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फिर काल बने लावारिस पशु, दो की मौत, चार घायल
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Tue, 17 May 2016 12:44 AM IST
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कार एक्ससीडेंट
- फोटो : Bureau
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लावारिस पशुओं के कारण होने वाले हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सोमवार सुबह गांव चौटाला के निकट अचानक पशुओं के सामने आ जाने से अनियंत्रित हुई गाड़ी एक पेड़ से जा टकराई। हादसे में दो मौसेरे भाइयों की मौत हो गई। जबकि आठ लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। चौटाला के सरकारी अस्पताल में एंबुलेंस सुविधा न होने के कारण लोगों ने घायलों को अपने निजी वाहनों से उपचार के लिए डबवाली के सरकारी अस्पताल में पहुंचाया। घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है।
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गांव किलियांवाली निवासी बहादुर सिंह के मामा जगनंदन सिंह की रविवार रात को मौत हो गई थी। सोमवार को रतनगढ़ (राजस्थान) में अंतिम संस्कार था। संस्कार में शरीक होने के लिए बहादुर सिंह, सुखमंदर सिंह, गुरदेव कौर, हरबंस कौर, सुखदेव सिंह निवासीगण कोटली अबलु, छिंद्र कौर, बलजीत कौर निवासीगण खुड्डियां, मनजीत सिंह निवासी अनूप सिंह खुड्डियां कार में सवार होकर रतनगढ़ जा रहे थे। गाड़ी को गांव वडिंगखेड़ा निवासी विजय कुमार चला रहा था। चौटाला बाईपास के नजदीक टवेरा के आगे लावारिस पशु आ गया।
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पशु को बचाने के चक्कर में अनियंत्रित हुई गाड़ी सड़क किनारे खड़े पेड़ से जा टकराई। हादसे में मौसेरे भाई बहादुर सिंह तथा सुखमंदर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। अन्य घायलों को लोगों ने गांव चौटाला के सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें डबवाली रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस सुविधा न होने के कारण ग्रामीण निजी वाहनों के जरिए ही उन्हें डबवाली लेकर आए। घायलों की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सक ने उन्हें सिरसा रेफर कर दिया। ग्रामीण दया राम उलाणियां तथा ब्लाक समिति सदस्य जसकरण सिंह भाटी ने बताया कि एंबुलेंस के इंतजार में दोनों शव भी घंटों चौटाला के सरकारी अस्पताल में पड़े रहे। बाद में निजी वाहन में लादकर दोनों शवों को डबवाली ले जाया गया। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव को परिजनों के हवाले कर दिया।
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48 घंटे में मिलनी थी एंबुलेंस
पिछले दिनों गांव चौटाला के सरकारी अस्पताल में एंबुलेंस सुविधा देने की बात सीएमओ सूरजभान कंबोज ने की थी। उनका दावा था कि 48 घंटों के भीतर सुविधा शुरू हो जाएगी। उनको वादा किए कई दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक एंबुलेंस नहीं मिली है। जबकि चौटाला क्षेत्र में हादसों की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है।
पुलिस से उलझे ग्रामीण
सूचना देने के बावजूद भी चौटाला पुलिस मौका पर काफी देर बाद पहुंची। जिसका ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया। ग्रामीण दया राम ने बताया कि वह मौके पर था। पुलिस को सूचित किया था। गांव में चौकी होने के बावजूद पुलिस करीब एक घंटा देरी से पहुंची। ग्रामीणों के अनुसार अगर समय पर एंबुलेंस सुविधा मिल जाती तो मृतकों की जान भी बच सकती थी।
जैसे ही सूचना आई थी तो मैं स्वयं गाड़ी चलाकर पांच मिनट के भीतर मौका पर पहुंच गया था। पुलिस पर लगाए जा रहे आरोप मनगढ़ंत हैं। पुलिस ने दफा 174 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई करते हुए पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव उनके वारिसों को सौंप दिए।
- बलवीर सिंह, प्रभारी, पुलिस चौकी चौटाला