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बीस साल में पहली बार झुका डीएवी संस्थान, वापस ली याचिका
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Fri, 01 Apr 2016 12:29 AM IST
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करीब बीस साल से चली आ रही कानूनी लड़ाई में पहली बार अग्निकांड पीड़ितों के आगे डीएवी संस्थान झुकता नजर आया। 23 दिसंबर 1995 के अग्निकांड पीड़ितों की मुआवजे राशि के विरोध में जिला एवं सत्र न्यायालय में पीड़ितों के वकीलों से बहस के बाद डीएवी ने अपनी याचिका वापस ले ली। पीड़ित करीब सवा चार करोड़ रुपये की बकाया मुआवजा राशि ब्याज समेत पाने के लिए स्थानीय अदालत में याचिका दाखिल करेंगे।
बता दें कि 23 दिसंबर 1995 को राजीव मैरिज पैलेस में डीएवी स्कूल के वार्षिक कार्यक्रम में हुई आगजनी दुनिया की सबसे बड़ी अग्नि त्रासदी है। जिसमें करीब 442 बच्चों, युवाओं, महिलाओं तथा पुरुषों की मृत्यु हुई थी। जिसमें करीब दो सौ लोग घायल हुए थे। मुआवजे तथा इलाज के लिए 1996 में अग्निकांड पीड़ितों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। केस था डबवाली फायर विक्टम एसोसिएशन वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया। 28 जनवरी 2003 को अदालत ने रिटायर्ड जस्टिस टीपी गर्ग पर आधारित आयोग बनाया।
आयोग के सामने पेश 405 मृतकों तथा 88 घायलों ने अपनी दलील पेश की थी। करीब छह साल बाद मई 2009 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की। जस्टिस टीएस ठाकुर की खंडपीठ ने नौ नवंबर 2009 को मुआवजे के संबंध में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने चार माह के भीतर छह प्रतिशत ब्याज दर तथा अधिक अवधि होने पर दस प्रतिशत ब्याज दर पर मुआवजा राशि अग्निकांड पीड़ितों को आवंटित करने के आदेश दिए। मुआवजा राशि करीब 34 करोड़ 14 लाख बनी। जिसमें सरकार ने 45 प्रतिशत तथा डीएवी संस्थान ने 55 प्रतिशत रकम देनी थी।
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हरियाणा सरकार ने ब्याज समेत 21 करोड़ 26 लाख 11 हजार 828 रुपये अग्निकांड पीड़ितों को मुआवजे के रूप में दे दिए। डीएवी संस्थान हाईकोर्ट के फैसले के विरोध सुप्रीम कोर्ट चला गया। याचिका पर सुनवाई करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने 15 मार्च 2010 को डीएवी संस्थान को दस करोड़ रुपये जमा करवाने के आदेश दिए। 23 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को सुरक्षित रखते हुए डीएवी को मुआवजा राशि जमा करवाने के आदेश दिए। डीएवी ने 17 करोड़ रुपये जमा करवा दिए।
लेकिन ब्याज की बहानेबाजी करते हुए डीएवी ने चार करोड़ 29 लाख रुपये पीड़ितों को देने से मना कर दिया। मई 2015 में एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया। स्थानीय अदालत में फैसला अग्निकांड पीड़ितों के पक्ष में हो गया। डीएवी संस्थान मामले को पुन: जिला एवं सत्र न्यायालय सिरसा में ले गया। करीब डेढ़ वर्ष से मामला लंबित था। 19 मार्च 2016 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरपी सिंह की अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों में बहस पूरी हो गई थी। अदालत ने मामला सुरक्षित रख लिया था। 31 मार्च 2016 को डीएवी संस्थान ने अपनी याचिका वापस ले ली। बीस सालों में यह पहला मौका था, जब डीएवी संस्थान ने झुकते हुए अपनी याचिका वापस ली है।
