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छत्रपति और रणजीत हत्याकांड की सुनवाई को लेकर रहा कौतूहल

Sun, 17 Sep 2017 12:52 AM IST
Updated Sun, 17 Sep 2017 12:52 AM IST
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छत्रपति और रणजीत हत्याकांड की सुनवाई को लेकर रहा कौतूहल
छत्रपति और रणजीत हत्याकांड की सुनवाई को लेकर रहा कौतूहल
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सिरसा में रहा हाई अलर्ट, नाकों पर जारी रहा तलाशी अभियान
डेरा रोड पर जगह-जगह पर नाकाबंदी
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में शनिवार को वर्ष 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और कुरुक्षेत्र के गांव खानपुर ओलिया निवासी डेरा के पूर्व सेवादार रणजीत सिंह की हत्या के मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई की। जिसे लेकर सिरसा जिले में हाई अलर्ट रहा। नगर में जगह-जगह पर नाकाबंदी कर वाहनों की सघन जांच जारी रही तो दूसरी ओर शाह सतनाम चौक से डेरा तक आवागमन काफी कम रहा। शुक्रवार रात को पुलिस अधीक्षक अश्विन शैणवी ने नगर में जगह-जगह जाकर चेकिंग की और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तथा नाका पर तैनात पुलिस अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए।
गौरतलब हो कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और कुरुक्षेत्र के गांव खानपुर ओलिया निवासी डेरा के पूर्व सेवादार रणजीत सिंह की हत्या के मामले में डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम को ही मुख्य साजिशकर्ता मानकर दोनों मृतकों के परिजनों ने कोर्ट में मामला दायर किया था। इन दोनों मामलों फाइन बहस शनिवार को हुई, जिसे लेकर सिरसा में पुलिस प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित किया था। शहर में जगह-जगह अर्द्धसैनिक बल और पुलिस जवानों की तैनाती की गई थी। किसी भी प्रकार की अनहोनी से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन ने पुख्ता प्रबंध किए हुए थे। प्रशासन की ओर से डेरा सच्चा सौदा की तरफ जाने वाले बेगू रोड पर कर्फ्यू हटाया जा चुका है पर इस मार्ग पर खुली दुकानों पर दुकानदार हाथ पर हाथ रखकर बैठे हुए हैं। शनिवार को सन्नाटा सा पसरा रहा। हालांकि सुरक्षाबल किसी भी प्रकार का रिस्क लेने के मूड में नहीं थे और उन्होंने इस इलाके में खासी चौकसी बनाई हुई थी।
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जगह-जगह नाके लगाकर रोड से गुजरने वाले हर वाहन की तलाशी ली जा रही थी और उनके नंबर नोट किए जा रहे थे। पूरी तसल्ली करने के बाद ही वाहन चालकों को वहां से गुजरने दिया जा रहा था। शहर के मुख्य टाउन पार्क के निकट लालबत्ती चौक पर भी जवानों की तैनाती रही। सुबह सेही हथियारबंद जवानों की तैनाती को लेकर लोग तरह-तरह के कयास लगाते रहे। शात सतनाम चौक से नेजिया टी-प्वाइंट तक करीब पांच स्थानों पर अर्द्धसैनिक बल के जवान तैनात रहे। नया डेरा तक ही श्रद्धालु सीमित रहे। नया डेरा के गेट शनिवार को भी बंद रहे।
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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा राम रहीम पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और कुरुक्षेत्र के गांव खानपुर ओलिया निवासी डेरा के पूर्व सेवादार रणजीत सिंह की हत्या के मामलों की सुनवाई को लेकर शहरवासियों में काफी कौतूहल देखा गया। लोग दिनभर टीवी चैनलों पर चिपके रहे और पल-पल दोनों मामलों की सुनवाई से संबंधित प्रतिक्रियाओं को ध्यानपूर्वक सुनते नजर आए। इतना ही नहीं लोगों में ये कयास भी लगाए जा रहे थे कि बाबा राम रहीम के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में होने के कारण अब सिरसा में किसी प्रकार की हिंसा की गुंजाइश तो नहीं है पर पिछले 15 सालों से चले आ रहे इन दोनों महत्वपूर्ण केसों में निर्णय जल्द ही सुनने को मिलेगा।

साध्वी की चिट्ठी को किया था प्रकाशित
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति सिरसा में अपने सांध्य दैनिक अखबार में डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ खबरें प्रकाशित की थीं। डेरा में साध्वियों से हो रहे यौन शोषण का खुलासा भी सर्वप्रथम उन्होंने अपने अखबार में ही प्रकाशित किया था। डेरा के खिलाफ लगातार खबरें छापने पर डेरा के ही दो अनुयायियों ने 24 अक्तूबर 2002 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को उनको घर से बाहर बुलाकर गोली मार दी थी। उसके बाद एक आरोपी को पुलिस ने मौके पर ही पकड़ लिया था, जबकि दूसरे को बाद में गिरफ्तार किया गया था। 21 नवंबर 2002 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की दिल्ली स्थित अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। बाद में इस केस की जांच सीबीआई ने आरंभ की थी।


डेरे की गतिविधि से वाकिफ था रणजीत सिंह
कुरुक्षेत्र के गांव खानपुर ओलिया रणजीत सिंह डेरा की मैनेजमेंट कमेटी का सदस्य था। वह बाबा राम रहीम का करीबी माना जाता था, जिसके चलते उसे डेरे की हर गतिविधि का पता था। डेरा में साध्वियों के साथ हो रहे यौन शोषण की भी जानकारी रणजीत को रही थी। आरोप है कि रणजीत सिंह की बहन के साथ थी बाबा राम रहीम ने बलात्कार किया था और इस राज को किसी पर रणजीत सिंह उजागर न कर दे, इसलिए उसकी रहस्यमय परिस्थितियों में 10 जुलाई 2003 को हत्या कर दी गई थी। इस मामले में भी रणजीत सिंह के परिजनों ने बाबा राम रहीम को ही हत्याकांड का प्रमुख दोषी मानकर अदालत में याचिका दायर की थी। उधर, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति ने कहा कि अभी उनके पिता की हत्या का केस केवल आरग्यूमेंट पर है और फाइनल निर्णय आने में थोड़ा वक्त लग सकता है। अंशुल छत्रपति ने कहा कि उन्हें पूरी आशा है कि उनके पिता रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा।
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