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होम्योपैथिक चिकित्सिका ने लिए दवा के पैसे, बवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Fri, 16 Sep 2016 11:57 PM IST
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ओढां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उस समय बवाल हो गया, जब एक व्यक्ति से दवाई के पैसे ले लिए गए। मामला बढ़ता देख महिला कर्मचारी ने पैसे वापस कर दिए और अपनी गलती स्वीकार कर ली, तब जाकर मामला शांत हुआ।
दरअसल हुआ यूं कि ओढां निवासी पंचायत मेंबर गुरप्रीत सिंह अपने बेटे को खारिश की दवाई दिलवाने आयुष विंग में आया। क्लीनिक की चिकित्सिका डॉ. जैसमीन ने उसे लिक्विड दवा की दो छोटी शीशियां देते हुए कहा कि आपको 100 रुपये देने पड़ेंगे, क्योंकि ये दवाईयां सप्लाई में नहीं हैं इसीलिए वह उक्त दवाईयां बाजार से लेकर आई थी जो उन्हें दे रही है। गुरप्रीत सिंह ने 100 रुपये देकर दवाईयां ली और चला गया जहां उसने उक्त दवाई जब किसी व्यक्ति को दिखाई तो पता चला कि डॉक्टर द्वारा दी गई दवा पर कोई लेबल या नाम नहीं था। इस बात का पता कुछ जागरूक व्यक्तियों को लगा तो काफी लोग व पंचायत सदस्य अस्पताल में आकर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी से मिले। उक्त लोगों ने रोष जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल लोगों के नि:शुल्क इलाज के लिए बने हैं न कि दवा बेचने के लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पूर्व भी होम्योपैथिक चिकित्सिका द्वारा अपनी तरफ से दवाई बेचने की बात सामने आई है। मामला गरमाता देख एसएमओ डॉ. भूषण गर्ग ने होम्योपैथिक चिकित्सक को मौके पर बुलाया। जहां चिकित्सिका ने पहले तो अपनी सफाई दी, लेकिन बाद में अपनी गलती स्वीकारते हुए पैसे वापस कर दिए। जिसके बाद सभी लोग शांत होकर चले गए।
देखिए पिछले करीब दो वर्षों से सप्लाई नहीं आई है। ये दवाईयां मैं स्वयं के लिए लेकर आई थी, ये बात मैंने मरीज को कही भी थी। मैंने मरीज को जबरन तरीके से दवाई नहीं दी थी।
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डॉ. जैसमीन, होम्योपैथिक चिकित्सक
हां कुछ लोग उक्त शिकायत लेकर आए थे, मैंने चिकित्सिका को बुलाकर जवाब-तलबी करते हुए मामला सुलझा दिया है। चिकित्सिका ने गलती स्वीकार कर पैसे लौटा दिए हैं। भविष्य के लिए चिकित्सिका को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. भूषण गर्ग, एसएमओ ओढां
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दरअसल हुआ यूं कि ओढां निवासी पंचायत मेंबर गुरप्रीत सिंह अपने बेटे को खारिश की दवाई दिलवाने आयुष विंग में आया। क्लीनिक की चिकित्सिका डॉ. जैसमीन ने उसे लिक्विड दवा की दो छोटी शीशियां देते हुए कहा कि आपको 100 रुपये देने पड़ेंगे, क्योंकि ये दवाईयां सप्लाई में नहीं हैं इसीलिए वह उक्त दवाईयां बाजार से लेकर आई थी जो उन्हें दे रही है। गुरप्रीत सिंह ने 100 रुपये देकर दवाईयां ली और चला गया जहां उसने उक्त दवाई जब किसी व्यक्ति को दिखाई तो पता चला कि डॉक्टर द्वारा दी गई दवा पर कोई लेबल या नाम नहीं था। इस बात का पता कुछ जागरूक व्यक्तियों को लगा तो काफी लोग व पंचायत सदस्य अस्पताल में आकर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी से मिले। उक्त लोगों ने रोष जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल लोगों के नि:शुल्क इलाज के लिए बने हैं न कि दवा बेचने के लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पूर्व भी होम्योपैथिक चिकित्सिका द्वारा अपनी तरफ से दवाई बेचने की बात सामने आई है। मामला गरमाता देख एसएमओ डॉ. भूषण गर्ग ने होम्योपैथिक चिकित्सक को मौके पर बुलाया। जहां चिकित्सिका ने पहले तो अपनी सफाई दी, लेकिन बाद में अपनी गलती स्वीकारते हुए पैसे वापस कर दिए। जिसके बाद सभी लोग शांत होकर चले गए।
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देखिए पिछले करीब दो वर्षों से सप्लाई नहीं आई है। ये दवाईयां मैं स्वयं के लिए लेकर आई थी, ये बात मैंने मरीज को कही भी थी। मैंने मरीज को जबरन तरीके से दवाई नहीं दी थी।
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डॉ. जैसमीन, होम्योपैथिक चिकित्सक
हां कुछ लोग उक्त शिकायत लेकर आए थे, मैंने चिकित्सिका को बुलाकर जवाब-तलबी करते हुए मामला सुलझा दिया है। चिकित्सिका ने गलती स्वीकार कर पैसे लौटा दिए हैं। भविष्य के लिए चिकित्सिका को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. भूषण गर्ग, एसएमओ ओढां