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मुबावजे के लिए धान का खेत बना कपास का खेत
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Sat, 30 Apr 2016 01:10 AM IST
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धान के खेत
- फोटो : Desk
सफेद मक्खी से खराब हुई नरमे की फसल के बाद सरकार द्वारा जारी की गई मुआवजा राशि को हड़पने के लिए गांव तेजाखेड़ा में बाग कॉटन के खेत बने थे, तो गांव चट्ठा में धान के खेत कॉटन में बदल गए। मामला सामने आने के बाद उपायुक्त ने संबंधित पटवारी को निलंबित कर दिया है।
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पटवारी बलजीत सिंह की ड्यूटी गांव चट्ठा में है। उस पर गिरदावरी रिपोर्ट से छेड़छाड़ करने का आरोप है। कानूनगो गुरदास सिंह की रिपोर्ट पर उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने उसे निलंबित किया है। कानूनगो ने रिपोर्ट प्रस्तुत की है कि गांव चट्ठा की गिरदावरी रिपोर्ट में पटवारी ने धान को काटकर कॉटन लिख दिया। एक हफ्ते में उपायुक्त ने तहसील डबवाली के दूसरे पटवारी को निलंबित किया है। इससे पहले गांव तेजाखेड़ा के पटवारी बलवंत सिंह को निलंबित किया गया था। बलवंत सिंह ने सारी हदें पार करते हुए किन्नू के बाग को कॉटन के खेत दिखाया था। एक साथ दो मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने जिला भर के पटवारियों पर आंखें तरेर ली हैं। आशंका है कि डबवाली जैसे मामले अन्य जगहों पर भी होंगे। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारी बारीकी से गिरदावरी रिपोर्ट का निरीक्षण करने लगे हैं।
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गांव चट्ठा के पटवारी बलजीत सिंह को निलंबित किया गया है। उसके खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी। पटवारी ने रिपोर्ट में कटिंग करके धान के खेतों को कॉटन के खेत दिखा रखा है।
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-नौरंग दास, तहसीलदार, डबवाली