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दिव्यांग के लोन पर बिचोलिए का ग्रहण, न्यायालय की शरण में पहुंचा पीड़ित

Sat, 10 Mar 2018 02:08 AM IST
Updated Sat, 10 Mar 2018 02:08 AM IST
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दिव्यांग के लोन पर बिचोलिए का ग्रहण, न्यायालय की शरण में पहुंचा पीड़ित
अमर उजाला ब्यूरो
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ओढां (सिरसा)। गांव नुहियांवाली में एक दिव्यांग युवक के साथ लोन दिलवाने के मामले में ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने न्यायालय की शरण लेते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उसने गांव की ही एक महिला की मार्फत हरियाणा पिछड़े वर्ग कल्याण विभाग से दुकानदारी के लिए लोन के लिए आवेदन किया था। उसने बताया कि उसके खाते में जब 50 हजार रुपये की राशि आई तो गांव की महिला कमला देवी ने उसे घर बुलाकर कहा कि उसके खाते में राशि आ गई है। इसलिए वह विभाग को फोन पर सूूचित करे कि उसे राशि मिल चुकी है। युवक के अनुसार जब उसने 50 हजार रुपये कम राशि आने की बात कही तो महिला ने उसे ये कहा कि उसे लोन कम मिल रहा था इसलिए उसने बड़ी मुश्किल से उसका एक लाख रुपये का लोन मंजूर करवाया है। आरोप है कि महिला ने 50 हजार रुपये स्वयं इस्तेमाल कर लिए और उसने उस पर दवाब बनाकर विभागीय अधिकारी को एक लाख रुपये की राशि मिलने की बात कहलवा दी। राशि कम मिलने के चलते युवक ने न्यायालय की शरण ली है। इस मामले में आरोपी महिला व हरियाणा पिछड़े वर्ग कल्याण निगम के प्रबंधक को लिगल नोटिस जारी किए गए हैं।
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ये मामला मीडिया तक पहुंचने के बाद हड़कंप की स्थिति देखी गई। महिला ने सफाई दी तो वहीं निगम के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने युवक को नियमानुसार एक लाख रुपये का लोन जारी किया था। इस मामले को लेकर दिनभर मान-मनुहार चलती रही लेकिन पीड़ित पक्ष अपनी कार्रवाई पर अड़ा रहा। युवक ने आरोप लगाया कि महिला कमला देवी ने उसे लोन दिलवाने में बिचोलिए की भूमिका निभाते हुए उसे 50 हजार रुपये का फटका लगाया है। पीड़ित ने न्यायालय की शरण लेते हुए कहा है कि आरोपी के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता आरबी कड़वासरा ने बताया कि उसके दिव्यांग मुवक्किल के साथ ठगी की गई है। महिला के खिलाफ धोखाधड़ी करने के आरोप में कार्रवाई करवाई जाएगी।
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ये है विभागीय प्रावधान
विभागीय प्रावधान के मुताबिक आवेदनकर्ता को जो रोजगार लोन राशि दी जाती है उसमें से उसके लिए आधी राशि उसके खाते में डाली जाती है और आधी राशि उस फर्म के खाते में डाली जाती है जहां से लाभार्थी द्वारा सामान की खरीद की जाती है। 50 हजार रुपये की राशि पीड़ित सुरेंद्र के खाते में डाल दी गई और बाकी राशि फर्म से सामान का बिल दिखाने के बाद उसके खाते में डाल दी गई। लेकिन महिला ने फर्म के खाते से 50 हजार रुपये की राशि निकलवाकर स्वयं इस्तेमाल कर ली।
हमने तो एक लाख का दिया था लोन
हमने सुरेंद्र कुमार का एक लाख रुपये का दिव्यांग प्रमाण पत्र पर दुकानदारी करने के लिए लोन दिया था। 50 हजार रुपये की राशि जिस दुकान से सामान खरीदा गया उस दुकानदार के खाते में डाले गए। बाकी 50 हजार रुपये की राशि सुरेंद्र के खाते में डाल दी गई थी। इस मामले में विभाग का किसी तरह का कोई कसूर नहीं है। हमने लोन का पूरा कार्य नियमानुसार किया है।

-वजीर सिंह, प्रबंधक (हरियाणा पिछड़े वर्ग कल्याण निगम)
बॉक्स :-
मैंने युवक से कोई ठगी नहीं की। उससे मैंने 50 हजार रुपये की राशि पूछकर इस्तेमाल की थी। अगर उसे ये ठगी लगती है तो मैं ये 50 हजार रुपये की राशि उसे देने के लिए तैयार हूं। इसके अलावा जो आरोप लगाए जा रहे हैं वो बेबुनियाद हैं।
-कमला देवी, आरोपी।


दिव्यांग ने लोन दिलाने के नाम पर महिला पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप, न्यायालय की शरण में पहुंचा पीड़ित
-विभाग ने दिव्यांग के नाम पर दुकानदारी के लिए जारी किया था एक लाख का लोन
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