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सीडीएलयू की नई व्यवस्था : नया सॉफ्टवेयर तैयार होने के बाद एजेंसी से नाता खत्म, समय की हो रही बचत
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सिरसा। चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी ने अपना नया सॉफ्टवेयर तैयार करवा लिया और अब इस पर काम भी शुरू कर दिया है। इससे जहां एक ओर परीक्षा के लिए रोल नंबर जारी किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मार्किंग से लेकर अन्य काम भी शुरू कर दिया है। अब विवि ने एजेंसी से भी अनुबंध खत्म कर अपने स्तर पर काम शुरू कर दिया है। इससे लाभ ये हुआ है कि समय की बचत हो रही है और पहले से कम समय में परीक्षा परिणाम जारी कर और विद्यार्थियों को मार्कशीट भी जल्द उपलब्ध करवाई जा सकती है।
सीडीएलयू की ओर से परीक्षा व्यवस्था से लेकर परीक्षा परिणाम और डीएमसी तैयार करने का काम एजेंसी के माध्यम से करवाया जाता था। इसके लिए प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये अदा करने पड़ते। ऐसे में कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजकुमार सलार के साथ मिलकर मंथन किया। इसके बाद कई अहम फैसले लिए। इसके तहत
सीडीएलयू प्रशासन ने अपना नया सॉफ्टवेयर तैयार करवाया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों के रोल नंबर जारी किए जाते हैं। उत्तर पुस्तिकाओं की मार्किंग और डाटा अपलोडिंग भी इसी माध्यम से शुरू कर दिया गया है। अब सीडीएलयू अपने स्तर पर ही सभी विद्यार्थियों की मार्क शीट यहां तैयार करवाता है। इससे समय की बचत होती है। पहले परीक्षा परिणाम जारी होने में 4 से 5 माह का समय लगता था, अब 20 दिन से लेकर दो माह के भीतर परिणाम जारी कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं डीएमसी भी समय पर मिल जाती है।
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नकली-असली का चक्कर खत्म, डीएमसी पर दिया क्यू आर कोड
सीडीएलयू ने मार्कशीट को पहले से अधिक सुरक्षित बना दिया है। कई बार मार्कशीट की डुप्लीकेसी की शिकायतें रही थीं। इसलिए असली-नकली का चक्कर खत्म करते हुए सीडीएलयू ने नया फैसला किया है। अब डीएमसी पर क्यू आर कोड लगा दिया है। क्यूआर कोर्ड स्कैन करते ही विद्यार्थी का पूरा रिकार्ड मोबाइल पर आ जाएगा। इससे कोई भी व्यक्ति नकली डीएमसी तैयार नहीं करवा पाएगा।
परीक्षा व्यवस्था को कर दिया है पहले से दुरुस्त : प्रो. राजकुमार सलार
हमने परीक्षा व्यवस्था में कई तरह के सुधार कर दिए हैं। अब परीक्षाएं सीमित समय में करवा ली जाती हैं और परीक्षा परिणाम भी जल्द से जल्द जारी करने का प्रयास किया जाता है। इतना ही नहीं अब सीडीएलयू अपने स्वयं के सॉफ्टवेयर से काम कर रहा है और निजी एजेंसी से अनुबंध करने की भी जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं डीएमसी को पहले से ज्यादा सुरक्षित बना दिया गया है। अब डीएमसी पर क्यूआर कोड नजर आएगा।
- प्रो. राजकुमार सलार, परीक्षा नियंत्रक, सीडीएलयू।
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सीडीएलयू की ओर से परीक्षा व्यवस्था से लेकर परीक्षा परिणाम और डीएमसी तैयार करने का काम एजेंसी के माध्यम से करवाया जाता था। इसके लिए प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये अदा करने पड़ते। ऐसे में कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजकुमार सलार के साथ मिलकर मंथन किया। इसके बाद कई अहम फैसले लिए। इसके तहत
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सीडीएलयू प्रशासन ने अपना नया सॉफ्टवेयर तैयार करवाया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों के रोल नंबर जारी किए जाते हैं। उत्तर पुस्तिकाओं की मार्किंग और डाटा अपलोडिंग भी इसी माध्यम से शुरू कर दिया गया है। अब सीडीएलयू अपने स्तर पर ही सभी विद्यार्थियों की मार्क शीट यहां तैयार करवाता है। इससे समय की बचत होती है। पहले परीक्षा परिणाम जारी होने में 4 से 5 माह का समय लगता था, अब 20 दिन से लेकर दो माह के भीतर परिणाम जारी कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं डीएमसी भी समय पर मिल जाती है।
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नकली-असली का चक्कर खत्म, डीएमसी पर दिया क्यू आर कोड
सीडीएलयू ने मार्कशीट को पहले से अधिक सुरक्षित बना दिया है। कई बार मार्कशीट की डुप्लीकेसी की शिकायतें रही थीं। इसलिए असली-नकली का चक्कर खत्म करते हुए सीडीएलयू ने नया फैसला किया है। अब डीएमसी पर क्यू आर कोड लगा दिया है। क्यूआर कोर्ड स्कैन करते ही विद्यार्थी का पूरा रिकार्ड मोबाइल पर आ जाएगा। इससे कोई भी व्यक्ति नकली डीएमसी तैयार नहीं करवा पाएगा।
परीक्षा व्यवस्था को कर दिया है पहले से दुरुस्त : प्रो. राजकुमार सलार
हमने परीक्षा व्यवस्था में कई तरह के सुधार कर दिए हैं। अब परीक्षाएं सीमित समय में करवा ली जाती हैं और परीक्षा परिणाम भी जल्द से जल्द जारी करने का प्रयास किया जाता है। इतना ही नहीं अब सीडीएलयू अपने स्वयं के सॉफ्टवेयर से काम कर रहा है और निजी एजेंसी से अनुबंध करने की भी जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं डीएमसी को पहले से ज्यादा सुरक्षित बना दिया गया है। अब डीएमसी पर क्यूआर कोड नजर आएगा।
- प्रो. राजकुमार सलार, परीक्षा नियंत्रक, सीडीएलयू।