{"_id":"671fe0eb45fb15c5470d1094","slug":"dhanteras-shopkeepers-are-giving-discounts-to-attract-customers-in-the-markets-demand-for-light-jewellery-is-high-sirsa-news-c-128-1-sir1002-127788-2024-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"धनतेरस : बाजारों में ग्राहकों को लुभाने के लिए छूट दे रहे दुकानदार, हल्के आभूषणों की मांग अधिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धनतेरस : बाजारों में ग्राहकों को लुभाने के लिए छूट दे रहे दुकानदार, हल्के आभूषणों की मांग अधिक
Tue, 29 Oct 2024 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 29 Oct 2024 12:37 AM IST
विज्ञापन
सिरसा में आभूषण की दुकान पर झुमके डालकर देखती युवती। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। भले ही सोना और चांदी के भाव आसमान छू रहे हैं लेकिन दिवाली पर पूजा के लिए चांदी के सिक्के और लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियों का क्रेज अब भी कायम है। इतना ही नहीं, चांदी के छोटे बर्तन भी लोग खरीदकर ले जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर सोने में कम वजन के आइटम स्वर्णकार बनाकर ग्राहकों को लुभाने का प्रयास कर रहे है।
इनमें अंगूठी, ब्रेसलेट, चेन, मंगलसूत्र, कड़े को लेकर मुख्य रूप से क्रेज है। वहीं, ग्रामीण स्तर के ग्राहकों को तागड़ी, झुमके, बालियां और नथनी व टिका के अलावा कम वजन व डिजाइनर हार लुभा रहे हैं।
स्वर्णकार कपिल सोनी ने बताया कि ग्राहकों को लुभाने के लिए सभी अलग-अलग ऑफर बाजार में उपलब्ध है। कोई बनवाई पर छूट दे रहा है, तो एक आइटस पर दूसरे आइटम का मूल्य कम करके दे रहा है। मौजूदा समय में हलके आइटमों की मांग ज्यादा है। चांदी और सोना दोनों में कम वजन की चीजों को ग्राहक पसंद कर रहे हैं।
विज्ञापन
इस बार जिलेभर में धनतेरस पर 100 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है। सर्राफा व्यापारियों की मानें तो धनतेरस पर सबसे अधिक चांदी की चीजों में मूर्ति, सिक्के, चांदी के बर्तन, अष्ट लक्ष्मी के लोटे, अष्ट लक्ष्मी की मूर्तियों के साथ सोने के जेवर व हीरे के हार भी बिकते हैं।
तांबा और पीतल के बर्तनों की मांग अधिक
इस बार तांबा व पीतल के बर्तनों को सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है। वहीं लोहे की कड़ाही, स्टील की बाल्टियां, लोटे आदि की भी बिक्री होगी। जिले में 100 से अधिक बर्तनों की दुकानें हैं। दुकानदार दीपक कुमार ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से बर्तन बाजार में काफी ग्राहक आ रहे हैं। धनतेरस के दिन बर्तनों की खरीदारी लोग ज्यादा करते हैं।
-- -
वर्जन
सोना और चांदी के दामों में बढ़ोतरी होने के कारण व्यापार में ज्यादा तेजी नहीं है। धनतेरस पर खरीदारी जरूर होती है। ग्राहकों की मांग के अनुसार ही इस बार आइटम तैयार किए गए हैं ताकि वह कोई न कोई चीज जरूर खरीद पाए।
-- - सुखविंद्र सोनी, ज्वेलर्स। फोटो- 17
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
वर्जन
सर्राफा बाजार में ज्यादा तेजी नहीं है। धनतेरस पर बिक्री की उम्मीद है। जिनके घर में शादी है वहीं ग्राहक आ रहे हैं और खरीदारी कर रहे हैं। दिवाली का ग्राहक धनतेरस पर ही आएगा।-- - कस्तूर इंसां, ज्वेलर्स। फोटो- 18
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
वर्जन
इस बार दिवाली महीने के आखिर में है। इसका कुछ असर हमेशा ही रहता है। यहीं कारण है कि बाजार में ज्यादा तेजी नहीं है। हालांकि धनतेरस पर लोग खरीदारी करेंगे तो अच्छा व्यापार होगा। ।
-- - देशपाल सोनी, ज्वेलर्स। फोटो- 19
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
31 अक्तूबर को ही मनाई जाएगी दिवाली
फोटो- 5
