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गुजरात की दवा निर्माता कंपनी, दो व्यापारियों पर 15-15 हजार जुर्माना

Wed, 15 Feb 2017 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा Updated Wed, 15 Feb 2017 12:25 AM IST
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court decision, fine to the two traders, 15-15 thousand on each, Sirsa
court shimla

शहर की अनाज मंडी में प्रतिबंधित कीटनाशकों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। कृषि विभाग की ऐसे व्यापारी और कंपनियों पर पैनी नजर है, जो प्रतिबंधित रसायनों की बिक्री नाम बदलकर कर रही है। इस गोरखधंधे में जुटे दो व्यापारियों और एक कंपनी को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने 15-15 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर एक महीने कारावास भुगतना होगा।

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कृषि विभाग के उप निदेशक डॉक्टर बाबूलाल ने बताया कि सिरसा की एडिशनल मंडी दुकान नंबर 27 बी स्थित प्रो. मैसर्स आरआर इंटरप्राइजेज मालिक राजेंद्र कुमार, गुजरात में रहने वाले कारोबारी प्रकाश भाई और कीटनाशक निर्माता कंपनी मै. एसीटी एग्रो कैम प्राइवेट लिमिटेड, सनकारदा जिला बड़ोदरा के खिलाफ शिकायत विभाग के पास आई थी।
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कीटनाशक कंपनी और व्यापारी भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कीटनाशकों का उत्पादन और बिक्री कर रहे थे। कृषि विभाग ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। इसके बाद अदालत में आरोपियों के खिलाफ केस चला। अदालत ने केस का निपटारा करते हुए सिरसा की एडिशनल मंडी दुकान नंबर 27 बी स्थित प्रो. मैसर्स आरआर इंटरप्राइजेज मालिक राजेंद्र कुमार, गुजरात में रहने वाले कारोबारी प्रकाश भाई और कीटनाशक निर्माता कंपनी मै. एसीटी एग्रो कैम प्राइवेट लिमिटेड, सनकारदा जिला बड़ोदरा को अर्थ दंड की सजा सुनाई है।
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गेहूं में कीड़ा न लगने के लिए प्रयोग में लाई जाती है दवा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बिटाबैक्स नामक दवाई अमेरिका में प्रतिबंधित है और वहां से तैयार होकर भारत में आ रही है। इसका प्रयोग यहां गेहूं में कीड़ा न लगने के लिए किया जाता है। प्रतिबंध के बावजूद कुछ रासायनों की बिक्री नाम बदलकर धड़ल्ले से हो रही है। इनमें से कुछ रसायन ऐसे हैं, जो तत्काल और कुछ लंबे समय बाद अपना असर दिखाते हैं। किसानों को ऐसे कीटनाशकों की खरीद नहीं करनी चाहिए, इससे लोगों के स्वास्थ्य और वातावरण पर खतरनाक प्रभाव पड़ता है।

उप निदेशक डॉक्टर बाबूलाल का कहना है कि जिले की मंडियों में कीटनाशक रसायन और बीज विक्रेताओं पर पैनी नजर रखी जा रही है। गेहूं की फसल पर छिड़काव करने हेतु किसान कीट नाश्य खरीद रहे हैं। कारोबारी मोटे मुनाफे के लालच में प्रतिबंधित कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों की दवाइयां किसानों को बेच रहे हैं।


ये हैं प्रतिबंधित रसायन
1. इथाइल मरकरी क्लोराइड: एगिसान, बैगलाल-6
2. मेथोमिल : रनेट, लैनेट, क्रिनेट
3. कार्बोफयूरॉन : प्यूराडान, अनुक्यूरान, डायफ्यूरॉन, सूमो, प्यूरी
4. फोरेट 10 प्रतिशत दानेदार:घन 10जी, अनुमेट फोरिल, फोरोटाक्स, बुकेर जी, पैराटाक्स, बेज इनमेट, वीरफोर
5. लिंडेन गामा : लिसटाफ, देवीगामा, लिनडस्ट, केनोडेन, रसायन लिंडेन, हिलफाल कैल्थेन, फलश कमांडो मेगाएडा
6. मिथाइल पैराथियान : पेरासिड 50, थानुमार, मेटासिड, फामिडाल चूर्ण, पैराटॉफ, धानुडाल, क्लोफॉस, क्लोरिसिड
7. मोनो क्रोटोफॉस : विलकॉस, मोनोसिड, गार्जियन, मोनोधन, बलवान मनोहर, रसायन फॉस, लूफास, मोनोसिल आदि।

दो साल कैद की सजा
सरकार ने प्रतिबंधित रसायनों की बिक्री रोकने के लिए सख्त कानून बनाएं हैं। कीटनाशक एक्ट 1968 की धारा 29 के तहत ऐसे रसायन बेचने वालों को 10 से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या दो साल की कैद हो सकती है।

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