई मई महीने में कदापि न करें। ऐसा करने से फसल की बढ़वार ज्यादा हो जाएगी और फसल गिरने की आशंका ज्यादा रहेगी। फल भी कम आएगा तथा नीचे की फलियां जो बनेंगी वे सिकुड़ कर सूख जाएंगी। उसका पैदावार पर विपरीत असर आएगा। गोष्ठी में डाॅ. यादव ने ग्वार फसल की उन्नत किस्मों, समय पर बिजाई, बीज उपचार व संतुलित खाद का प्रयोग के बारे में किसानों को अवगत कराया।
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डॉ. यादव ने बताया कि ग्वार की बिजाई के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा सबसे उचित है। सिंचित क्षेत्रों में जून के महीने में जब भी नहर के फालतू पानी की उपलब्धता हो तो ग्वार की बिजाई शुरू कर सकते हैं। बारानी क्षेत्रों में ग्वार की बिजाई मानसून की अच्छी बारिश आने पर ही करें।
ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों को बताया कि जड़गलन यानी उखेड़ा रोग की फफूंद जमीन के अन्दर पनपती है जो उगते हुए पौधों की जड़ पर आक्रमण करती है। इससे पौधे की जड़ें काली पड़ जाती हैं। जमीन से पौधों की खुराक रुक जाती है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए बीज उपचार ही एकमात्र हल है।
इसके लिए 3 ग्राम कार्बन्डाजिम 50 प्रतिशत बेविस्टीन प्रतिकिलो बीज की दर से सुखा उपचारित 15 से 20 मिनट करने के बाद ही बिजाई करनी चाहिए। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। जड़गलन रोग का इलाज मात्र 15 रुपये के बीज उपचार से संभव है जोकि सस्ता और सरल उपाय है।
इस कार्यक्रम को किसानों के लिए गांव में आयोजित करवाने में पूर्व सरपंच विनोद कुमार का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर प्रश्नोतरी सभा का आयोजन करके पांच किसानों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर गांव के प्रगतिशील किसान मुन्शीराम, बृजलाल, धन्नाराम, रामस्वरूप, बुधराम, अजय पूनिया आदि मौजूद रहे।
मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवाएं
खंड नाथूसरी चोपटा के एटीएम डॉ. मदन सिंह ने कहा कि बिजाई से पहले अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवाएं। इसके साथ-साथ उन्होंने खेती की पुरानी पद्धति छोड़कर नई तकनीक अपनाकर खेती करने पर विशेष जोर दिया। इस शिविर में 82 मौजूद किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की वेबिस्टिन दवाई सैंपल के तौर तथा एक जोड़ी दस्ताने दिए गए।
कौन सी किस्म की करें बिजाई
डॉ. यादव ने ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के लिए उन्नतशील किस्में एचजी 365, एचजी 563 व एचजी 2 -20 की बिजाई उचित समय आने पर करने की सलाह दी। इसके बारे में जानकारी लेने के लिए कृषि वैज्ञानिक व अधिकारी के संपर्क में रहें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। मृतक लाइनमैन अमन की फाइल फोटो।ऐसे में किसानों को जागरूक करने के लिए पूर्व ही कृषि विभाग सिरसा के खंड नाथूसरी चोपटा के अधिकारी व ग्वार विशेषज्ञ की संयुक्त टीम जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है।
नाथूसरी चोपटा के एटीएम डॉ. मदन सिंह की देखरेख में ग्वार विशेषज्ञ डाॅ. बीडी यादव के सहयोग से खंड नाथूसरी चोपटा के गांव गुसाईयाना में ग्वार की ट्रेनिंग का आयोजन किया गया। इसमें ग्वार की समय से पहले बिजाई न करने व जड़गलन रोग की रोकथाम जो इस क्षेत्र की गंभीर समस्या है। उसके प्रति किसानों को जागरूक किया गया।
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ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने किसानों से कहा कि ग्वार की बिजाई मई महीने में कदापि न करें। ऐसा करने से फसल की बढ़वार ज्यादा हो जाएगी और फसल गिरने की आशंका ज्यादा रहेगी। फल भी कम आएगा तथा नीचे की फलियां जो बनेंगी वे सिकुड़ कर सूख जाएंगी। उसका पैदावार पर विपरीत असर आएगा। गोष्ठी में डाॅ. यादव ने ग्वार फसल की उन्नत किस्मों, समय पर बिजाई, बीज उपचार व संतुलित खाद का प्रयोग के बारे में किसानों को अवगत कराया।
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डॉ. यादव ने बताया कि ग्वार की बिजाई के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा सबसे उचित है। सिंचित क्षेत्रों में जून के महीने में जब भी नहर के फालतू पानी की उपलब्धता हो तो ग्वार की बिजाई शुरू कर सकते हैं। बारानी क्षेत्रों में ग्वार की बिजाई मानसून की अच्छी बारिश आने पर ही करें।
ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों को बताया कि जड़गलन यानी उखेड़ा रोग की फफूंद जमीन के अन्दर पनपती है जो उगते हुए पौधों की जड़ पर आक्रमण करती है। इससे पौधे की जड़ें काली पड़ जाती हैं। जमीन से पौधों की खुराक रुक जाती है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए बीज उपचार ही एकमात्र हल है।
इसके लिए 3 ग्राम कार्बन्डाजिम 50 प्रतिशत बेविस्टीन प्रतिकिलो बीज की दर से सुखा उपचारित 15 से 20 मिनट करने के बाद ही बिजाई करनी चाहिए। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। जड़गलन रोग का इलाज मात्र 15 रुपये के बीज उपचार से संभव है जोकि सस्ता और सरल उपाय है।
इस कार्यक्रम को किसानों के लिए गांव में आयोजित करवाने में पूर्व सरपंच विनोद कुमार का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर प्रश्नोतरी सभा का आयोजन करके पांच किसानों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर गांव के प्रगतिशील किसान मुन्शीराम, बृजलाल, धन्नाराम, रामस्वरूप, बुधराम, अजय पूनिया आदि मौजूद रहे।
मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवाएं
खंड नाथूसरी चोपटा के एटीएम डॉ. मदन सिंह ने कहा कि बिजाई से पहले अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवाएं। इसके साथ-साथ उन्होंने खेती की पुरानी पद्धति छोड़कर नई तकनीक अपनाकर खेती करने पर विशेष जोर दिया। इस शिविर में 82 मौजूद किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की वेबिस्टिन दवाई सैंपल के तौर तथा एक जोड़ी दस्ताने दिए गए।
कौन सी किस्म की करें बिजाई
डॉ. यादव ने ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के लिए उन्नतशील किस्में एचजी 365, एचजी 563 व एचजी 2 -20 की बिजाई उचित समय आने पर करने की सलाह दी। इसके बारे में जानकारी लेने के लिए कृषि वैज्ञानिक व अधिकारी के संपर्क में रहें।