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डिप्टी सीएम व बिजली मंत्री को कुर्सी चाहिए या किसान

Wed, 07 Oct 2020 12:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2020 12:21 AM IST
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Deputy CM and Power Minister need a chair or farmer
वाटर कैनन से पानी पड़ने पर सड़के पर गिरे पड़े किसान। - फोटो : Sirsa
केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान मंगलवार सुबह सीडीएलयू के सामने दशहरा ग्राउंड में एकत्रित हुए। किसानों ने डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला व बिजली मंत्री रणजीत सिंह के खिलाफ नारा दिया कि कुर्सी चाहिए या किसान।
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किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा, संत गुरमीत सिंह त्रिलोकवाला ने नेताओं पर खूब भड़ास निकाली। दूसरी ओर पंजाबी कलाकारों को सुबह बॉर्डर पर पुलिस की ओर से रोक लिया गया। जिला उपायुक्त के हस्तक्षेप के बाद उन्हें हरियाणा में आने की अनुमति दी गई। वहीं प्रशासन व पुलिस की ओर से घेराव कार्यक्रम को लेकर पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे।
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कृषि कानूनों को तुरंत निरस्त करवाएं
इस मौके पर स्वराज अभियान मंच संस्थापक सदस्य योगेंद्र यादव ने कहा कि ये आंदोलन अकेले सिरसा, हरियाणा या पंजाब का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। मतलबी सरकारों को सबक सिखाने के लिए अब किसानों को एकजुट होकर इस सरकार को सत्ता से बाहर करना है।
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किसानों की जरा भी चिंता है तो उनके साथ आएं डिप्टी सीएम-बिजली मंत्री : भारूखेड़ा
हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि उनका उपमुख्यमंत्री व बिजली मंत्री से एक ही सवाल है कि उन्हें कुर्सी प्यारी है या फिर किसान। अगर कुर्सी प्यारी है तो किसानों की बात न करें और किसान की जरा सी भी चिंता है तो उनके साथ आएं और किसानों को बर्बाद करने के लिए बनाए गए कानूनों को तुरंत निरस्त करवाएं।
किसानों को पानी के नाम पर लड़वाती रहती हैं सरकारें : दीप संधू
इस मौके पर पंजाबी कलाकार दीप संधू ने कहा कि सरकारें आती हैं और जाती हैं। हरियाणा और पंजाब के किसानों को सरकारें पानी के नाम पर लड़वाती रहती हैं, लेकिन आज तक पानी का मुद्दा हल नहीं हुआ है। पंजाबी कलाकार हर्फ चीमा ने कहा कि मौजूदा समय की सरकारें कुछ जनहित के मुद्दों को लेकर राज्यों को आपस में लड़वाती रहती हैं। जिस तरह पंजाब में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने किसान हित में इस्तीफा दिया है, उसी प्रकार उपमुख्यमंत्री व बिजली मंत्री को भी इस्तीफा देना चाहिए। मंच पर किसी को भी राजनीति नहीं करने दी गई।
अफरा तफरी के दौरान दुकानदारों ने बाजार किया बंद
मंगलवार को उपमुख्यमंत्री व बिजली मंत्री के आवास का घेराव करने को लेकर पुलिस व किसान आमने-सामने हो गए। किसानों ने अवरोधक पार करने का प्रयास किया। पुलिस ने किसानों पर वाटर कैनन व आंसू गैस के गोले दागे। विरोध में किसानों ने पथराव किया। इस दौरान बरनाला रोड पर अफरा-तफरी मच गई। पथराव में करीब तीन किसानों के घायल होने की सूचना है।
किसानों और पुलिस में एक घंटे तक हुई जोर-आजमाइश
