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इंक्शन कार्यक्रम में डीसी बोले : टैलेंट के साथ दृढ़ विश्वास से मिलती है सफलता
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बुनियाद कार्यक्रम के तहत चयनित विद्यार्थी उपायुक्त पार्थ गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी संतकुमार ?
- फोटो : Sirsa
सिरसा। शिक्षा विभाग की ओर से मिशन बुनियाद की शुरुआत की गई है। इसके तहत पंचायत भवन में इंडक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जहां एक ओर उपायुक्त ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर कॅरिअर को लेकर बातचीत की, वहीं दूसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी ने भी अपने अनुभव साझा किए। डीसी पार्थ गुप्ता ने कहा कि सफल होने के लिए केवल टैलेंट होना काफी नहीं है, बल्कि इसके साथ दृढ़ विश्वास का होना भी जरूरी है। जिला शिक्षा अधिकारी संत कुमार ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ा हूं और 5वीं में फेल भी हो गया था, लेकिन शिक्षकों की प्रेरणा और मेहनत से आज यहां हूं।
राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शिक्षा विभाग ने मिशन बुनियाद शुरू किया है। इसमें सिरसा से 179 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। इसके लिए जिले में चार प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। गुरुग्राम के विकल्प फाउंडेशन की टीम विद्यार्थियों को तीन दिन तक ऑनलाइन स्क्रीन के माध्यम से प्रशिक्षण देगी और 3 दिन स्कूल की कक्षाओं के बाद टैबलेट के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई होगी। इस मौके पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी आत्म प्रकाश, निदेशक मिशन बुनियाद प्रदीप कुमार, जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार, जिला गणित विशेषज्ञ नीरज पाहुजा, सहायक परियोजना अधिकारी शशि सचदेवा, बलजीत सिंह व बीआरसी और एबीआरसी मौजूद थे।
कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने सभी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी बच्चे में सिर्फ टैलेंट होना ही सफलता नहीं है। अपितु कड़ी मेहनत, विश्वास, दृढ़ निश्चय से ही सफलता को पाया जा सकता है। पहले के समय में कहा जाता था कि शहरों के बच्चे ही प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ते हैं, लेकिन आज देखो सभी चिह्नित बच्चे ग्रामीण अंचल और सरकारी स्कूलों से हैं। उपायुक्त ने सभी बच्चों के उनका सपना और लक्ष्य पूछा । जिस पर कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि वो उनकी तरफ आईएएस बनना चाहते हैं, कुछ ने कहा कि वो टीचर बनाना चाहते हैं।
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एक छात्रा ने उपायुक्त से पूछा - आप आईएएस क्यों बने?
एक छात्रा ने उपायुक्त पार्थ गुप्ता से पूछा कि उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में आईएएस बनना ही क्यों चुना। उपायुक्त ने कहा कि पढ़ाई के दौरान उन्होंने सोचा की क्यों न इसी फील्ड में ट्राई किया जाए। उपायुक्त ने कहा कि हालांकि कि मेरे परिवार में बहुत से लोग इसी फील्ड में काम कर रहे हैं। मैंने परिवार के दबाव में आकर नहीं बल्कि अपने मन से इस फील्ड में आने का सोचा। इस फील्ड में बहुत सी ऐसी संभावनाएं हैं कि आप हर दिन कुछ न कुछ नया सीख सकते हैं हां कभी-कभी जब जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है तो ऐसा लगता है जैसे ओखली में सिर डाल दिया हो। अपने आत्मविश्वास से हर बड़ी मुश्किलों से बचा जा सकता है।
डीईओ ने कहा : मैं पांचवीं में फेल हो गया था
जिला शिक्षा अधिकारी संत कुमार ने कहा कि मैं पढ़ाई में कुछ ज्यादा अच्छा नहीं था। ग्रामीण आंचल से मेरी परवरिश हुई है और पढ़ाई सरकारी स्कूलों में। मेरे माता-पिता भी अनपढ़ हैं। इसी दौरान मैं 5वीं कक्षा में फैल हो गया था, लेकिन मेरे शिक्षकों की प्रेरणा के बाद आज इस मुकाम पर हूं। इसलिए हर किसी विद्यार्थी को एक प्रेरणा और दिशा की सबसे ज्यादा जरूरी होती है। इसी दौरान अभिभावकों और शिक्षकों के स्पोर्ट की विद्यार्थियों को बहुत जरूरत होती है।
2020 में दिए एक बच्ची के आइडिया पर शुरू हुआ बुनियाद कार्यक्रम
सुपर-100 की एक बच्ची काजल का सलेक्शन आईआईटी 2020 में हुआ था। इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने काजल को चंडीगढ़ मिलने के लिए बुलाया और सम्मानित किया। उस दौरान इस बच्ची से मुख्यमंत्री ने पूछा था कि किस प्रकार से उसने तैयारी की और इस योजना में और क्या किया जा सकता है। जिस पर बच्ची काजल ने बताया कि सरकारी स्कूल के बच्चों में 8वीं-9वीं से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की भावना पैदा करना अनिवार्य है। सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों में प्रतियोगिता को लेकर कोई भावना नहीं है। इसके बाद सरकार ने बुनियाद योजना को लॉन्च करने का फैसला किया।
राजकीय विद्यालयों में नौवीं के विद्यार्थी ले सकते हैं भाग
