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एमए इतिहास के पेपर में 14 अंकों का प्रश्न पत्र आया कम, विद्यार्थियों ने सौंपा ज्ञापन
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इतिहास विषय के प्रश्न पत्र दिखते विद्यार्थी।
- फोटो : Sirsa
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चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में चल रही दिसंबर की परीक्षाओं के चलते विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को हुई एमए अंतिम वर्ष इतिहास की परीक्षा में बैठे विद्यार्थियों को जब हिस्ट्रोग्राफी का पेपर मिला तो उसमें केवल चार यूनिट ही थीं, जबकि कुल पांच यूनिट होती हैं। विद्यार्थियों का कहना था कि 14 अंक की एक यूनिट नहीं आई। प्रश्न पत्र का लगभग 50 प्रतिशत भाग पाठ्यक्रम से बाहर था। परीक्षा खत्म होने के बाद विद्यार्थियों ने परीक्षा अधीक्षक को पत्र लिखकर ग्रेस मार्क की अपील की है।
इतिहास के विद्यार्थियों ने परीक्षा शुरू होने के बाद जब प्रश्न पत्र देखा तो पता चला कि पांच यूनिट के बजाय चार ही यूनिट हैं, साथ ही प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर के हैं। जब उन्होंने इसके बारे में विषय संबंधित प्रोफेसर से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि परीक्षा शुरू करो। प्रश्न पत्र का मिलान कर देखते हैं कि कहां गलती है। लगभग आधा घंटा बाद परीक्षा अधीक्षक सत्यवान दलाल ने कक्षाओं में बैठे विद्यार्थियों से कहा कि विद्यार्थी तीन यूनिट में आए हुए प्रश्नों में से ही एक अतिरिक्त प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं। अधिकतम अंकों की इकाई में से जो प्रश्न आता है, उसमें से किसी भी एक प्रश्न को चौथी इकाई के रूप में लिख सकते हैं।
वहीं विद्यार्थियों का कहना था कि प्रश्न पत्र में प्रश्न पहले ही पाठ्यक्रम में से नहीं है। ऐसे में वह चौथी इकाई के रूप में कौन सा प्रश्न करें। इस पर परीक्षा अधीक्षक बोले कि इस मामले में परीक्षा खत्म होने के बाद देखते हैं। सभी विद्यार्थी ग्रेस मार्क व प्रश्नों के पाठ्यक्रम से ना आने को लेकर एक पत्र लिखकर दें, ताकि सभी को इस परीक्षा की ग्रेस मार्किंग दी जा सकें।
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यह बोले विद्यार्थी - मिले ग्रेस मार्किंग
विद्यार्थी नरेश, गजेंद्र पाल, मंजू, सुमन, राजेश का कहना है कि प्रश्न पत्र में अधिकतर प्रश्न पाठ्यक्रम से नहीं थे और ना ही प्रश्न पत्र में पांचवीं इकाई थी, लेकिन परीक्षा अधीक्षक ने ग्रेस मार्किंग का कहकर परीक्षा दिलवा दी। ग्रेस मार्किंग मिलेगी या नहीं, इसका अभी तक पता नहीं। परीक्षा खत्म होने के बाद एमए अंतिम वर्ष के इतिहास विभाग के विद्यार्थियों ने परीक्षा अधीक्षक को पत्र लिख ग्रेस मार्किंग की अपील की है। वहीं छात्र नेता कर्ण कसवां ने बताया कि बीते दिनों भी एमए हिंदी में प्रश्न पत्र आउट ऑफ सिलेबस था। वहीं टैगोर भवन में वीरवार को सीटिंग प्लान न बनाए जाने के कारण 20 मिनट तक परीक्षार्थियों को इंतजार करना पड़ा। विश्वविद्यालय को अपनी इन कमियां को दूर करना चाहिए, ताकि छात्रों को किसी प्रकार की दिक्कत न आए।
शिकायत मेरे पास आ गई है। मामला शिकायत कमेटी के समक्ष रखा जाएगा और पेपर सेट करने वाले एग्जामिनर से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। बच्चों को अतिरिक्त प्रश्न के अंक दिए जाएंगे।
- प्रोफेसर सुलतान सिंह, परीक्षा नियंत्रक, सीडीएलयू सिरसा
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इतिहास के विद्यार्थियों ने परीक्षा शुरू होने के बाद जब प्रश्न पत्र देखा तो पता चला कि पांच यूनिट के बजाय चार ही यूनिट हैं, साथ ही प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर के हैं। जब उन्होंने इसके बारे में विषय संबंधित प्रोफेसर से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि परीक्षा शुरू करो। प्रश्न पत्र का मिलान कर देखते हैं कि कहां गलती है। लगभग आधा घंटा बाद परीक्षा अधीक्षक सत्यवान दलाल ने कक्षाओं में बैठे विद्यार्थियों से कहा कि विद्यार्थी तीन यूनिट में आए हुए प्रश्नों में से ही एक अतिरिक्त प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं। अधिकतम अंकों की इकाई में से जो प्रश्न आता है, उसमें से किसी भी एक प्रश्न को चौथी इकाई के रूप में लिख सकते हैं।
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वहीं विद्यार्थियों का कहना था कि प्रश्न पत्र में प्रश्न पहले ही पाठ्यक्रम में से नहीं है। ऐसे में वह चौथी इकाई के रूप में कौन सा प्रश्न करें। इस पर परीक्षा अधीक्षक बोले कि इस मामले में परीक्षा खत्म होने के बाद देखते हैं। सभी विद्यार्थी ग्रेस मार्क व प्रश्नों के पाठ्यक्रम से ना आने को लेकर एक पत्र लिखकर दें, ताकि सभी को इस परीक्षा की ग्रेस मार्किंग दी जा सकें।
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यह बोले विद्यार्थी - मिले ग्रेस मार्किंग
विद्यार्थी नरेश, गजेंद्र पाल, मंजू, सुमन, राजेश का कहना है कि प्रश्न पत्र में अधिकतर प्रश्न पाठ्यक्रम से नहीं थे और ना ही प्रश्न पत्र में पांचवीं इकाई थी, लेकिन परीक्षा अधीक्षक ने ग्रेस मार्किंग का कहकर परीक्षा दिलवा दी। ग्रेस मार्किंग मिलेगी या नहीं, इसका अभी तक पता नहीं। परीक्षा खत्म होने के बाद एमए अंतिम वर्ष के इतिहास विभाग के विद्यार्थियों ने परीक्षा अधीक्षक को पत्र लिख ग्रेस मार्किंग की अपील की है। वहीं छात्र नेता कर्ण कसवां ने बताया कि बीते दिनों भी एमए हिंदी में प्रश्न पत्र आउट ऑफ सिलेबस था। वहीं टैगोर भवन में वीरवार को सीटिंग प्लान न बनाए जाने के कारण 20 मिनट तक परीक्षार्थियों को इंतजार करना पड़ा। विश्वविद्यालय को अपनी इन कमियां को दूर करना चाहिए, ताकि छात्रों को किसी प्रकार की दिक्कत न आए।
शिकायत मेरे पास आ गई है। मामला शिकायत कमेटी के समक्ष रखा जाएगा और पेपर सेट करने वाले एग्जामिनर से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। बच्चों को अतिरिक्त प्रश्न के अंक दिए जाएंगे।
- प्रोफेसर सुलतान सिंह, परीक्षा नियंत्रक, सीडीएलयू सिरसा