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डेरे की राजनीति : अपने हिमायतियों को मौन समर्थन, खुलकर सामने नहीं आएगा फैसला
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सिरसा। पंजाब में रविवार को होने वाले मतदान से एक दिन पहले डेरा ने अपने पत्ते खोल दिए। पिछली बार के फैसले से सबक लेते हुए इस बार किसी भी पार्टी या उम्मीदवार का खुलकर समर्थन करने की बजाय गुपचुप संदेश जारी किया है। खास ध्यान इस बात का रखा है कि पार्टी को तवज्जो देने की बजाय प्रत्याशी का व्यक्तिगत व्यवहार और डेरे के प्रति लगाव देखते हुए फैसला लिया गया है। डेरे की राजनीतिक विंग ने डेरामुखी से चर्चा और मंथन के बाद बेहद ही गुप्त रूप से संदेश सबसे नीचे के स्तर के अपने अनुयायी मतदाता तक भेज दिया गया है।
डेरे की राजनीतिक विंग ने पंजाब चुनाव के दौरान न केवल जिला स्तर पर बल्कि ब्लॉक और विधानसभा सीट स्तर पर जाकर सभी प्रत्याशियों पर मंथन किया। प्रत्याशी की पार्टी, व्यक्तिगत व्यवहार, डेरे के प्रति लगाव और व्यवहार देखा गया है। फीडबैक के दौरान अनुयायियों से पूछा गया कि ऐसा प्रत्याशी बताएं जिसने कभी डेरे के प्रति गलत बयानबाजी न की हो, डेरे में लगातार हाजिरी लगाता रहता हो और अनुयायी उसके बारे में क्या सोचते हैं। इसके बाद फैसला लिया गया है। इस बार डेरे ने खुलकर ये भी जाहिर नहीं होने दिया है कि हमने समर्थन देने में क्या रणनीति बनाई और किस फार्मूले पर काम किया है।
ये है फैसला
- ऐसे प्रत्याशी को वोट दें जो डेरा के प्रति नरम व्यवहार रखता हो। बेशक पार्टी कोई भी हो, लेकिन डेरा के खिलाफ कभी गलत बयानबाजी ना की हो।
- प्रत्याशी ऐसा हो जिसका अनुयायी दिल से समर्थन करते हों।
- हालांकि पार्टी का भी ध्यान रखा गया और ऐसी पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन करने से बचने का प्रयास किया, जिसने डेरामुखी और अनुयायियों को परेशान करने का काम किया।
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डेरामुखी के समधी के पक्ष में अनुयायी, पहले ही मिल चुका समर्थन
डेरामुखी गुरमीत राम रहीम सिंह के समधी हरमिंदर जस्सी की टिकट कांग्रेस ने काट दी थी। ऐसे में जस्सी अब तलवंडी साबो से आजाद उम्मीदवार के रूप में मैदान में है। डेरे की राजनीतिक विंग जस्सी को पहले ही समर्थन दे चुकी है।
पहले किया खुलकर समर्थन लेकिन इस बार बदला तरीका
पंजाब में वर्ष 2007, 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में डेरे की सीधी भागीदारी रही है। इसके अलावा वर्ष 2014 के लोकसभा और अक्तूबर 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनावों में भी डेरे की राजनीतिक विंग ने खुलकर काम किया था। डेरे ने उस समय भाजपा का समर्थन किया था। लेकिन इस बार डेरे ने काम करने का तरीका बदल दिया है। गुपचुप संदेश दिया जा रहा है, खुलकर समर्थन देने की बात कहने से राजनीतिक विंग के पदाधिकारी बचते नजर आ रहे हैं। डेरे के अनुयायी पंजाब के फिरोजपुर, मोगा, फाजिल्का, अबोहर, फरीदकोट, मुक्तसर साहिब, बठिंडा, पटियाला, लुधियाना, मानसा, संगरूर, मलेर कोटला, फतेहगढ़ साहिब में हैं। इसलिए इन सीटों पर डेरे का सीधा प्रभाव है।
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डेरे की राजनीतिक विंग ने पंजाब चुनाव के दौरान न केवल जिला स्तर पर बल्कि ब्लॉक और विधानसभा सीट स्तर पर जाकर सभी प्रत्याशियों पर मंथन किया। प्रत्याशी की पार्टी, व्यक्तिगत व्यवहार, डेरे के प्रति लगाव और व्यवहार देखा गया है। फीडबैक के दौरान अनुयायियों से पूछा गया कि ऐसा प्रत्याशी बताएं जिसने कभी डेरे के प्रति गलत बयानबाजी न की हो, डेरे में लगातार हाजिरी लगाता रहता हो और अनुयायी उसके बारे में क्या सोचते हैं। इसके बाद फैसला लिया गया है। इस बार डेरे ने खुलकर ये भी जाहिर नहीं होने दिया है कि हमने समर्थन देने में क्या रणनीति बनाई और किस फार्मूले पर काम किया है।
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ये है फैसला
- ऐसे प्रत्याशी को वोट दें जो डेरा के प्रति नरम व्यवहार रखता हो। बेशक पार्टी कोई भी हो, लेकिन डेरा के खिलाफ कभी गलत बयानबाजी ना की हो।
- प्रत्याशी ऐसा हो जिसका अनुयायी दिल से समर्थन करते हों।
- हालांकि पार्टी का भी ध्यान रखा गया और ऐसी पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन करने से बचने का प्रयास किया, जिसने डेरामुखी और अनुयायियों को परेशान करने का काम किया।
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डेरामुखी के समधी के पक्ष में अनुयायी, पहले ही मिल चुका समर्थन
डेरामुखी गुरमीत राम रहीम सिंह के समधी हरमिंदर जस्सी की टिकट कांग्रेस ने काट दी थी। ऐसे में जस्सी अब तलवंडी साबो से आजाद उम्मीदवार के रूप में मैदान में है। डेरे की राजनीतिक विंग जस्सी को पहले ही समर्थन दे चुकी है।
पहले किया खुलकर समर्थन लेकिन इस बार बदला तरीका
पंजाब में वर्ष 2007, 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में डेरे की सीधी भागीदारी रही है। इसके अलावा वर्ष 2014 के लोकसभा और अक्तूबर 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनावों में भी डेरे की राजनीतिक विंग ने खुलकर काम किया था। डेरे ने उस समय भाजपा का समर्थन किया था। लेकिन इस बार डेरे ने काम करने का तरीका बदल दिया है। गुपचुप संदेश दिया जा रहा है, खुलकर समर्थन देने की बात कहने से राजनीतिक विंग के पदाधिकारी बचते नजर आ रहे हैं। डेरे के अनुयायी पंजाब के फिरोजपुर, मोगा, फाजिल्का, अबोहर, फरीदकोट, मुक्तसर साहिब, बठिंडा, पटियाला, लुधियाना, मानसा, संगरूर, मलेर कोटला, फतेहगढ़ साहिब में हैं। इसलिए इन सीटों पर डेरे का सीधा प्रभाव है।