किसानों का जनसमूह दोपहर दशहरा ग्राउंड से रोष प्रदर्शन करते हुए डिप्टी सीएम व रणजीत सिंह के आवास का घेराव करने के लिए चल पड़े। पुलिस ने उन्हें बाबा भूमणशाह चौक पर उन्हें रोक लिया। किसान नेताओं ने किसानों को संबोधित किया। इसी दौरान किसानों के बीच लावारिस पशुओं का झुंड घुस आया। जिससे अफरा तफरी मच गई। इसके बाद युवा नेता गोकुल सेतिया ने अवरोधक पार करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस व अन्य किसानों ने उसे रोक लिया। वह अवरोधक पर चढ़ गया था। वहीं कुछ समय बाद दूसरे युवा किसान उत्तेजित हो गए और अवरोधक खींचकर अपनी ओर ले गए। किसानों ने भी पुलिस की ओर पत्थर फेंक दिए। इस पथराव में करीब तीन किसान घायल हो गए। पथराव को देखकर बरनाला रोड पर दुकानदारों में दहशत फैल गई। दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दीं। युवाओं को किसान नेताओं ने शांत करवाया। किसान नेता योगेंद्र यादव, संत गुरमीत सिंह त्रिलोकवाला व प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि जो किसान अवरोधक के पास बैठे हैं और पत्थरबाजी कर रहे हैं, वे किसान नहीं हैं, हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण है। कुुछ शरारती तत्व इसे हिंसात्मक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। युवा किसानों का एक समूह उनसे अलग होकर अवरोधक के पास बैठ गया। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि जिन पुलिसकर्मियों पर वे पथराव कर रहे हैं, वे भी किसानों के बेटे हैं। इसके बाद किसानों ने शाम को बाबा भूमणशाह चौक पर स्थायी धरना शुरू कर दिया।
नौ दिन की पैदल यात्रा के बाद सिरसा पहुंचे प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र जेबली
केंद्र सरकार को किसान विरोधी तीनों कानूनों को तुरंत प्रभाव से वापस लेना चाहिए, क्योंकि यदि ये कानून धरातल पर लागू हो गए तो देश का अन्नदाता बर्बाद हो जाएगा। यह बात भारतीय किसान पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र सिंह जेबली ने किसानों के घेराव कार्यक्रम में पैदल शिरकत करने से पूर्व सिकंदरपुर बाईपास के पास बातचीत के दौरान कही। बता दें कि महेंद्र सिंह कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चरखी दादरी से पैदल चलकर आए। उनके साथ सुखबीर सिंह हिसार ने भी सिरसा तक पैदल मार्च किया। किसानों के समर्थन में यह पैदल यात्रा तीन अक्तूबर को बाढड़ा क्रांतिकारी चौक चरखी दादरी से शुरू हुई थी। किसान नेता महेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र के इन तीनों काले कानूनों के खिलाफ भारतीय किसान पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में केस दायर किया है।
किसानों को मनाने पहुंचे अधिकारी
रात 10 बजकर 15 मिनट पर एसडीएम जयबीर यादव, एसडीएम डबवाली और डीएसपी आर्यन चौधरी किसानों से बातचीत करने के लिए धरनास्थल पर आए। उन्होंने किसानों से कहा कि चौक खाली कर विश्वविद्यालय जाने वाले मार्ग पर किसी एक तरफ धरना दें, लेकिन किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों की बात को मानने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का कहना था कि चौक पर धरना देने से यातायात बाधित होगा और दुकानदारों को भी समस्या होगी।

लोगों की ओर से हुआ पथराव, किसानों से की जा रही बातचीत : उपायुक्त
उपायुक्त रमेश चंद्र बिढाण ने कहा कि पुलिस की ओर से पथराव नहीं हुआ। बल्कि किसानों की ओर से पथराव हुआ। प्रशासन इसकी जांच करेगा। किसान नेताओं से बातचीत चल रही है, ताकि धरना खत्म किया जा सकें।

सिरसा में प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड्स हटाते हुए किसान।

सिरसा में प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड्स हटाते हुए किसान।- फोटो : Sirsa

किसानों पर पानी की बौछार करती पुलिस।

किसानों पर पानी की बौछार करती पुलिस।- फोटो : Sirsa

सिरसा में प्रदर्शन के दौरान भूमण शाह चौक पर इकट्ठा होते किसान संगठन।

सिरसा में प्रदर्शन के दौरान भूमण शाह चौक पर इकट्ठा होते किसान संगठन।- फोटो : Sirsa

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