हम पिछले बीस सालों से डीएवी संस्थान के साथ लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद डीएवी संस्थान ने तीन सालों तक करीब 4.29 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि रोके रखी। अब अपनी याचिका वापस ले ली। हम तीन साल के ब्याज सहित डीएवी संस्थान से पैसा जमा करवाने के लिए अदालत में याचिका दायर करेंगे।
विनोद बांसल, प्रवक्ता, फायर विक्टम एसोसिएशन, डबवाली
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बता दें कि 23 दिसंबर 1995 को राजीव मैरिज पैलेस में डीएवी स्कूल के वार्षिक कार्यक्रम में हुई आगजनी दुनिया की सबसे बड़ी अग्नि त्रासदी है। जिसमें करीब 442 बच्चों, युवाओं, महिलाओं तथा पुरुषों की मृत्यु हुई थी। जिसमें करीब दो सौ लोग घायल हुए थे। मुआवजे तथा इलाज के लिए 1996 में अग्निकांड पीड़ितों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। केस था डबवाली फायर विक्टम एसोसिएशन वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया। 28 जनवरी 2003 को अदालत ने रिटायर्ड जस्टिस टीपी गर्ग पर आधारित आयोग बनाया।
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आयोग के सामने पेश 405 मृतकों तथा 88 घायलों ने अपनी दलील पेश की थी। करीब छह साल बाद मई 2009 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की। जस्टिस टीएस ठाकुर की खंडपीठ ने नौ नवंबर 2009 को मुआवजे के संबंध में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने चार माह के भीतर छह प्रतिशत ब्याज दर तथा अधिक अवधि होने पर दस प्रतिशत ब्याज दर पर मुआवजा राशि अग्निकांड पीड़ितों को आवंटित करने के आदेश दिए। मुआवजा राशि करीब 34 करोड़ 14 लाख बनी। जिसमें सरकार ने 45 प्रतिशत तथा डीएवी संस्थान ने 55 प्रतिशत रकम देनी थी।
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हरियाणा सरकार ने ब्याज समेत 21 करोड़ 26 लाख 11 हजार 828 रुपये अग्निकांड पीड़ितों को मुआवजे के रूप में दे दिए। डीएवी संस्थान हाईकोर्ट के फैसले के विरोध सुप्रीम कोर्ट चला गया। याचिका पर सुनवाई करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने 15 मार्च 2010 को डीएवी संस्थान को दस करोड़ रुपये जमा करवाने के आदेश दिए। 23 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को सुरक्षित रखते हुए डीएवी को मुआवजा राशि जमा करवाने के आदेश दिए। डीएवी ने 17 करोड़ रुपये जमा करवा दिए।
लेकिन ब्याज की बहानेबाजी करते हुए डीएवी ने चार करोड़ 29 लाख रुपये पीड़ितों को देने से मना कर दिया। मई 2015 में एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया। स्थानीय अदालत में फैसला अग्निकांड पीड़ितों के पक्ष में हो गया। डीएवी संस्थान मामले को पुन: जिला एवं सत्र न्यायालय सिरसा में ले गया। करीब डेढ़ वर्ष से मामला लंबित था। 19 मार्च 2016 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरपी सिंह की अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों में बहस पूरी हो गई थी। अदालत ने मामला सुरक्षित रख लिया था। 31 मार्च 2016 को डीएवी संस्थान ने अपनी याचिका वापस ले ली। बीस सालों में यह पहला मौका था, जब डीएवी संस्थान ने झुकते हुए अपनी याचिका वापस ली है।
हम पिछले बीस सालों से डीएवी संस्थान के साथ लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद डीएवी संस्थान ने तीन सालों तक करीब 4.29 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि रोके रखी। अब अपनी याचिका वापस ले ली। हम तीन साल के ब्याज सहित डीएवी संस्थान से पैसा जमा करवाने के लिए अदालत में याचिका दायर करेंगे।
विनोद बांसल, प्रवक्ता, फायर विक्टम एसोसिएशन, डबवाली