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जांच के लिए निजी स्कूलों में पहुंचे डीईओ, संचालकों में हड़कंप
amarujala/Sirsa
Updated Sun, 02 Apr 2017 12:35 AM IST
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निजी स्कूल संचालकों की ओर से अभिभावकों के साथ की जा रही लूट की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए शनिवार को स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. यज्ञदत्त वर्मा जांच के लिए निकल पड़े। उनके साथ अभिभावक संघ के अध्यक्ष महावीर शर्मा भी थे। जिसे लेकर स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया।
स्कूल के नाम की नोटबुक पर गुस्सा हुए डीईओ
डीईओ यज्ञदत्त वर्मा सबसे पहले बरनाला रोड स्थित डीएवी स्कूल में पहुंचे। उन्होंने कक्षा तीसरी में जाकर बच्चों की किताबें और नोटबुक चेक की। किताबें प्राइवेट पब्लिशर की मिली तो नोटबुक स्कूल के नाम से ही छपी हुई थी। कक्षा नौवीं और दसवीं में बच्चों के पास एनसीईआरटी की किताबें थीं। इस पर डीईओ ने स्कूल प्रिंसिपल से कहा कि स्कूल के नाम से ही नोटबुक प्रकाशित करवाकर बच्चों पर थोपना गैरकानूनी है। यदि स्कूल के नाम से नोटबुक प्रकाशित करवाई भी हैं तो उसे ओपन मार्केट में बिक्री के लिए उपलब्ध करवाया जाए, ताकि अभिभावक अपनी इच्छानुसार स्टेशनरी खरीद सकें। उन्होंने हिदायत दी कि यदि अभिभावकों को एक ही दुकान से किताब, नोटबुक और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर किया तो कार्रवाई की जाएगी। स्कूल प्रशासन ने आश्वासन दिया कि अभिभावकों को मजबूर नहीं किया जाएगा।
फीस का विवरण नोटिस बोर्ड पर लगाने के निर्देश
इसके बाद टीम सतलुज पब्लिक स्कूल में पहुंची। स्कूल में अवकाश होने की वजह से डीईओ ने स्कूल प्रिंसिपल बीएस सरकारिया से मुलाकात की। उन्होंने स्कूल में किताबें और नोटबुक बेचने के बारे में पूछा तो प्रिंसिपल ने कहा कि स्कूल के अंदर से किताबें, ड्रेस आदि नहीं दी जाती हैं। अभिभावक किसी भी दुकान से स्टेशनरी और ड्रेस खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। टीम सदस्य इसके बाद सावन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पहुंचे। वहां उन्होंने किताबों के बारे में पूछा तो पता चला कि किताबें स्कूल द्वारा निर्धारित एक ही दुकान से मिलती हैं। इस पर डीईओ ने फटकार लगाते हुए कहा कि यह गलत है। किताबें एक ही दुकान की बजाय ओपन मार्केट में उपलब्ध करवाई जाए, अन्यथा कार्रवाई होगी। साथ ही फीस आदि की ब्योरा नोटिस बोर्ड पर लगाने के निर्देश दिए।
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अभिभावक बनकर डीईओ पहुंचे डीपीएस
जिला शिक्षा अधिकारी हिसार रोड स्थित डीपीएस स्कूल में बतौर अभिभावक बनकर पहुंचे। उन्हाेंने काउंटर पर एडमीशन की प्रक्रिया के बारे में पूछा और कहा कि उन्हें अपने बच्चे का दाखिला करवाना है। इस पर काउंटर पर मौजूद स्टाफ ने कहा कि आपको किताबें, ड्रेस, शूज आदि स्कूल के अंदर से ही मिल जाएंगे। डीईओ ने खुद देखा कि स्कूल के अंदर ही किताबें, ड्रेस और शूज की स्टाल लगी हुई थी जहां ब्रांडेड शूज महंगे दामों पर बेचे जा रहे थे। जब यज्ञदत्त वर्मा ने बताया कि वे डीईओ हैं, तो स्कूल संचालकों और स्टाफ के होश उड़ गए। स्टाफ ने कहा कि सर, आगे से स्कूल के अंदर से किताबें, ड्रेस, शूज आदि नहीं देंगे। डीईओ ने स्कूल संचालक को कड़ी हिदायत देते हुए कहा कि यदि अभिभावकों को स्कूल के अंदर से ही पढ़ाई संबंधी सामान लेने पर मजबूर किया तो कार्रवाई की जाएगी।
आगे भी जारी रहेगी जांच : डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. यज्ञदत्त वर्मा ने कहा कि उनके पास पिछले कुछ समय से अभिभावक संघ तथा अन्य अभिभावकों की शिकायतें आ रही थीं। शिकायत में कहा गया था कि कुछ स्कूल संचालक स्टेशनरी, ड्रेस आदि स्कूल के अंदर से या फिर स्कूल द्वारा निर्धारित एक ही दुकान से लेने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह गैरकानूनी है और यदि ऐसा जांच में सामने आया तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा।
अभिभावक भी आगे आए: शर्मा
प्राइवेट स्कूल अभिभावक संघ के अध्यक्ष महावीर शर्मा ने कहा कि प्राइवेट स्कूल संचालकों की मनमानी और लूट के खिलाफ अभिभावकों को आगे आना होगा। यदि स्कूल संचालक मनमर्जी से फीस वृद्धि करते हैं। वार्षिक शुल्क की जानकारी नहीं देते हैं तो अभिभावक स्कूल संचालकों से इसकी जानकारी हासिल करें। यदि स्कूल संचालक जानकारी नहीं देते हैं तो इसकी जिला शिक्षा अधिकारी के पास शिकायत करें। उन्होंने कहा कि किसी भी अभिभावक के साथ ज्यादती नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि स्कूल संचालकों व पुस्तक विक्रेताओं के बीच चल रहे गठजोड़ को हर हाल में तोड़ा जाएगा।
