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डेरा प्रकरण में प्रयोग की गाडिय़ों का प्रशासन नहीं कर रहा भुगतान
Updated Fri, 02 Feb 2018 12:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
साध्वी यौन शोषण मामले में अगस्त माह में डेरा प्रमुख को सुनाई गई सजा के दौरान प्रशासन ने शहर में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस फोर्स, मिलिट्री व प्रशासनिक अधिकारियों की गश्त के लिए किराये पर लिए गए निजी वाहनों का अभी तक भुगतान नहीं किया है। वीरवार को वाहन मालिक उपायुक्त प्रभजोत सिंह को ज्ञापन देकर गाड़ियों का किराया देने की मांग की।
लघु सचिवालय में उपायुक्त को ज्ञापन देने पहुंचे गाड़ी मालिक सुरजीत, रमेश सोनी, अमन आदि ने बताया कि डेरा प्रकरण के दौरान प्रशासन 90 के करीब कैंटर, ट्रक, कार, पिकअप आदि गाड़ियां किराए पर ली थीं। इन वाहनों का प्रयोग अधिकारियों, पुलिस फोर्स, मिलिट्री आदि के आवागमन में या उनके लिए खाद्य सामग्री की ढुलाई के लिए किया गया था। उस दौरान गाड़ियों में डीजल-पेट्रोल आदि तो प्रशासन की तरफ से डलवाया गया, लेकिन गाड़ियों के किराये की राशि बाद में देने की बात कही।
उन्होंने बताया कि इन गाड़ियों का प्रयोग 20 से 30 दिन तक किया गया और एक गाड़ी पंचकूला में ही करीब डेढ़ माह तक रखी गई थी, लेकिन किसी भी गाड़ी की किराया राशि अभी तक वाहन मालिकों को नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि तय रेट के अनुसार एक गाड़ी का किराया करीब 25 हजार रुपये बैठता है। इस प्रकार 90 गाड़ियों की कुल राशि 22.50 लाख रुपये होती है।
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डीसी ने कहा कि लिस्ट में नहीं इनकी गाड़ियों के नंबर ही
उपायुक्त प्रभजोत सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से डेरा प्रकरण दौरान प्रयोग की गई गाड़ियों के भुगतान के लिए पांच लाख रुपये आए थे जो कि गाड़ी मालिकों के बांट दिए गए थे। उन्होंने बताया कि आज जो लोग आए हैं, उनकी गाड़ियों के नंबर उनकी लिस्ट में नहीं थे। फिर भी उन्होंने गाड़ी चालकों से गाड़ियों के नंबर और मालिकों के नाम लिखकर देने को कहा है, जिसकी जांच की जाएगी और वास्तव में इनकी गाड़ियों का प्रयोग किया गया है तो सरकार से इनका भुगतान करने के लिए डिमांड भेजी जाएगी।
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सिरसा।
साध्वी यौन शोषण मामले में अगस्त माह में डेरा प्रमुख को सुनाई गई सजा के दौरान प्रशासन ने शहर में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस फोर्स, मिलिट्री व प्रशासनिक अधिकारियों की गश्त के लिए किराये पर लिए गए निजी वाहनों का अभी तक भुगतान नहीं किया है। वीरवार को वाहन मालिक उपायुक्त प्रभजोत सिंह को ज्ञापन देकर गाड़ियों का किराया देने की मांग की।
लघु सचिवालय में उपायुक्त को ज्ञापन देने पहुंचे गाड़ी मालिक सुरजीत, रमेश सोनी, अमन आदि ने बताया कि डेरा प्रकरण के दौरान प्रशासन 90 के करीब कैंटर, ट्रक, कार, पिकअप आदि गाड़ियां किराए पर ली थीं। इन वाहनों का प्रयोग अधिकारियों, पुलिस फोर्स, मिलिट्री आदि के आवागमन में या उनके लिए खाद्य सामग्री की ढुलाई के लिए किया गया था। उस दौरान गाड़ियों में डीजल-पेट्रोल आदि तो प्रशासन की तरफ से डलवाया गया, लेकिन गाड़ियों के किराये की राशि बाद में देने की बात कही।
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उन्होंने बताया कि इन गाड़ियों का प्रयोग 20 से 30 दिन तक किया गया और एक गाड़ी पंचकूला में ही करीब डेढ़ माह तक रखी गई थी, लेकिन किसी भी गाड़ी की किराया राशि अभी तक वाहन मालिकों को नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि तय रेट के अनुसार एक गाड़ी का किराया करीब 25 हजार रुपये बैठता है। इस प्रकार 90 गाड़ियों की कुल राशि 22.50 लाख रुपये होती है।
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डीसी ने कहा कि लिस्ट में नहीं इनकी गाड़ियों के नंबर ही
उपायुक्त प्रभजोत सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से डेरा प्रकरण दौरान प्रयोग की गई गाड़ियों के भुगतान के लिए पांच लाख रुपये आए थे जो कि गाड़ी मालिकों के बांट दिए गए थे। उन्होंने बताया कि आज जो लोग आए हैं, उनकी गाड़ियों के नंबर उनकी लिस्ट में नहीं थे। फिर भी उन्होंने गाड़ी चालकों से गाड़ियों के नंबर और मालिकों के नाम लिखकर देने को कहा है, जिसकी जांच की जाएगी और वास्तव में इनकी गाड़ियों का प्रयोग किया गया है तो सरकार से इनका भुगतान करने के लिए डिमांड भेजी जाएगी।