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अस्पताल में प्रसव पीड़ा झेल रही महिला को चिकित्सक ने बाहर का रास्ता दिखाया
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Sun, 20 Nov 2016 11:50 PM IST
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सरकारी अस्पताल में प्रसव पीड़ा झेल रही महिला को अस्पताल से बाहर का रास्ता दिखाने का मामला सामने आया है। रविवार को अस्पताल में बरती गई लापरवाही की शिकायत परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को करते हुए उपायुक्त सिरसा को भी दी है।
वार्ड नंबर 15 निवासी दीपक कुमार ने स्वास्थ्य मंत्री को भेजी शिकायत में कहा है कि प्रसव पीड़ा के चलते वह अपनी बहन तुलसी रानी को सिविल अस्पताल में लेकर गया था। उस समय अस्पताल में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। करीब दो घंटे बाद महिला चिकित्सक अस्पताल में आईं। अस्पताल में सर्जन न होने की बात कहकर उसे सिरसा जाने की सलाह दे दी। जबकि गर्भावस्था संबंधी पूरी जांच स्थानीय अस्पताल में हुई थी। तुलसी की तबियत ज्यादा खराब होने की वजह से मजबूरन उसे पंजाब का रुख करना पड़ा। बठिंडा स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ा। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि इलाज में हुई देरी के कारण अगर उसकी बहन को कुछ हुआ तो इसकी जिम्मेवारी संबंधित चिकित्सक की होगी। दीपक के अनुसार इस संबंध में उसने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को भी शिकायत भेजकर जांच की मांग की है। स्वास्थ्य मंत्री को ट्वीट भी किया है।
महिला को एक-दो घंटे के लिए रखा गया था। जब लगा कि ऑपरेशन से बच्चा होगा, तब उसे रेफर किया गया। हम एंबुलेंस देने को भी तैयार थे। लेकिन परिजन उसे अस्पताल से लेकर चलते बने। आरोप तथ्यहीन हैं।
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-एमके भादू, एसएमओ, डबवाली
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वार्ड नंबर 15 निवासी दीपक कुमार ने स्वास्थ्य मंत्री को भेजी शिकायत में कहा है कि प्रसव पीड़ा के चलते वह अपनी बहन तुलसी रानी को सिविल अस्पताल में लेकर गया था। उस समय अस्पताल में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। करीब दो घंटे बाद महिला चिकित्सक अस्पताल में आईं। अस्पताल में सर्जन न होने की बात कहकर उसे सिरसा जाने की सलाह दे दी। जबकि गर्भावस्था संबंधी पूरी जांच स्थानीय अस्पताल में हुई थी। तुलसी की तबियत ज्यादा खराब होने की वजह से मजबूरन उसे पंजाब का रुख करना पड़ा। बठिंडा स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ा। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि इलाज में हुई देरी के कारण अगर उसकी बहन को कुछ हुआ तो इसकी जिम्मेवारी संबंधित चिकित्सक की होगी। दीपक के अनुसार इस संबंध में उसने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को भी शिकायत भेजकर जांच की मांग की है। स्वास्थ्य मंत्री को ट्वीट भी किया है।
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महिला को एक-दो घंटे के लिए रखा गया था। जब लगा कि ऑपरेशन से बच्चा होगा, तब उसे रेफर किया गया। हम एंबुलेंस देने को भी तैयार थे। लेकिन परिजन उसे अस्पताल से लेकर चलते बने। आरोप तथ्यहीन हैं।
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