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जेल भरने के लिए उमड़े हजारों कर्मचारी
Updated Wed, 31 Jan 2018 01:20 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर मंगलवार को सभी 11 ट्रेड यूनियनों सहित विभिन्न विभागों की कर्मचारी यूनियनों के बैनर तले हजारों की संख्या में कर्मचारी बरनाला रोड स्थित ताऊ देवीलाल सामुदायिक पार्क में एकत्रित हुए। इनमें सबसे अधिक संख्या आशा वर्कर्स की रही। इतनी बड़ी संख्या में उमड़े कर्मचारियों को जेल तक पहुंचाने के लिए प्रशासन पुख्ता बंदोबस्त भी नहीं कर पाया। बसें न होने की वजह से सभी कर्मचारी पार्क से पैदल ही जेल की तरफ कूच कर गए। इसके बाद पुलिस लाइन में एक पुलिस प्रशासन और चार रोडवेज की बसों को इंतजाम किया गया, लेकिन उनमें भी इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी नहीं समा पाए, जिस कारण कर्मचारी पैदल ही नारेबाजी करते हुए पुलिस लाइन के मैदान में बनाई गई अस्थायी जेल तक पहुंच गये। सर्वकर्मचारी संघ के जिला प्रधान मदनलाल खोथ ने बताया कि दो बजे गिरफ्तारी दी और चार बजे सभी को छोड़ दिया गया। उन्होंने बताया अब तक की ये सबसे बड़ी गिरफ्तारी है। इसमें तीन हजार कर्मचारियों ने गिरफ्तारी दी है।
इस दौरान कुछ कर्मचारी जिला जेल तक जाने के लिए अड़ गए और पुलिस लाइन के सामने ही बीच सड़क में बैठ गईं, जिससे यातायात जाम हो गया। कर्मचारी नेताओं और पुलिस अधिकारियों द्वारा समझाने के बाद वे पुलिस लाइन में चली गईं। बाद में कागजी कार्रवाई पूरी करके उन्हें छोड़ दिया गया। इससे पूर्व पार्क में सुबह साढ़े 10 बजे से ही जिले भर से ट्रेड यूनियनों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था।
दोपहर एक बजे तक यहां पर सभा आयोजित की गई। यूनियन नेताओं ने प्रदेश और केंद्र की सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप जड़े। उन्होंने कहा कि सरकार आशा वर्कर्स को एक हजार रुपये, आंगनबाड़ी वर्कर्स को 2500 रुपये तथा अन्य कर्मचारियों को साढ़े आठ हजार रुपये प्रतिमाह का वेतन देती है, जबकि विधायकों और सांसदों के वेतन लाखों रुपये वेतन देती है और हर वर्ष इसे बढ़ा भी देती है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम तेल कंपनियों पर छोड़ दिए, जो कि हर सप्ताह कीमतों में बेतहाशा वृद्धि कर रही है, जबकि क्रूड ऑयल के दाम बेहद कम हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कच्चे और ठेके पर कर्मचारी रखकर उनका शोषण कर रही है। उनसे काम तो पक्का लिया जाता है, लेकिन वेतन बेहद कम दिया जाता है। सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान मदनलाल खोथ ने बताया कि दो बजे गिरफ्तारी दी और चार बजे सभी को छोड़ दिया गया। उन्होंने दावा किया इससे पहले इतने कर्मचारियों ने कभी गिरफ्तारी नहीं दी।
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ये उठाईं मुख्य मांगें
आंदोलन दौरान कर्मचारियों ने समान काम के लिए समान वेतन, महंगाई पर रोक लगाने, न्यूनतम 18 हजार रुपये वेतन देने, श्रम कानूनों में मजदूर हित में संशोधन करने, निर्माण मजदूरों का पंजीकरण करने, परियोजना कर्मियों को पक्का करने, सभी मजदूरों को पांच हजार रुपये मासिक पेंशन देने, ग्रामीण सफाई कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी कर्मी का दर्जा देने, मिड-डे मील को पंचायतों को सौंपने की योजना रद्द करने, मनरेगा के तहत नियमित काम और 600 रुपये मजदूरी देने, रेहड़ी पटरी मजदूरों को शहरों में स्थायी बूथ देने, नौकरी से निकाले गए सभी मजदूरों और कर्मचारियों को बहाल करने, बीमा और बैंकिंग में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगाने आदि की मांग की।