बुनियाद कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि बुनियाद प्रोग्राम को शिक्षा विभाग व हरियाणा सरकार द्वारा विकल्प फाउंडेशन के माध्यम से शुरू किया गया है। कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बुनियाद को मजबूत किया जाएगा। इसका वही विद्यार्थी लाभ ले सकते हैं जिन्होंने 8वीं कक्षा पास की हो और 9वीं कक्षा में राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हों। यह कार्यक्रम योजना सुपर-100 के चयन के लिए विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करता है। चयनित विद्यार्थियों के लिए पठन पाठन सामग्री, वर्दी, यातायात सुविधा इत्यादि का प्रबंध विभाग द्वारा किया जाएगा।
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राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शिक्षा विभाग ने मिशन बुनियाद शुरू किया है। इसमें सिरसा से 179 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। इसके लिए जिले में चार प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। गुरुग्राम के विकल्प फाउंडेशन की टीम विद्यार्थियों को तीन दिन तक ऑनलाइन स्क्रीन के माध्यम से प्रशिक्षण देगी और 3 दिन स्कूल की कक्षाओं के बाद टैबलेट के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई होगी। इस मौके पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी आत्म प्रकाश, निदेशक मिशन बुनियाद प्रदीप कुमार, जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार, जिला गणित विशेषज्ञ नीरज पाहुजा, सहायक परियोजना अधिकारी शशि सचदेवा, बलजीत सिंह व बीआरसी और एबीआरसी मौजूद थे।
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कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने सभी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी बच्चे में सिर्फ टैलेंट होना ही सफलता नहीं है। अपितु कड़ी मेहनत, विश्वास, दृढ़ निश्चय से ही सफलता को पाया जा सकता है। पहले के समय में कहा जाता था कि शहरों के बच्चे ही प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ते हैं, लेकिन आज देखो सभी चिह्नित बच्चे ग्रामीण अंचल और सरकारी स्कूलों से हैं। उपायुक्त ने सभी बच्चों के उनका सपना और लक्ष्य पूछा । जिस पर कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि वो उनकी तरफ आईएएस बनना चाहते हैं, कुछ ने कहा कि वो टीचर बनाना चाहते हैं।
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एक छात्रा ने उपायुक्त से पूछा - आप आईएएस क्यों बने?
एक छात्रा ने उपायुक्त पार्थ गुप्ता से पूछा कि उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में आईएएस बनना ही क्यों चुना। उपायुक्त ने कहा कि पढ़ाई के दौरान उन्होंने सोचा की क्यों न इसी फील्ड में ट्राई किया जाए। उपायुक्त ने कहा कि हालांकि कि मेरे परिवार में बहुत से लोग इसी फील्ड में काम कर रहे हैं। मैंने परिवार के दबाव में आकर नहीं बल्कि अपने मन से इस फील्ड में आने का सोचा। इस फील्ड में बहुत सी ऐसी संभावनाएं हैं कि आप हर दिन कुछ न कुछ नया सीख सकते हैं हां कभी-कभी जब जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है तो ऐसा लगता है जैसे ओखली में सिर डाल दिया हो। अपने आत्मविश्वास से हर बड़ी मुश्किलों से बचा जा सकता है।
डीईओ ने कहा : मैं पांचवीं में फेल हो गया था
जिला शिक्षा अधिकारी संत कुमार ने कहा कि मैं पढ़ाई में कुछ ज्यादा अच्छा नहीं था। ग्रामीण आंचल से मेरी परवरिश हुई है और पढ़ाई सरकारी स्कूलों में। मेरे माता-पिता भी अनपढ़ हैं। इसी दौरान मैं 5वीं कक्षा में फैल हो गया था, लेकिन मेरे शिक्षकों की प्रेरणा के बाद आज इस मुकाम पर हूं। इसलिए हर किसी विद्यार्थी को एक प्रेरणा और दिशा की सबसे ज्यादा जरूरी होती है। इसी दौरान अभिभावकों और शिक्षकों के स्पोर्ट की विद्यार्थियों को बहुत जरूरत होती है।
2020 में दिए एक बच्ची के आइडिया पर शुरू हुआ बुनियाद कार्यक्रम
सुपर-100 की एक बच्ची काजल का सलेक्शन आईआईटी 2020 में हुआ था। इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने काजल को चंडीगढ़ मिलने के लिए बुलाया और सम्मानित किया। उस दौरान इस बच्ची से मुख्यमंत्री ने पूछा था कि किस प्रकार से उसने तैयारी की और इस योजना में और क्या किया जा सकता है। जिस पर बच्ची काजल ने बताया कि सरकारी स्कूल के बच्चों में 8वीं-9वीं से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की भावना पैदा करना अनिवार्य है। सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों में प्रतियोगिता को लेकर कोई भावना नहीं है। इसके बाद सरकार ने बुनियाद योजना को लॉन्च करने का फैसला किया।
राजकीय विद्यालयों में नौवीं के विद्यार्थी ले सकते हैं भाग
बुनियाद कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि बुनियाद प्रोग्राम को शिक्षा विभाग व हरियाणा सरकार द्वारा विकल्प फाउंडेशन के माध्यम से शुरू किया गया है। कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बुनियाद को मजबूत किया जाएगा। इसका वही विद्यार्थी लाभ ले सकते हैं जिन्होंने 8वीं कक्षा पास की हो और 9वीं कक्षा में राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हों। यह कार्यक्रम योजना सुपर-100 के चयन के लिए विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करता है। चयनित विद्यार्थियों के लिए पठन पाठन सामग्री, वर्दी, यातायात सुविधा इत्यादि का प्रबंध विभाग द्वारा किया जाएगा।