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आरटीआई के तहत सूचना न देने पर डीसी और सीटीएम सूचना आयोग में तलब
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Wed, 08 Mar 2017 11:47 PM IST
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सिरसा। उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ और नगराधीश वेद बेनीवाल को राज्य सूचना आयोग ने टाइम बांड नोटिस भेजकर सात अप्रैल को तलब किया है। आरटीआई के मामले में सूचना न देने पर आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक एडवोकेट की ओर से सूचना आयोग में अपील दाखिल की गई थी। राज्य सूचना आयुक्त प्रहलाद राय मीणा मामले की सुनवाई करेंगे।
पवन पारिक एडवोकेट ने नगराधीश से 22 अगस्त 2016 को कुछ जानकारी मांगी थी। सूचना न मिलने पर उन्होंने प्रथम अपीलीय अधिकारी-सह-उपायुक्त के समक्ष 26 सितंबर 2016 को प्रथम अपील दाखिल की थी। वहां से भी जानकारी न मिलने पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग में एक नवंबर 2016 को द्वितीय अपील दाखिल की। आयोग ने उनकी अपील स्वीकार करते हुए राज्य जनसूचना अधिकारी सह नगराधीश तथा प्रथम अपीलीय अधिकारी सह उपायुक्त को टाइम बांड नोटिस जारी कर सात अप्रैल को आयोग में तलब किया है।
पहले भी की थी तलख टिप्पणी
राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई के मामलों में सूचना न देने पर प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ तलख टिप्पणी की थी। ओएचएम सिनेगार्डन के मामले में डॉ. गुलशन चौहान की अपील पर फैसला सुनाते हुए भी राज्य सूचना आयोग ने नगराधीश और उपायुक्त की कार्यशैली पर तलख टिप्पणी की थी। सूचना आयुक्त प्रह्लादराय मीणा ने नगराधीश वेद प्रकाश को शोकॉज नोटिस जारी किया था। उन्हें 20 अप्रैल को आयोग में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए थे। जबकि उपायुक्त के बारे में कहा गया था कि आरटीआई के मामले वे अपना कार्य बेहतर ढंग से नहीं कर रहीं।
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ये मांगी थी आरटीआई में जानकारी
आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक एडवोकेट ने उपायुक्त कार्यालय से 26 जनवरी 2016 तथा 15 अगस्त 2016 को जिला प्रशासन से सम्मानित किए गए लोगों के बारे में जानकारी मांगी थी। पूछा गया था कि कितने लोग सम्मानित किए गए। उन्हें सम्मानित करने का आधार क्या था। सम्मानित करने के लिए क्या मापदंड अपनाए गए। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस समारोह पर सम्मानित करने के लिए कब लोगों से आवेदन आमंत्रित किए गए। सम्मानित किए गए लोगों के चयन के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई। आरटीआई में सम्मानित किए गए लोगों के पोर्टफोलियो की प्रति भी मांगी गई थी। इसके साथ ही इन कार्यक्रमों पर हुए खर्च का विवरण भी मांगा गया था।
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पवन पारिक एडवोकेट ने नगराधीश से 22 अगस्त 2016 को कुछ जानकारी मांगी थी। सूचना न मिलने पर उन्होंने प्रथम अपीलीय अधिकारी-सह-उपायुक्त के समक्ष 26 सितंबर 2016 को प्रथम अपील दाखिल की थी। वहां से भी जानकारी न मिलने पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग में एक नवंबर 2016 को द्वितीय अपील दाखिल की। आयोग ने उनकी अपील स्वीकार करते हुए राज्य जनसूचना अधिकारी सह नगराधीश तथा प्रथम अपीलीय अधिकारी सह उपायुक्त को टाइम बांड नोटिस जारी कर सात अप्रैल को आयोग में तलब किया है।
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पहले भी की थी तलख टिप्पणी
राज्य सूचना आयोग ने आरटीआई के मामलों में सूचना न देने पर प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ तलख टिप्पणी की थी। ओएचएम सिनेगार्डन के मामले में डॉ. गुलशन चौहान की अपील पर फैसला सुनाते हुए भी राज्य सूचना आयोग ने नगराधीश और उपायुक्त की कार्यशैली पर तलख टिप्पणी की थी। सूचना आयुक्त प्रह्लादराय मीणा ने नगराधीश वेद प्रकाश को शोकॉज नोटिस जारी किया था। उन्हें 20 अप्रैल को आयोग में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए थे। जबकि उपायुक्त के बारे में कहा गया था कि आरटीआई के मामले वे अपना कार्य बेहतर ढंग से नहीं कर रहीं।
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ये मांगी थी आरटीआई में जानकारी
आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक एडवोकेट ने उपायुक्त कार्यालय से 26 जनवरी 2016 तथा 15 अगस्त 2016 को जिला प्रशासन से सम्मानित किए गए लोगों के बारे में जानकारी मांगी थी। पूछा गया था कि कितने लोग सम्मानित किए गए। उन्हें सम्मानित करने का आधार क्या था। सम्मानित करने के लिए क्या मापदंड अपनाए गए। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस समारोह पर सम्मानित करने के लिए कब लोगों से आवेदन आमंत्रित किए गए। सम्मानित किए गए लोगों के चयन के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई। आरटीआई में सम्मानित किए गए लोगों के पोर्टफोलियो की प्रति भी मांगी गई थी। इसके साथ ही इन कार्यक्रमों पर हुए खर्च का विवरण भी मांगा गया था।