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Sirsa: राम रहीम ने बागपत आश्रम से लॉन्च किया नया गीत, एक करोड़ से अधिक लोगों ने देखा ‘साड्डी नित दिवाली’
Wed, 26 Oct 2022 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Oct 2022 12:56 AM IST
सार
डेरामुखी ने ऑनलाइन गुरुकुल के माध्यम से एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि एक शिष्य को अपने गुरु से भगवान को ही मांगना चाहिए। इसके अलावा गुरु से सबका भला और पूरे संसार का भला मांगना चाहिए।
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राम रहीम
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
दिवाली पर डेरामुखी गुरमीत राम रहीम ने उत्तर प्रदेश स्थित बागपत आश्रम से नया गीत साड्डी नित दिवाली को लैपटॉप पर लॉन्च किया है। लॉन्चिंग के साथ ही गीत यू ट्यूब व इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया। मंगलवार शाम छह बजे तक करीब 18 घंटों में एक करोड़ से अधिक लोगों ने गीत को देखा है और 83 हजार के लाइक मिले हैं।
दिवाली पर डेरामुखी ने घी के दीये और फुलझड़ी जलाई। इसके बाद देश-विदेश की साध-संगत ने अपने-अपने घरों में घी व तेल के दीये जलाए। इस गीत के माध्यम से डेरामुखी ने संदेश दिया कि दिवाली के दिन लोग दीये व लड़ियां लगाकर बाहर रोशनी करते हैं, लेकिन उनके अंदर अंधेरा छाया रहता है। अंदर-बाहर दोनों को चमकाने के लिए साईं जी ने प्रभु के नाम से जोड़ा है।
इस गीत में दीपावली पर बढ़ते नशे के प्रचलन पर कटाक्ष करते हुए बताया कि दिवाली वाले दिन लोग जुआ खेलकर और दारू (शराब) पीकर रावण बनते हैं, लेकिन जिनके लिए यह त्योहार मनाया जाता है, यानी रामजी के पद चिन्हों पर कोई नहीं चलता, जोकि दुखद है। मनुष्य भगवान, अल्लाह के नाम से जुड़कर जीवन में आने वाले गम और चिंता को दूर कर सकता है।
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डेरामुखी ने दी दिवाली की शुभकामनाएं
डेरामुखी ने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह प्रकाश का पर्व आप सबके घरों में खुशियां लेकर आए और आपके गम, दुख, दर्द, चिंता रूपी अंधकार को दूर कर दे। भगवान से प्रार्थना करते हैं और आप सबको आशीर्वाद देते हैं। परम पिता शाह सतनाम, शाह मस्तान जी दाता रहबर आपकी झोलियां खुशियों से भरें।
ऑनलाइन गुरुकुल से दिया संदेश
डेरामुखी ने ऑनलाइन गुरुकुल के माध्यम से एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि एक शिष्य को अपने गुरु से भगवान को ही मांगना चाहिए। इसके अलावा गुरु से सबका भला और पूरे संसार का भला मांगना चाहिए। खुद के लिए सेवा-सिमरन की भावना रखें। उन्होंने कहा कि गुरुगद्दी पर आने से पहले वे गरीब लोग जो आर्थिक तौर पर कमजोर होते थे, उन्हें बुलाते थे तथा उन्हें मिठाई इत्यादि बांटते थे। आज भी दिवाली पर्व पर 42 जरूरतमंद लोगों के लिए कपड़े, राशन सहित अन्य जरूरी सामान भेजा गया है।
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दिवाली पर डेरामुखी ने घी के दीये और फुलझड़ी जलाई। इसके बाद देश-विदेश की साध-संगत ने अपने-अपने घरों में घी व तेल के दीये जलाए। इस गीत के माध्यम से डेरामुखी ने संदेश दिया कि दिवाली के दिन लोग दीये व लड़ियां लगाकर बाहर रोशनी करते हैं, लेकिन उनके अंदर अंधेरा छाया रहता है। अंदर-बाहर दोनों को चमकाने के लिए साईं जी ने प्रभु के नाम से जोड़ा है।
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इस गीत में दीपावली पर बढ़ते नशे के प्रचलन पर कटाक्ष करते हुए बताया कि दिवाली वाले दिन लोग जुआ खेलकर और दारू (शराब) पीकर रावण बनते हैं, लेकिन जिनके लिए यह त्योहार मनाया जाता है, यानी रामजी के पद चिन्हों पर कोई नहीं चलता, जोकि दुखद है। मनुष्य भगवान, अल्लाह के नाम से जुड़कर जीवन में आने वाले गम और चिंता को दूर कर सकता है।
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डेरामुखी ने दी दिवाली की शुभकामनाएं
डेरामुखी ने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह प्रकाश का पर्व आप सबके घरों में खुशियां लेकर आए और आपके गम, दुख, दर्द, चिंता रूपी अंधकार को दूर कर दे। भगवान से प्रार्थना करते हैं और आप सबको आशीर्वाद देते हैं। परम पिता शाह सतनाम, शाह मस्तान जी दाता रहबर आपकी झोलियां खुशियों से भरें।
ऑनलाइन गुरुकुल से दिया संदेश
डेरामुखी ने ऑनलाइन गुरुकुल के माध्यम से एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि एक शिष्य को अपने गुरु से भगवान को ही मांगना चाहिए। इसके अलावा गुरु से सबका भला और पूरे संसार का भला मांगना चाहिए। खुद के लिए सेवा-सिमरन की भावना रखें। उन्होंने कहा कि गुरुगद्दी पर आने से पहले वे गरीब लोग जो आर्थिक तौर पर कमजोर होते थे, उन्हें बुलाते थे तथा उन्हें मिठाई इत्यादि बांटते थे। आज भी दिवाली पर्व पर 42 जरूरतमंद लोगों के लिए कपड़े, राशन सहित अन्य जरूरी सामान भेजा गया है।