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सिरसा।
ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर मंगलवार को सभी 11 ट्रेड यूनियनों सहित विभिन्न विभागों की कर्मचारी यूनियनों के बैनर तले हजारों की संख्या में कर्मचारी बरनाला रोड स्थित ताऊ देवीलाल सामुदायिक पार्क में एकत्रित हुए। इनमें सबसे अधिक संख्या आशा वर्कर्स की रही। इतनी बड़ी संख्या में उमड़े कर्मचारियों को जेल तक पहुंचाने के लिए प्रशासन पुख्ता बंदोबस्त भी नहीं कर पाया। बसें न होने की वजह से सभी कर्मचारी पार्क से पैदल ही जेल की तरफ कूच कर गए। इसके बाद पुलिस लाइन में एक पुलिस प्रशासन और चार रोडवेज की बसों को इंतजाम किया गया, लेकिन उनमें भी इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी नहीं समा पाए, जिस कारण कर्मचारी पैदल ही नारेबाजी करते हुए पुलिस लाइन के मैदान में बनाई गई अस्थायी जेल तक पहुंच गये। सर्वकर्मचारी संघ के जिला प्रधान मदनलाल खोथ ने बताया कि दो बजे गिरफ्तारी दी और चार बजे सभी को छोड़ दिया गया। उन्होंने बताया अब तक की ये सबसे बड़ी गिरफ्तारी है। इसमें तीन हजार कर्मचारियों ने गिरफ्तारी दी है।
इस दौरान कुछ कर्मचारी जिला जेल तक जाने के लिए अड़ गए और पुलिस लाइन के सामने ही बीच सड़क में बैठ गईं, जिससे यातायात जाम हो गया। कर्मचारी नेताओं और पुलिस अधिकारियों द्वारा समझाने के बाद वे पुलिस लाइन में चली गईं। बाद में कागजी कार्रवाई पूरी करके उन्हें छोड़ दिया गया। इससे पूर्व पार्क में सुबह साढ़े 10 बजे से ही जिले भर से ट्रेड यूनियनों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था।
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दोपहर एक बजे तक यहां पर सभा आयोजित की गई। यूनियन नेताओं ने प्रदेश और केंद्र की सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप जड़े। उन्होंने कहा कि सरकार आशा वर्कर्स को एक हजार रुपये, आंगनबाड़ी वर्कर्स को 2500 रुपये तथा अन्य कर्मचारियों को साढ़े आठ हजार रुपये प्रतिमाह का वेतन देती है, जबकि विधायकों और सांसदों के वेतन लाखों रुपये वेतन देती है और हर वर्ष इसे बढ़ा भी देती है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम तेल कंपनियों पर छोड़ दिए, जो कि हर सप्ताह कीमतों में बेतहाशा वृद्धि कर रही है, जबकि क्रूड ऑयल के दाम बेहद कम हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कच्चे और ठेके पर कर्मचारी रखकर उनका शोषण कर रही है। उनसे काम तो पक्का लिया जाता है, लेकिन वेतन बेहद कम दिया जाता है। सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान मदनलाल खोथ ने बताया कि दो बजे गिरफ्तारी दी और चार बजे सभी को छोड़ दिया गया। उन्होंने दावा किया इससे पहले इतने कर्मचारियों ने कभी गिरफ्तारी नहीं दी।
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ये उठाईं मुख्य मांगें
आंदोलन दौरान कर्मचारियों ने समान काम के लिए समान वेतन, महंगाई पर रोक लगाने, न्यूनतम 18 हजार रुपये वेतन देने, श्रम कानूनों में मजदूर हित में संशोधन करने, निर्माण मजदूरों का पंजीकरण करने, परियोजना कर्मियों को पक्का करने, सभी मजदूरों को पांच हजार रुपये मासिक पेंशन देने, ग्रामीण सफाई कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी कर्मी का दर्जा देने, मिड-डे मील को पंचायतों को सौंपने की योजना रद्द करने, मनरेगा के तहत नियमित काम और 600 रुपये मजदूरी देने, रेहड़ी पटरी मजदूरों को शहरों में स्थायी बूथ देने, नौकरी से निकाले गए सभी मजदूरों और कर्मचारियों को बहाल करने, बीमा और बैंकिंग में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगाने आदि की मांग की।