दिवाली के त्योहार को लेकर लोगों के मन में चल रही शंका का निराकरण करते हुए पंडित सीताराम ने बताया कि वीरवार 31 अक्तूबर के दिन ही त्योहार मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि काशी के विद्वानों द्वारा भी पूरे भारतवर्ष में इसी दिन दिवाली का त्योहार मनाने की बात कही है। पंडित सीताराम ने बताया कि महालक्ष्मी पूजन भी इसी दिन होगा तथा अन्नकूट, गोवर्धन पूजा इत्यादि 2 नवंबर को ही है। उन्होंने बताया कि शहर के सभी विद्वानों पंडित शिवकुमार, कथावाचक पंडित सुगनचंद, ब्राह्मण सभा के प्रधान प्रो. दयानंद शर्मा, पंडित मुरारीलाल शर्मा, पंडित रामदुलारे, पंडित अवधेश, सालासर धाम के पुजारियों व कुछ वास्तु विशेषज्ञों द्वारा इस विषय पर मिलकर तिथि को लेकर सामंजस्य बैठाया। सभी द्वारा 31 अक्तूबर के दिन ही दीपावली का त्योहार मनाने का निर्णय लिया गया।
विज्ञापन
सिरसा। भले ही सोना और चांदी के भाव आसमान छू रहे हैं लेकिन दिवाली पर पूजा के लिए चांदी के सिक्के और लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियों का क्रेज अब भी कायम है। इतना ही नहीं, चांदी के छोटे बर्तन भी लोग खरीदकर ले जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर सोने में कम वजन के आइटम स्वर्णकार बनाकर ग्राहकों को लुभाने का प्रयास कर रहे है।
इनमें अंगूठी, ब्रेसलेट, चेन, मंगलसूत्र, कड़े को लेकर मुख्य रूप से क्रेज है। वहीं, ग्रामीण स्तर के ग्राहकों को तागड़ी, झुमके, बालियां और नथनी व टिका के अलावा कम वजन व डिजाइनर हार लुभा रहे हैं।
विज्ञापन
स्वर्णकार कपिल सोनी ने बताया कि ग्राहकों को लुभाने के लिए सभी अलग-अलग ऑफर बाजार में उपलब्ध है। कोई बनवाई पर छूट दे रहा है, तो एक आइटस पर दूसरे आइटम का मूल्य कम करके दे रहा है। मौजूदा समय में हलके आइटमों की मांग ज्यादा है। चांदी और सोना दोनों में कम वजन की चीजों को ग्राहक पसंद कर रहे हैं।
विज्ञापन
इस बार जिलेभर में धनतेरस पर 100 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है। सर्राफा व्यापारियों की मानें तो धनतेरस पर सबसे अधिक चांदी की चीजों में मूर्ति, सिक्के, चांदी के बर्तन, अष्ट लक्ष्मी के लोटे, अष्ट लक्ष्मी की मूर्तियों के साथ सोने के जेवर व हीरे के हार भी बिकते हैं।
तांबा और पीतल के बर्तनों की मांग अधिक
इस बार तांबा व पीतल के बर्तनों को सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है। वहीं लोहे की कड़ाही, स्टील की बाल्टियां, लोटे आदि की भी बिक्री होगी। जिले में 100 से अधिक बर्तनों की दुकानें हैं। दुकानदार दीपक कुमार ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से बर्तन बाजार में काफी ग्राहक आ रहे हैं। धनतेरस के दिन बर्तनों की खरीदारी लोग ज्यादा करते हैं।
वर्जन
सोना और चांदी के दामों में बढ़ोतरी होने के कारण व्यापार में ज्यादा तेजी नहीं है। धनतेरस पर खरीदारी जरूर होती है। ग्राहकों की मांग के अनुसार ही इस बार आइटम तैयार किए गए हैं ताकि वह कोई न कोई चीज जरूर खरीद पाए।
वर्जन
सर्राफा बाजार में ज्यादा तेजी नहीं है। धनतेरस पर बिक्री की उम्मीद है। जिनके घर में शादी है वहीं ग्राहक आ रहे हैं और खरीदारी कर रहे हैं। दिवाली का ग्राहक धनतेरस पर ही आएगा।
वर्जन
इस बार दिवाली महीने के आखिर में है। इसका कुछ असर हमेशा ही रहता है। यहीं कारण है कि बाजार में ज्यादा तेजी नहीं है। हालांकि धनतेरस पर लोग खरीदारी करेंगे तो अच्छा व्यापार होगा। ।
31 अक्तूबर को ही मनाई जाएगी दिवाली
फोटो- 5
दिवाली के त्योहार को लेकर लोगों के मन में चल रही शंका का निराकरण करते हुए पंडित सीताराम ने बताया कि वीरवार 31 अक्तूबर के दिन ही त्योहार मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि काशी के विद्वानों द्वारा भी पूरे भारतवर्ष में इसी दिन दिवाली का त्योहार मनाने की बात कही है। पंडित सीताराम ने बताया कि महालक्ष्मी पूजन भी इसी दिन होगा तथा अन्नकूट, गोवर्धन पूजा इत्यादि 2 नवंबर को ही है। उन्होंने बताया कि शहर के सभी विद्वानों पंडित शिवकुमार, कथावाचक पंडित सुगनचंद, ब्राह्मण सभा के प्रधान प्रो. दयानंद शर्मा, पंडित मुरारीलाल शर्मा, पंडित रामदुलारे, पंडित अवधेश, सालासर धाम के पुजारियों व कुछ वास्तु विशेषज्ञों द्वारा इस विषय पर मिलकर तिथि को लेकर सामंजस्य बैठाया। सभी द्वारा 31 अक्तूबर के दिन ही दीपावली का त्योहार मनाने का निर्णय लिया गया।