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स्कूल के नाम की नोटबुक पर गुस्सा हुए डीईओ
डीईओ यज्ञदत्त वर्मा सबसे पहले बरनाला रोड स्थित डीएवी स्कूल में पहुंचे। उन्होंने कक्षा तीसरी में जाकर बच्चों की किताबें और नोटबुक चेक की। किताबें प्राइवेट पब्लिशर की मिली तो नोटबुक स्कूल के नाम से ही छपी हुई थी। कक्षा नौवीं और दसवीं में बच्चों के पास एनसीईआरटी की किताबें थीं। इस पर डीईओ ने स्कूल प्रिंसिपल से कहा कि स्कूल के नाम से ही नोटबुक प्रकाशित करवाकर बच्चों पर थोपना गैरकानूनी है। यदि स्कूल के नाम से नोटबुक प्रकाशित करवाई भी हैं तो उसे ओपन मार्केट में बिक्री के लिए उपलब्ध करवाया जाए, ताकि अभिभावक अपनी इच्छानुसार स्टेशनरी खरीद सकें। उन्होंने हिदायत दी कि यदि अभिभावकों को एक ही दुकान से किताब, नोटबुक और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर किया तो कार्रवाई की जाएगी। स्कूल प्रशासन ने आश्वासन दिया कि अभिभावकों को मजबूर नहीं किया जाएगा।
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फीस का विवरण नोटिस बोर्ड पर लगाने के निर्देश
इसके बाद टीम सतलुज पब्लिक स्कूल में पहुंची। स्कूल में अवकाश होने की वजह से डीईओ ने स्कूल प्रिंसिपल बीएस सरकारिया से मुलाकात की। उन्होंने स्कूल में किताबें और नोटबुक बेचने के बारे में पूछा तो प्रिंसिपल ने कहा कि स्कूल के अंदर से किताबें, ड्रेस आदि नहीं दी जाती हैं। अभिभावक किसी भी दुकान से स्टेशनरी और ड्रेस खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। टीम सदस्य इसके बाद सावन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पहुंचे। वहां उन्होंने किताबों के बारे में पूछा तो पता चला कि किताबें स्कूल द्वारा निर्धारित एक ही दुकान से मिलती हैं। इस पर डीईओ ने फटकार लगाते हुए कहा कि यह गलत है। किताबें एक ही दुकान की बजाय ओपन मार्केट में उपलब्ध करवाई जाए, अन्यथा कार्रवाई होगी। साथ ही फीस आदि की ब्योरा नोटिस बोर्ड पर लगाने के निर्देश दिए।
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अभिभावक बनकर डीईओ पहुंचे डीपीएस
जिला शिक्षा अधिकारी हिसार रोड स्थित डीपीएस स्कूल में बतौर अभिभावक बनकर पहुंचे। उन्हाेंने काउंटर पर एडमीशन की प्रक्रिया के बारे में पूछा और कहा कि उन्हें अपने बच्चे का दाखिला करवाना है। इस पर काउंटर पर मौजूद स्टाफ ने कहा कि आपको किताबें, ड्रेस, शूज आदि स्कूल के अंदर से ही मिल जाएंगे। डीईओ ने खुद देखा कि स्कूल के अंदर ही किताबें, ड्रेस और शूज की स्टाल लगी हुई थी जहां ब्रांडेड शूज महंगे दामों पर बेचे जा रहे थे। जब यज्ञदत्त वर्मा ने बताया कि वे डीईओ हैं, तो स्कूल संचालकों और स्टाफ के होश उड़ गए। स्टाफ ने कहा कि सर, आगे से स्कूल के अंदर से किताबें, ड्रेस, शूज आदि नहीं देंगे। डीईओ ने स्कूल संचालक को कड़ी हिदायत देते हुए कहा कि यदि अभिभावकों को स्कूल के अंदर से ही पढ़ाई संबंधी सामान लेने पर मजबूर किया तो कार्रवाई की जाएगी।
आगे भी जारी रहेगी जांच : डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. यज्ञदत्त वर्मा ने कहा कि उनके पास पिछले कुछ समय से अभिभावक संघ तथा अन्य अभिभावकों की शिकायतें आ रही थीं। शिकायत में कहा गया था कि कुछ स्कूल संचालक स्टेशनरी, ड्रेस आदि स्कूल के अंदर से या फिर स्कूल द्वारा निर्धारित एक ही दुकान से लेने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह गैरकानूनी है और यदि ऐसा जांच में सामने आया तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा।
अभिभावक भी आगे आए: शर्मा
प्राइवेट स्कूल अभिभावक संघ के अध्यक्ष महावीर शर्मा ने कहा कि प्राइवेट स्कूल संचालकों की मनमानी और लूट के खिलाफ अभिभावकों को आगे आना होगा। यदि स्कूल संचालक मनमर्जी से फीस वृद्धि करते हैं। वार्षिक शुल्क की जानकारी नहीं देते हैं तो अभिभावक स्कूल संचालकों से इसकी जानकारी हासिल करें। यदि स्कूल संचालक जानकारी नहीं देते हैं तो इसकी जिला शिक्षा अधिकारी के पास शिकायत करें। उन्होंने कहा कि किसी भी अभिभावक के साथ ज्यादती नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि स्कूल संचालकों व पुस्तक विक्रेताओं के बीच चल रहे गठजोड़ को हर हाल में तोड़ा जाएगा।