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बिना चर्चा एजेंडा शामिल करने पर पार्षदों ने डीसी ज्ञापन सौंप की जांच की मांग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 11:15 PM IST
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Councilors submitted DC memorandum demanding investigation without including discussion agenda
समस्याओ को लेकर डीसी से मिलने जाते पार्षद। - फोटो : Sirsa
सिरसा। नगर परिषद में हाउस की मीटिंग में शामिल एजेंडों को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। पार्षदों ने बिना चर्चा के एजेंडे में प्वाइंट शामिल करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही इस मामले की जांच की भी मांग की है। गुस्साए पार्षदों ने इस समस्या को लेकर डीसी से मुलाकात करके शिकायत भी सौंपी है। इसके अलावा शहर में भू-जल स्तर की स्थिति सुधारने के लिए भी एक नया प्रस्ताव पेश किया है जिससे सरकार का पैसा भी बचेगा और भू-जल स्तर में भी सुधार होगा।
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वीरवार को पार्षद विकास जैन, विकास गुज्जर, कौशल्या वर्मा लघु सचिवालय स्थित डीसी ऑफिस पहुंचे। उन्होंने डीसी से मुलाकात करके शिकायत सौंपी। पार्षदों ने कहा कि नगर परिषद हाउस की बैठक 2 जुलाई को हुई थी। इस बैठक की प्रोसीडिंग बुक में एजेंडा नंबर 2, 31, 37, 39 और 40 पर नगर परिषद में कोई चर्चा नहीं हुई। इन प्रस्तावों पर पार्षदों का विरोध भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा बैठक के बाद अपनी मर्जी से एजेंडा शामिल करके सर्वसम्मति से स्वीकार लिखा गया है। उन्होंने डीसी से मांग की है कि इस मामले की पूरी जांच करवाई जाए।
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रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर डीसी को सौंपा ज्ञापन
पार्षद जगजीत सिंह, विकास गुज्जर, विकास जैन, शीला सहगल, कौशल्या वर्मा, सुनील बहल, सुदेश कुमारी, नारायण सिंह, वैशाली रातुसरिया, सुमन लता, राजेंद्र कुमार, रणधीर सिंह, संगीता सचदेवा ने अपना हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन डीसी को भेजा। उन्होंने कहा कि जिले में भू-जल स्तर पिछले कुछ वर्षों में 300 से 700 फुट तक तक पहुंच गया है। ये स्थिति काफी खतरनाक है। 125 ट्यूबवेल पानी का दोहन कर रहे हैं लेकिन वाटर रिचार्ज की ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन शहर में बरसाती पानी निकासी के लिए स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज के लिए प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इस पर करीब 37 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। पार्षदों ने सुझाव दिया कि शहर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्वाइंट स्थापित करवाएं जाएं जिससे पानी रिचार्ज किया जा सके। इससे ड्रेनेज की जरूरत नहीं बचेगी और 38 करोड़ रुपया बचेगा। श्रेेहर में 50 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर केवल 2 करोड़ से भी कम खर्चा आएगा।
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